…तो क्या आज से बस सेवा भी…

  • बस में बिना मॉस्क वालों को नहीं मिलेगी एंट्री
  • बस परिसेवा में कोविड प्रोटोकॉल पर विशेष नजर

संदीप त्रिपाठी
कोलकाताः बस में प्रवेश करते ही लोगों को मॉस्क पहनना अनिवार्य किया गया है। ऐसे में यदि आप बस से यात्रा करते हैं तो मॉस्क के साथ ही पहुंचे। दरअसल बस संगठनों ने साफ तौर पर स्पष्ट किया है कि बिना मॉस्क वाले यात्रियों को बसों में नो एंट्री रहेगी। दूसरी तरफ हाल के दिनों में पुलिस व प्रशासन की ओर से भी मॉस्क को लेकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। भीड़ में मॉस्क पहनने के लिए जगह-जगह माइकिंग भी की जा रही है। सरकार की ओर से सोमवार को 3 जनवरी से कड़ी पाबंदी जारी की गई है। इसमें वैसे तो बसों को लेकर कोई सिद्धांत नहीं लिया गया है। हालांकि वाहनों के चलने को लेकर एक समय तय किया गया है। ऐसे में बस मालिक भी इसे लेकर काफी सक्रिय हो उठे हैं। ऑल बंगाल बस-मिनी बस समन्वय कमेटी के महासचिव, राहुल चटर्जी ने कहा कि बसों की परिसेवा पहले की तरह ही जारी रहेगी। बसों को लेकर कोई दिशा-निर्देश अलग से नहीं है। हमें मूल रूप से समय का ध्यान रखना होगा। दूसरी तरफ सरकारी बसों की परिसेवा को लेकर भी अलग से दिशा-निर्देश नहीं है। ऐसे में सरकारी बसें भी पहले की तरह ही जारी रहेंगी।
यात्रियों की हो सकती है कमी
बसों में याात्रियों की संख्या में कमी आ सकती है। ज्वाइंट काउंसिल ऑफ बस सिंडिकेट के महासचिव तपन बनर्जी ने कहा कि कोविड के बढ़ते मामलों को देखते हुए हम भी चिंतित हैं। लोकल ट्रेन का समय निर्धारित किया गया है। ऐसे में निश्चित तौर पर यात्रियों की संख्या में कमी आएगी। हमने बस कंडक्टरों को साफ कहा है कि मॉस्क लगाएं। साथ ही यात्रियों को बिना मॉस्क के न चढ़ने दें। सिटी सबर्बन बस सर्विसेज के महासचिव टीटू साहा ने कहा कि देखना होगा कि यात्री क्षमता किस प्रकार से मिल रही है। एक या दो दिन के बाद ही आगे का निर्णय हम ले सकेंगे। दरअसल स्कूल, कॉलेज व विश्वविद्यालय बंद हो जा रहा है। साथ ही मॉल से लेकर अन्य जगहों पर पाबंदी रहेगी। ऐसे में हमें यात्री कम ही मिलेंगे। अब देखने वाली बात यह होगी कि किस प्रकार से हम बसों को चला सकेंगे।
कैब व टैक्सी में भी यात्री हो सकते हैं कम
कैब व टैक्सी यूनियन से जुड़े नवल किशोर श्रीवास्तव ने कहा कि कैब व टैक्सी में भी यात्री कम हो सकते हैं। ऐसे में एक बार ‌फिर से परेशानी बढ़ सकती है। ड्राइवरों को कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने की अपील की गई है।
एक नजर इस पर भी
निजी बसें (महानगर)- करीब 6000
बस सिंडिकेट के अंतर्गत- करीब 3500
राज्य में निजी बसें- करीब 27 हजार
सरकारी बसेंः करीब 1700

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