बड़ी खबर : राज्य में ‘हब एण्ड स्पोक’ मॉडल रोकेगी थर्ड वेव

स्वास्थ्य विभाग ने की विशेष तैयारी
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाताः राज्य में कोरोना वायरस महामारी के सेकेंड वेव का असर अब भी जारी है। थर्ड वेव की आहट भी नजर आ रही है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग इस बार थर्ड वेव की संभावना के मद्देनजर बचाव के कई उपाय अपना रहा है। यही वजह है कि विशेषकर बच्चों के इलाज के लिए हब एण्ड स्पोक मॉडल तैयार किया जा रहा है। इसके तहत राज्य के सभी अस्पतालों को आवश्यक तैयारी करने के लिए कहा गया है। बुनियादी सुविधाओं को भी दुरुस्त रखने की हिदायत दी गई है।
नेशनल मेडिकल, बीसी राय व नॉर्थ बंगाल शिशु इलाज का होगा बड़ा केंद्र
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानें तो बीसी रॉय चिल्ड्रन हॉस्पिटल, नेशनल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल और नॉर्थ बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल को कोविड के दौरान बच्चों के इलाज में उत्कृष्टता के केंद्र के तौर पर तैयार किया जा रहा है। तीन उत्कृष्टता केंद्रों की देखरेख में कोविड बच्चों के लिए चिकित्सा व्यवस्था का प्रबंधन किया जाएगा। इन तीनों अस्पतालों को आधिकारिक शब्दों में ‘हब’ कहा जाता है। दूसरी ओर, विभिन्न जिलों में 89 बाल चिकित्सा गहन देखभाल इकाइयां (पीकू) और 72 नवजात गहन देखभाल इकाइयां (नीकू) हैं। दिशानिर्देश निर्दिष्ट करते हैं कि हब के तहत तीन उत्कृष्टता केंद्रों और स्पॉक के तहत जिला अस्पतालों में किस तरह की चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध होंगी।
स्वास्थ्य विभाग की विशेषज्ञ समिति की सलाह के बाद कई बुनियादी ढांचे के फैसले पहले ही लिए जा चुके हैं। स्वास्थ्य भवन की ओर से तीसरी लहर के खिलाफ जारी दिशा-निर्देश में कहा गया है कि 90 दिन से लेकर 12 साल तक की उम्र के हल्के और मध्यम लक्षणों वाले कोरोना मरीजों को महिला वार्ड में उनकी मां के साथ रखा जाएगा। इसके लिए 10 हजार बेड का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। वहीं 1 से 90 दिन के नवजात बच्चों के इलाज के लिए एसएनसीयू में 20 फीसदी बेड को कोरोना बेड के रूप में चिह्नित किया जाएगा। शुरुआत में इसके लिए 350 एसएनसीयू बेड हैं। इसके अलावा, तीसरी लहर में 1300 बाल चिकित्सा गहन देखभाल इकाइयां या पीकू बेड हैं। टेली-परामर्श प्रणाली भी रखी जा रही है। स्वास्थ्य भवन पहले से ही बच्चों को इस लहर से बचाने के लिए बुनियादी ढांचे, प्रशिक्षण और जागरूकता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
उधर, राज्य के मुख्य सचिव पहले ही निर्देश दे चुके हैं कि एक भी बच्चा संक्रमण का शिकार न हो, उसके लिए सारे इंतजाम करने होंगे। राज्य मातृ एवं शिशु पोषण पर अधिक ध्यान देना चाहता है। माताओं और बच्चों के लिए विभिन्न सरकारी परियोजनाएं हैं। सूत्रों ने बताया कि सभी को यह सुनिश्चित करने के लिए विशेष ध्यान देने को कहा गया है। हालांकि बच्चों को अभी तक कोरोना वायरस के खिलाफ टीका नहीं लगाया गया है, उन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि उन्हें अन्य टीके दिए जाएं। राज्य के मुख्य सचिव हरिकृष्ण द्विवेदी ने स्वास्थ्य विभाग, पंचायत विभाग, शिक्षा विभाग, शहरी विकास विभाग, महिला एवं बाल कल्याण विभाग के सचिवों के साथ भी बैठक की थी।
राज्य की तैयारी इस प्रकार
-शिशुओं के लिए 10 हजार बेड का इंफ्रास्ट्रक्चर
-विभिन्न जिलों में 89 पीकू यूनिट
-विभिन्न जिलों में 72 नीकू यूनिट
-1300 पीकू बेड
-टेली मेडिसिन परिसेवा भी तत्पर

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