बंगाल की सत्ता के लिए ‘विद्या की देवी सरस्वती’ पर तृणमूल की आस

कैंपेन में तब्दील हुई सरस्वती पूजा !
पहले बंगाल की संस्कृति का हिस्सा थी देवी की अराधना
इस बार पूजा पर सिर चढ़ कर बोल रही सियासत

सोनू दूबे ओझा
कोलकाता : राज्य में चुनावी बयार बह रही है और इस बार सीधा मुकाबला तृणमूल और भाजपा के बीच है। भाजपा हमेशा से ही हिन्दुत्व की राजनीति पर जोर देती आयी है जबकि तृणमूल बंगाल में धर्म और संस्कृति का महत्व बताने में लगी रहती है। लाजमी है धर्म और हिन्दुत्व का मुद्दा इस बार के चुनाव में अहम होने जा रहा है। इस बार के चुनावी दंगल में भाजपा की रणनीति ममता बनर्जी और उनकी पार्टी को एंटी हिन्दू रिफ्लेक्ट कराने की है, ​जिसका ताजा उदाहरण जय श्री राम का मुद्दा है जिसमें कहीं न कहीं तृणमूल बैकफुट पर आ गयी है। भाजपा की यह रणनीति शायद ममता भी समझ गयी हैं और हिन्दू सेंटीमेंट तक पहुंचने के लिए उन्होंने विद्या की देवी मां सरस्वती को जरिया बना लिया। दो साल पहले की बात करें तो सरस्वती पूजा को लेकर आरोप लगाये गये थे कि ममता बनर्जी ने पूजा पर रोक लगा दी है। अब इस बार ममता बनर्जी के निर्देश पर ही तृणमूल ने जोर-शोर से सरस्वती पूजा मनायी है। हुगली जिले के अलावा तृणमूल के तमाम बड़े नेताओं ने भी धूमधाम से सरस्वती पूजा का आयो​जन किया जिसे विपक्ष द्वारा चुनावी स्टंट भी करार दिया जा रहा है।
मां की शरण में चुनावी प्रचार भी हुआ
सियासत के लिए बंगाल में मां सरस्वती का जाप जपा गया जिसका दोहरा फायदा तृणमूल ने उठाया है। मां सरस्वती की शरण में तृणमूल की ओर से यह संदेश देने की कोशिश की गयी है कि तृणमूल किसी खास धर्म या वर्ण पर फोकस नहीं करती बल्कि हर धर्म के साथ तृणमूल खड़ी है। जानकारों की माने तो तृणमूल के लिए अल्पसंख्यक मतदाताओं के साथ ही हिन्दीभाषी वोटरों को भी अपनी ओर करने की बड़ी चुनौती है।
सरस्वती पूजा पर सियासत सिर चढ़ कर बोल रही है
सरस्वती पूजा पर सियासत भी शुरू हो चुकी है। तृणमूल ने इसे एक तरह से कैंपेन में तब्दील कर दिया है। इसके तहत हुगली जिले को फोकस किया गया है जहां के 18 विधानसभा क्षेत्रों में 125 जगहों पर सरस्वती पूजा मनायी गयी। यहां सिर्फ मां सरस्वती का पंडाल ही नहीं बनाया गया, बल्कि मां की प्रतिमा के इर्द-गिर्द समस्त सरकारी योजनाओं की व्याख्या की गयी है। इन योजनाओं में कन्याश्री, स्वास्थ्य साथी समेत बाकी महत्वपूर्ण और लोकप्रिय योजनाओं को जगह दी गयी है।
जिले में पीएम सफर को देखते हुए ही यहां मनी सरस्वती पूजा
22 फरवरी को हुगली जिले के डनलप मैदान में पीएम मोदी चुनावी सभा करने आ रहे हैं। जानकारों की माने तो पीएम के दौरे को देखते हुए ही तृणमूल हुगली ​जिले में मांं सरस्वती का जाप जपने में व्यस्त हुई। दरअसल हुगली जिले की 18 सीटों पर तृणमूल का दबदबा है लेकिन परिवर्तन की बयार का असर इस जिले में खासा पड़ा है जिसके कारण पार्टी कोई चूक नहीं करना चाहती।

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