भाटपाड़ा पालिका के सामने ही लगा है कूड़े का अंबार

भाटपाड़ा : भाटपाड़ा पालिका बोर्ड पर दखल को लेकर कुछ महीनों पहले ही तृणमूल व भाजपा में काफी रस्साकशी रही और आखिरकार गेंद तृणमूल पार्षदों के पाले में गिरी। बोर्ड के गठन के साथ ही चेयरमैन चुने गये अरुण बनर्जी ने पालिकावासियों से वादा किया कि यहां के निवासियों को मूलभूत सुविधाएं दिलवाना ही उनकी पहली प्राथमिकता होगी। बोर्ड की मियाद खत्म हुई मगर तृणमूल सरकार ने कई पालिकाओं की तरह ही इस पालिका के चेयरमैन को भी पालिका प्रशासक बनाया और प्रशासक मंडली की टीम में भी पालिका के कई वरिष्ठ तृणमूल पार्षदों को रखा।

इन्हें भार दिया गया कि ये पालिका निवासियों को सभी जरूरी परिसेवाएं उपलब्ध करवायेंगे मगर आज की स्थितियों पर गौर करें तो भाटपाड़ा प्रशासक मंडली अपने इस काम में फेल होती दिख रही है। पालिका क्षेत्र में घुसने साथ ही चारों ओर कूंडे का अंबार देखने को मिलता है। चाहे बस्ती की संकरी गलियां हों या पालिका भवन के सामने मुख्य सड़क मोड़ चारों ओर नजर के चुभने वाला दृश्य ही दिखता है। विडंबना यह है कि इस संवेदनशील इलाके में रहनेवाले नागरिकों ने अपने अधिकारों को लेकर भी चुप्पी साध ली है। उनका कहना है कि हम क्या करें, हमें तो ऐसे ही जीना पड़ता है।

क्या कहना है स्थानीय निवासियों व दुकानदारों का

कांकीनाड़ा स्टेशन के निकट कपड़े व खानेपीने की दुकान चलाने वालों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि साफ-सफाई तो की जाती है मगर जिस स्तर पर यह होना चाहिए वैसा नहीं है। इस काम में काफी ढिलाई रहती है। दुकान के सामने कूंड़ों का ढेर काफी बुरा लगता है। वहीं रिलायंस जूट मिल के सामने सब्जी-भाजी, चाय की दुकान लगानेवालों ने भी कहा, क्या करें मैडम अब हम खुद ही साफ-सफाई कर किसी तरह से काम चला रहे हैं। कुछ स्थानीय लोगों ने कहा कि यहां सिर्फ नेताओं व तथाकथित जनप्रतिनिधियों को अपनी राजनीति से मतलब है​, किसी को हमारी समस्याओं से कुछ लेना-देना नहीं है। यहां रहना नरक में रहने के समान है।

क्या कहना पालिका के जनप्रतिनिधियों का

भाटपाड़ा पालिका प्रशासक मंडली के हेल्थ कोऑर्डिनेटर मनोज गुहा ने कहा कि कूंड़ा-कर्कट की समस्या तो है क्योंकि इस काम में इस्तेमाल होने वाले कई ट्रैक्टर खराब हैं जिससे नियमित तौर पर साफ-सफाई का काम नहीं हो पा रहा है। पालिका की ओर से जल्द ही 5 नये ट्रैक्टरों को इस काम में लगाकर परिसेवा को नियमित कर दिया जायेगा।

वहीं उन्होंने यह भी कहा कि पालिकावासियों को भी साफ-सफाई के प्रति थोड़ी जागरूकता दिखानी होगी। वे अगर कूड़ा-कर्कट कूंड़ेदान में फेंके, ना कि सड़कों पर तो यह काम सफाई कर्मियों के​ लिए भी काफी सहज हो जायेगा। वहीं पूर्व पालिका प्रशासक व भाजपा पूर्व पार्षद सौरभ सिंह ने आरोप लगाया कि पालिका के कुल 35 वार्डों में यह समस्या बनी हुई है क्योंकि महीनों से नालों व कूंड़ों के ढेर को हटाया नहीं गया। इस काम के लिए आये फंड को तो तृणमूल के कॉन्ट्रैक्टर हजम कर गये हैं तो आ​खिर आम जनता के लिए काम कैसे होगा। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मियों को ठीक से वेतन भी नहीं मिल रहा फलस्वरूप वे भी नियमित तौर पर अपना काम नहीं कर रहे हैं।

 

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