पेगासस जासूसी ऐप का इस्तेमाल बंगाल के प्रभावशालियों के नम्बरों पर भी, उठ रहे हैं सवाल

आखिर क्यों करना पड़ा केन्द्र सरकार को ऐसा, जनता पूछ रही है जवाब
केन्द्र सरकार जनता से उगाही किये गये टैक्स का क्यों कर रही है गलत इस्तेमाल
कोलकाता : पेगासस जासूसी ऐप का इस्तेमाल बंगाल के प्रभावशालियों पर भी क्या किया गया है, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल जिस एजेंसी ने इसका खुलासा किया है, उसमें दिल्ली के राजनेताओं का नाम बताया है। वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शहीद दिवस पर यह कह कर सबको हैरान कर दिया कि उनके नम्बरों पर भी इस ऐप के जरिये हमला किया गया है। यही कारण है कि उन्होंने जासूसी से बचने के लिए अपने मोबाइल के कैमरे पर ही प्लास्टर लगा दिया। यहीं नहीं उन्होंने ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध भी किया है ​कि वह पेगासस स्पाईवेयर का इस्तेमाल करके नेताओं, कार्यकर्ताओं, पत्रकारों आदि को निशाना बनाने वाले कथित जासूसी स्कैंडल का संज्ञान ले। वहीं कुछ जांच एजेसियों की मानें तो बंगाल के दर्जन भर प्रभावशाली लोगों का नम्बर भी उस लिस्ट में है। इनमें ममता बनर्जी के अलावा अभिषेक बनर्जी व तृणमूल के राजनीतिक सलाहकार प्रशांत किशोर सहित कारोबारियों, टॉप के नेता, प्रशासनिक अधिकारियों के भी नाम शामिल हैं।
इसलिए हो सकता है बंगाल के नेताओं के फोन की जासूसीऐसा कहा जा रहा है कि भाजपा के विजय रथ को अगर कहीं बुरी तरह से रोका जा सका है तो वह बंगाल में ही हुआ है। केन्द्र सरकार पर आरोप है कि इससे यहां की राजनीतिक गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इन नेताओं का जासूसी करवा रही है। अगला लोकसभा चुनाव 2024 में होने वाला है। ऐसे में बंगाल की आंधी अन्य राज्यों तक नहीं पहुंचे और इसका नुकसान भाजपा को नहीं उठाना पड़े, इस कारण ऐसा किया जा सकता है। विपक्षी दलों में ममता बनर्जी की अच्छी पैठ है। कई विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने विधानसभा चुनाव में उनकी सरकार की हैट्रिक पर उन्हें बधाइयां दी थी। ऐसा भी कहा जा रहा है कि अगले लोकसभा चुनाव में नरेनद्र मोदी के खिलाफ ममता बनर्जी ही प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी करें। इस कारण यह जासूसी की जा सकती है।
एक नजर पेगासस जासूसी ऐप पर
यह एक हैकिंग साफ्टवेयर है। इसराइल की सर्विलांस कंपनी एनएसओ ग्रुप ने यह सॉफ्टवेयर बनाया है। एनएसओ की ओर से कहा गया है कि इसका इस्तेमाल आतंकवादी व अन्य तरह के खतरे को पहले भांपने के लिए किया गया है ताकि जान माल के नुकसान से बचा जा सके। पेगासस को बनाने वाली कंपनी का कहना है कि वो किसी निजी कंपनी को यह सॉफ्टवेयर नहीं बेचती है, बल्कि इसे केवल सरकार और सरकारी एजेंसियों को ही इस्तेमाल के लिए देती है। इसका मतलब है कि अगर भारत में इसका इस्तेमाल हुआ है, तो कहीं न कहीं सरकार या सरकारी एजेंसियां इसमें शामिल हैं। पेगासस पहले मोबाइल में ​लिंक या कॉल के जरिये इस वायरस को भेजता था लेकिन अब यह डायरेक्टली भेज देता है। अब बिना ​क्लिक के भी जीरो क्लिक पर यह फोन में भेजा जा रहा है। न्यूज पोर्टल ‘द वायर’ की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन लोगों की जासूसी की गई है, उनमें 300 भारतीय लोगों के नाम शामिल हैं।
रविवार को आया पेगासस का जिन्न बाहर
पेरिस की एक संस्था फॉरबिडन स्टोरीज और एमनेस्टी इंटरनेशनल के पास करीब 50 हजार फोन नंबर्स की एक लिस्ट है। इसमें देश-दुनिया के प्रभावशाली लोग हैं। इन संस्थानों का दावा है कि ये वो नंबर है, जिन्हें पेगासस स्पाईवेयर के जरिए हैक किया गया है। इन दोनों संस्थानों ने इस लिस्ट को भारतीय मीडिया के अलावा दुनियाभर के 16 मीडिया संस्थानों के साथ शेयर किया है। हफ्तों के इन्वेस्टिगेशन के बाद खुलासा हुआ है कि अलग-अलग देशों की सरकारें पत्रकारों, विपक्षी नेताओं, बिजनेसमैन, सामाजिक कार्यकर्ताओं, वकीलों और वैज्ञानिकों समेत कई लोगों की जासूसी कर रही हैं। ये काफी महंगे होते हैं, जिसकी वजह से सिर्फ सरकारें ही खरीद पाती हैं।
सरकार व सर्विलांस कंपनी की ओर से क्या कहा गया
मंत्रालय ने कहा है कि भारत एक मजबूत लोकतंत्र है और अपने नागरिकों के निजता के अधिकार के लिए पूरी तरह समर्पित है। सरकार पर जो जासूसी के आरोप लग रहे हैं वो बेबुनियाद हैं। इसराइल की सर्विलांस कंपनी एनएसओ ग्रुप ने सॉफ्टवेयर पेगासस के बारे में कहा कि निजी कंपनियों से डील नहीं करते। इस कारण इसका पूरा शक केन्द्र सरकार पर ही जा रहा है। वहीं लोगों में भी नाराजगी देखी गयी है। पत्रकारों का एक समूह बेहद नाराज है। इनका कहना है कि फोन के जरिये ही कई ऐसी खबरें मिलती है, जो कि अगले दिन हेडलाइन बनती है। अब जब ऐसा होगा तो फोन पर बात करने से भी लोग डरेंगे। वहीं लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च करके इस तरीके की जासूसी से किसी का फायदा नहीं है, बल्कि टैक्स मनी का नुकसान किया जा रहा है।

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