बंगाल की राजनीति में 8 चरणों में मतदान के बड़े मायने…

कोलकाता : चुनाव आयोग ने 5 राज्यों में चुनाव की घोषणा की है और इनमें सबसे अहम है पश्चिम बंगाल। यहां के इतिहास में सम्भवत: पहली बार चुनाव 8 चरणों में होने जा रहा है। यहां तक कि जिलों में भी चुनाव चरणों में हो रहे हैं। यहां इस बार तृणमूल को भाजपा सीधी टक्कर देने को कमर कस रही है, मगर सबसे बड़ा सवाल तृणमूल ने 8 चरणों के मतदान पर उठाया है। आखिर आठ चरणों में चुनाव के क्या मायने हैं…
2016 में चुनाव के चरणों पर एक नजर
* वर्ष 2016 में बंगाल में 6 चरणों में चुनाव हुए थे लेकिन नक्सल प्रभावित इलाकों को देखते हुए तब एक चरण को दो तारीखों में बांट दिया गया था और इस तरह मतदान 7 चरणों में पूरा हुआ था। वर्ष 2016 में भाजपा को केवल 3 सीटें मिली थीं लेकिन तीन वर्षों के बाद ही भाजपा ने बंगाल में अपनी अलग स्थिति बना ली। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 42 में से 18 सीटों पर जीत मिली और उसका वोट प्रतिशत बढ़कर 40.64 हो गया। यही वजह है कि इस बार तृणमूल और भाजपा में जोरदार टक्कर है।
लंबा चुनाव से किसे फायदा और किसे नहीं ?
चुनाव अगर लंबा चले तो किसे फायदा होगा और किसे नहीं, यह तो वक्त बतायेगा, मगर राजनीतिज्ञों की मानें तो बंगाल में जिस तरह भाजपा उभर रही है, उससे माना जा रहा है कि भाजपा हर फेज के लिए अपनी अलग ही रणनीति तैयार करेगी। एक ओर जहां तृणमूल ने इसका विरोध जताया है वहीं कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने चुनाव आयोग के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि बंगाल में चुनाव का मतलब ही है अशांति। हमलोगों ने चुनाव आयोग से आवेदन किया था कि चुनाव शांतिपूर्ण हो। भाजपा महासचिव कैलाशविजयवर्गीय ने कहा कि निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए यह आवश्यक था। उन्होंने कहा, ‘चुनावों की घोषणा के साथ बंगाल में शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव कराने के लिए असामाजिक तत्वों को नियंत्रित करना होगा। साथ ही राज्य के हर जिले में निष्पक्ष अधिकारियों की तैनाती करनी होगी ताकि चुनाव में कोई बाधा नहीं आए।’ वामपंथी दलों ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग बंगाल में आठ चरणों में चुनाव कराने के औचित्य पर कोई ठोस कारण नहीं बता पा रहा है। उन्होंने इसके पीछे की मंशा पर सवाल उठाए। माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने चुनाव आयोग से अपील की कि बंगाल में करीब एक महीने तक चुनाव कराने का कारण बताए जबकि केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में यह एक चरण में और असम में तीन चरणों में कराया जा रहा है।

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