नए माझेरहाट ब्रिज को लेकर ट्रैफिक एडवाइजरी जारी, बस मालिकों को मिली राहत

कोलकाता : नए माझेरहाट ब्रिज के उद्घाटन के बाद से उस पर से वाहनों का यातायात चालू हो गया है। कोलकाता ट्रैफिक पुलिस की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार डीएच रोड होकर उत्तर की तरफ आने वाले वाहन नए माझेरहाट ब्रिज से गुजरेंगे। वहीं डीएच रोड होकर उत्तर की तरफ आने वाले सभी मीडियम व हेवी गुड्स ह्वीकल तारातल्ला क्रॉसिंग से तारातल्ला रोड, हाईड रोड, सीजीआर रोड, जीआर रोड, क्लाईड रोड, सेंट जर्जेस रोड, हेस्टिंग्स क्रॉसिंग होते हुए द्वितीय हुगली सेतु की तरफ जाएंगे।

डीएच रोड या फिर अलीपुर रोड व बर्दवान रोड होकर दक्षिण की तरफ जाने वाले सभी वाहन माझेरहाट ब्रिज का उपयोग कर सकेंगे। अलीपुर रोड व बर्दवान रोड पर 24 घंटे उत्तर से दक्षिण की तरफ वाहन जाएंगे। बेली ब्रिज के जरिए सभी वाहन दक्षिण से उत्तर की तरफ 24 घंटे जा सकेंगे। साहापुर रोड व एनआर एवेन्यू पर 24 घंटे दोनों तरफ के वाहन चलेंगे।

हावड़ा रूट की बस मालिकों को मिली राहत
ब्रिज के उद्घाटन से आम लोगों को अपने गतंव्य तक जाने में सहूलियत होगी, उतनी ही बस मालिकों को भी सहूलियत होगी। अब बस मालिकों को इंतजार है कि जल्द ब्रिज से गुजरने की अनुमति दी जाये। करीब ढाई साल पहले माझेरहाट ब्रिज हादसे के कारण दो टुकड़ों में बंट गया था।

इसके बाद से हावड़ा समेत 1500 बसों के रूटों में बदलाव कर दिया गया था। इनमें हावड़ा मैदान-पर्णश्री, हावड़ा मैदान- सखेर बाजार, हावड़ा मैदान-डायमंड पार्क की मिनी बस एवं हावड़ा स्टेशन से हावड़ा-आमतल्ला, डी रूट हावड़ा- पैलान, हावड़ा- शकुंतला पार्क, हावड़ा- बेहला, हावड़ा-डायमंड हार्बर की सरकारी बसें यहां से गुजरती थी। परंतु रूट बदलने से किराया तो वहीं रहा लेकिन रूट लंबा होने से बसों का खर्च व समय बढ़ गया। साथ ही यात्रियों की संख्या में भी कमी हुई। इस बारे में प्रशासन की ओर से कहा गया है कि जल्द ही बसों की परिसेवाओं को शुरू किया जा सकेगा।

पूर्व रेलवे ने कहा, हमारी ओर से कोई देर नहीं हुई
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा माझेरहाट स्थित जय हिंद ब्रिज का उद्घाटन किए जाने के बाद राज्य सरकार ने आरोप लगाया कि माझेरहाट ब्रिज के लिए रेलवे की ओर से कोई मदद नहीं की गयी और राज्य सरकार ने ही रुपये दिये। इन आरोपों का खंडन करते हुए पूर्व रेलवे की ओर से मुख्य जनसम्पर्क ​अधिकारी कमल देवदास ने कहा कि माझेरहाट ब्रिज को दोबारा से खड़ा करने के लिए रेलवे ने जो रुपये लिए है वह कोडल प्रोविजन के तहत लिए गये थे। यह एक उचित शुल्क लिया गया। इसकी सरकार द्वारा स्क्रूटनी की गयी थी। वहीं रेलवे द्वारा 9 महीने देरी करने पर भी पूरे की ओर से कहा गया कि उनकी ओर से कोई देरी नहीं हुई थी। बल्कि पीडब्ल्यूडी की ओर से अनुमति मिलने में देरी हुई थी।

 

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