पार्थ के झटके से उबरने के लिए पार्टी जाएगी जनता के दरबार में

सोनू ओझा
दबी जुबान से पार्टी के नेता मान रहे हैं ये बड़ा झटका है, इससे पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ है
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस में पार्थ चटर्जी को ममता बनर्जी के बाद सबसे महत्वपूर्ण ओहदा मिलता आया है। पार्टी के नाराज नेताओं को मनाना हो या पार्टी के नियमों के बारे में नेताओं को समझाना हो, पार्थ को हर वह जिम्मेदारी दी गयी थी जिसकी वजह से उन्हें नंबर टू तक कहते थे। आज स्थिति बदल सी गयी है। पार्थ दा आज पार्टी में नंबर टू नहीं रहे। उन पर शिक्षक नियुक्ति में घोटाले का आरोप है। मामले में वह गिरफ्तार तक हो गये हैं जिसके बाद पार्टी को एक बड़ा झटका लगा है। हालांकि इस बारे में खुलकर कोई कुछ कहना नहीं चाहता लेकिन दबी जुबान में हर छोटा-बड़ा नेता मान रहे हैं कि ये पार्टी के लिए ऐसा झटका है जिससे बड़ा नुकसान हुआ है। इस डैमेज को कंट्रोल करने के लिए अब पार्टी के पास सिर्फ जनता का सहारा है जिसके भरोसे पर ही तृणमूल की नांव पार होगी।
भाजपा असंवैधानिक पावर इस्तेमाल कर बंगाल में आना चाहती है : जेपी
तृणमूल के वाइस प्रेसिडेंट जय प्रकाश मजुमदार ने सन्मार्ग से हुई बातचीत में कहा कि यह पूरा का पूरा मामला राजनीतिक षड्यंत्र के तहत रचा गया है। भाजपा बंगाल में हार के बाद साम-दाम-दंड-भेद की राजनीति कर रही है। यहां वह असंवैधानिक पावर का इस्तेमाल कर शासन करना चाह रही है। इस बात का अंदेशा तृणमूल को अच्छी तरह है कि पार्थ चट​र्जी की गिरफ्तारी के बाद भाजपा आने वाले समय में कुछ भी कर सकती है, क्योंकि भाजपा वह पार्टी है जो जीती नहीं तो छीन कर लेना जानती है।
पार्टी के लिए जनता का सपोर्ट सबसे बड़ा
तृणमूल आज उस स्थिति में आ गयी है जहां पार्टी के लिए जनता का सपोर्ट सबसे बड़ा है। पार्टी के नेता दबी जुबान से यह मान भी रहे हैं। खुद जय प्रकाश मजुमदार ने कहा कि भाजपा एजेंसियों का इस्तेमाल कर प्रतिहिंसा की राजनीति जितना चाहे कर ले, आखिरी हथियार जनता का समर्थन होता है जो बंगाल में ममता बनर्जी के साथ है। पार्टी सूत्रों की माने तो अब नेता इसी जनता के बीच जाकर अपनी जगह मजबूत करेंगे।
अर्पिता को तृणमूल से जोड़ना ही षड्यंत्र का हिस्सा है
इस पूरी घटना में अर्पिता मुखर्जी अहम किरदार के रूप में उभरी है। भाजपा अर्पिता का नाम पार्थ के साथ लिंकअप करने के साथ ही तृणमूल के साथ भी जोड़ रही है, इस पर तृणमूल लगातार पल्ला झाड़ती आयी है। जेपी मजुमदार की मानें तो जिस तरह पूरे मामले में अर्पिता का नाम तृणमूल से बेवजह जोड़ा जा रहा है वह साबित करता है कि इसके पीछे ‘राज’ है। मामला है तो जांच हो, सच सामने आये यही पार्टी का सीधा स्टैंड है।
चुनाव से पहले हमेशा घिरी है तृणमूल
* 2014 के आम चुनाव से पहले 2013 में सारधा चिटफंड मामले में तृणमूल को घेरा गया था। उस वक्त वाममोर्चा और कांग्रेस ने इसे चुनावी मुद्दा बनाया था मगर फैसला जनता ने तृणमूल के हक में दिया।
* 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने दोबारा सारधा नारदा स्कैम का आरोप लगाते हुए तृणमूल को हराने के लिए ताकत झोंक दी लेकिन जीत तृणमूल की हुई क्योंकि जनता का समर्थन ममता को मिला।
* 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा एक बार फिर वर्चस्व सा​बित करने के लिए तृणमूल को घेर रही है। अब देखना है कि इस बार जनता ममता बनर्जी पर भरोसा करती है या यह राजनीति बाजी पलट देगी।

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