‘हमें डर कोरोना का नहीं परिवार चलाने की सता रही है चिंता’

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : कोरोना काल ने हर वर्ग पर आर्थिक रूप से असर डाला है, मगर सबसे ज्यादा इसकी मार रोज कमाने खाने वालों पर पड़ रही है। इनमें में शामिल हैं रिक्शा चालक जिनकी अभी दो जून की रोटी का भी जुगाड़ होना मुश्किल हो रहा है। साल्टलेक के सरकारी दफ्तरों के आसपास रिक्शा लगाने वाले रिक्शा चालकों का कहना है कि कभी-कभी तो बाेहनी भी नहीं हो पाती है। उनका कहना है कि लॉकडाउन भले नहीं है लेकिन स्थिति लॉकडाउन जैसी है। लोग कम निकल रहे हैं और दफ्तरों में भी कर्मचारी कम आ रहे हैं। ऐसे में हमारी आर्थिक स्थिति खराब हो रही है। एक रिक्शा चालक का कहना है कि हमें कोरोना से जितना डर नहीं उससे अधिक परिवार चलाने की चिंता सता रही है। विकास भवन के सामने एक रिक्शा चालक का कहना है कि सुबह 9 बजे आये हैं, दाेपहर के 3 बजे तक कोई ग्राहक नहीं मिला है। रास्ते पर लोग नहीं हैं। बहुत ही कम ग्राहक आ रहे हैं। सरकार हमारे बारे में कुछ सोचे वरना हमारा घर चलाना भी मुश्किल हो जायेगा। एक रिक्शा वाला ने कहा कि बेटा काम कर रहा है तो दो वक्त का खाना मिल रहा है वरना वह भी नहीं मिल पाता। स्थिति कब तक ठीक होगी यह कहना मुश्किल है।

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