आज 8 सीटों पर लड़ रहे हैं ‘भाईजान’ के उम्मीदवार

तृणमूल का समीकरण बिगाड़ सकते हैं अब्बास सिद्दीकी !
दक्षिण 24 परगना की 4, हावड़ा की 1 और हुगली में 3 पर किस्मत आजमा रहा है आईएसएफ
राज्यभर में 28 सीटों पर दिया है उम्मीदवार
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : बंगाल की सत्ता के महासंग्राम का आज तीसरा चरण है। इस चरण में तीन जिलों की 31 सीटों पर 205 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होना है। इन उम्मीदवारों की किस्मत के साथ ही बंगाल में किसकी सत्ता बननी है लगभग इसी चरण में यह तय होना है क्योंकि इस चरण में आईएसएफ यानी इंडियन सेक्युलर फ्रंट यानी पीरजादा अब्बास सिद्दीकी के 8 उम्मीदवार भी चुनावी दंगल में उतरे हैं। कहने को तो यह महज 8 सीटे हैं मगर सत्ता की तौल किस ओर भारी करनी है उसमें यह सीटें महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली हैं। खासकर तृणमूल का समीकरण बनेगा या बिगड़ेगा यह बहुत कुछ इन 8 सीटों की जीत-हार पर टिका है जिसका सीधा असर भाजपा की बढ़त या सीटों के कमने पर भी पड़ेगा।
इन जगहों पर हैं आईएसएफ के उम्मीदवार
दक्षिण 24 परगना के कुल्पी, मंदिरबाजार, कैनिंग और मोगराहाट
हावड़ा का जगतबल्लभपुर
हुगली का जंगीपाड़ा, हरिपाल और खानाकुल
8 सीट घुमा सकते हैं सत्ता की राह
राज्य में करीब 30 प्रतिशत वोट शेयर के साथ अल्पसंख्यक वोटर ‘किंगमेकर’ की भूमिका में हैं। यहां की 294 सीटों में से करीब 90 सीटें ऐसी ही हैं जिन पर अल्पसंख्यक वोट बैंक का सीधा प्रभाव है। सियासी जानकारों की माने तो भाईजान का यह फ्रंट अगर चुनाव में शिद्दत से लड़ता है तो ममता के मजबूत वोट बैंक में सेंध लगनी पक्की होगी और ऐसा हुआ तो ममता के जीत की हैट्रिक पर भी इसका पूरा असर पड़ेगा और भाजपा के लिए सत्ता की राह आसान हो सकती है। इन 8 सीटों की बात करें तो सभी जगह 20-30 प्रतिशत अल्पसंख्यक वोटर्स हैं जो जीत या हार में निर्णायक भूमिका रखते हैं।
पूरे राज्य में 28 सीट पर लड़ रहे हैं अब्बास
अब्बास ने खुद को इस बार के चुनाव का किंगमेकर कहा है। इसी लहजे से उन्होंने अपनी तैयारी भी की है जिसमें लेफ्ट और कांग्रेस का उन्हें समर्थन मिला है। पूरे राज्य में अब्बास 28 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं जिसमें सबसे ज्यादा उम्मीदवार उत्तर 24 परगना में हैं। जानकारों की माने तो यह जिला एक समय में तृणमूल की पकड़ में था मगर अब वहां भाजपा की लहर काफी तेज मानी जा रही है।
तृणमूल का वोट कटा तो भाजपा को होगा सीधा फायदा
अल्पसंख्यक वोटरों का साथ हमेशा से ही ममता बनर्जी के साथ रहा है। इसमें फुरफुरा शरीफ की भी भूमिका रही है मगर इधर इस चुनाव में पीरजादा अब्बास सिद्दीकी के साथ तृणमूल के संबंध इतने खराब हो चुके हैं कि साथ तो छूटा ही दोनों एक-दूसरे के खिलाफ न जाने क्या-क्या टिप्पणियां भी कर रहे हैं। सोमवार को ममता बनर्जी ने अब्बास का नाम लिए बगैर कहा कि फुरफुरा शरीफ में भी एक गद्दार निकला है जो वोट बांटने का काम कर रहा है।

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