ममता को फेस बनाकर पार्टी का विस्तार करना चाहती है तृणमूल

सांसदों को मिली जिम्मेदारी
मिशन 2024 की शुरुआत क्या होगी इतनी आसान !
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : बंगाल की सत्ता में जीत की हैट्रिक पूरी करने के बाद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का अगला मिशन 2024 में दिल्ली तक पहुंचना है। इसके लिए पार्टी की ओर से सांसदों को जिम्मेदारी भी दे दी गयी है ताकि वह देशभर में तृणमूल को सांगठनिक स्तर पर मजबूत कर सके। इसके लिए तृणमूल ममता बनर्जी को फेस बनाकर पार्टी का विस्तार करने में लग गयी है। पार्टी महासचिव पार्थ चटर्जी ने बताया कि अब पार्टी का फोकस सिर्फ बंगाल नहीं बल्कि दिल्ली है। इसलिए तृणमूल का संगठन अब धीरे-धीरे मजबूत करने की कवायद शुरु की जा रही है। दरअसल शनिवार की कोर कमेटी में सांगठनिक स्तर पर जो हेरफेर किया गया उसमें भी पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने की झलक साफ ​दिख रही है।
बंगाल में पकड़ मजबूत लेकिन राष्ट्र में नहीं
इन सभी के बावजूद दिल्ली की राह तृणमूल के लिए उतनी आसान नहीं होगी जितनी की मानी जा रही है। तृणमूल बंगाल में अपनी मजबूत स्थिति के साथ डंटी है लेकिन राष्ट्र स्तर पर तृणमूल का किसी भी राज्य में एक पार्षद तक नहीं है, सांसद तो बहुत दूर की बात है। इसके लिए तृणमूल के पास दो ही रास्ते है या तो राज्यस्तर पर विपक्ष पार्टी को समर्थन देकर अपने उम्मीदवार दे या खुद अपने बल पर जीत काबिज करें तो टेड़ी खीर से कम न है।
पवार, सोनिया, राहुल जैसे चेहरे के सामने ममता पर सहमति बनेगी ?
2024 की तैयारी भले अभी से शुरु कर दी गयी हो, इसके पहले की तस्वीर देखे तो विपक्ष की सबसे बड़ी मुश्किल नाम पर सहमति को लेकर आती रही है। 2019 में भी ममता बनर्जी की अगुवाई पर कई बार विपक्षी दलों ने मंच तो साझा किया था लेकिन बात जब मोदी के सामने विपक्ष का चेहरा देने की आयी तो उस वक्त सर्वमान्य करना बड़ी समस्या थी। कयास पहले भी हुए मगर सफलता उसमें नहीं मिली। इस बार भी पवार, सोनिया, राहुल जैसे चेहरों के बीच क्या विपक्ष ममता पर सहमति देगा यह बड़ा सवाल है क्योंकि सत्ता दिल्ली की है और हर कोई इसमें अपनी दावेदारी मजबूत करने में लगेगा ही।
बंगाल की इस जीत ने मजबूत ​किए इरादे
जानकारों की माने ने ममता बनर्जी ने जिस तरह विधानसभा चुनाव में अपनी जीत दर्ज की वह देशभर में विपक्ष के पार्टियों के लिए भी संजीवनी से कम नहीं है। हर किसी में इस जीत ने ऑक्सीजन का काम किया है। अगले साल उत्तर प्रदेश में चुनाव होने वाले है जहां सपा ने ममता को प्रचार के लिए न्योता दे दिया है। शिवसेना भी ममता की गाथा लगातार अपने सामना में बराबर प्रकाशित करता रहता है। देखने वाली बात है कि क्या इस बार 2024 में मोदी को राष्ट्रस्तर पर चुनौती देने के लिए दीदी की तैयारी कितनी काम आती है और उन्हें किसका समर्थन मिलता है।

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