भाजपा के 9 विधायकों और एक सांसद को तृणमूल नेता ने किया फोन

3 विधायक और एक सांसद हैं तृणमूल के संपर्क में, कभी भी हो सकते हैं शामिल
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पश्चिम बंगाल की लगातार रंग बदलती राजनीति में आये दिन नये राजनीतिक समीकरण देखने को मिल रहे हैं। विधानसभा चुनाव से पहले जहां तृणमूल समेत दूसरी पार्टियों से भाजपा में आने की होड़ मची हुई थी तो वहीं चुनावी नतीजों की घोषणा के बाद अब ऐसा लगता है कि भाजपा छोड़ने के लिए भी लोग तैयार बैठे हैं। इंतजार है तो बस समय और सत्ताधारी पार्टी से ग्रीन सिग्नल मिलने का। वहीं अब भाजपा से नेताओं को अपनी ओर करने की कोशिश में तृणमूल जुट गयी है। सूत्रों ने बताया कि हाल में तृणमूल में शामिल एक बड़े नेता ने भाजपा के 9 विधायकाें और एक सांसद को मुकुल राय ने फोन कर उनसे तृणमूल में शामिल होने के लिए कहा है। फिलहाल पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा के 3 विधायक और एक सांसद तृणमूल के संपर्क में हैं, ये कभी भी तृणमूल में शामिल हो सकते हैं।
बनगांव के 3 विधायक नहीं पहुंचे थे बैठक में
यहां उल्लेखनीय है कि गत शुक्रवार को बनगांव में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष के नेतृत्व में भाजपा की सांगठनिक बैठक थी। इस बैठक में 3 भाजपा विधायकों को पहुंचना था जो नहीं पहुंचे थे। भाजपा सांसद शांतनु ठाकुर बैठक में नहीं आये थे। उनके अलावा गाइघाटा के विधायक सुब्रत ठाकुर, बागदा के विधायक विश्वजीत दास और बनगांव उत्तर के विधायक अशोक कीर्तनिया भी बैठक में नहीं आये थे।
​विश्वजीत और सुनील सिंह के पार्टी से अलग सुर
विधायक विश्वजीत दास और भाजपा नेता सुनील सिंह के पार्टी से अलग सुर भी कई सवाल खड़े कर रही है। गत शुक्रवार को बनगांव में हुई पार्टी की बैठक में अनुपस्थिति को लेकर विश्वजीत ने कहा कि जिस व्यक्ति के घर पर वह बैठक बुलायी गयी थी, वह विभिन्न प्रकार के अवैध व्यवसाय से जुड़ा हुआ है। वहीं मुकुल राय को लेकर भी उनके सुर पार्टी से अलग ही नजर आये। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से उनके संपर्क अच्छे हैं। मुकुल के तृणमूल में शामिल होने के बाद ही विश्वजीत का इस तरह का बयान काफी बातों की ओर इशारा कर रहा है।
मौका देखकर लोग आये, अब मौका देखकर जा रहे हैं : दिलीप घोष
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने स्पष्ट तौर पर कहा कि कई नेता मौका देखकर भाजपा में आये थे। अब जबकि कार्यकर्ताओं के साथ खड़े होने का समय है तो ऐसे ही अवसरवादी नेता पार्टी छोड़ रहे हैं। हालांकि जो सच में लोगों की सेवा के लिए आये थे, वे भाजपा में हैं और आगे भी रहेंगे। केवल वही लोग पार्टी छोड़ेंगे जो अवसरवादी हैं। उन्होंने कहा कि अगर मुकुल के तृणमूल से भाजपा में आने पर तृणमूल को कोई नुकसान नहीं हुआ तो फिर उनके तृणमूल में जाने पर भाजपा को भला क्यों नुकसान होगा। भाजपा के पुराने कार्यकर्ता पार्टी के साथ हैं, भाजपा उनके ही दम पर चलती है। बहुत लोगों के लिए पार्टी छोड़ना आदत बन गयी है। भाजपा में रहने के लिए त्याग, तपस्या, बलिदान देना होगा। तूफान में बहुत आते और जाते हैं, इससे फर्क नहीं पड़ता। तूफान आने पर घास, पत्ते भी भगवान की मूर्ति के माथे पर आ जाते हैं, लेकिन तूफान थमने के बाद उन्हें हटा दिया जाता है। जो खुद को घास, पत्ता समझते हैं वे तृणमूल में जाएंगे।

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