कोविड से अनाथ हुए बच्चों की शिक्षा में कोई बाधा नहीं पड़े

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस राव के डिविजन बेंच ने दिया आदेश
सन्मार्ग संवाददाता
नयी दिल्ली/कोलकाता : निजी स्कूलों में पढ़ने वाले उन बच्चों की शिक्षा में कम से इस शैक्षिक सत्र में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए जो कोविड के कारण अनाथ हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। इन अनाथ बच्चों के बाबत दायर एक सुओमोटो मामले की वृहस्पतिवार को सुनवायी करते हुए जस्टिस एन नागेश्वर राव और जस्टिस अनिरुद्ध बोस ने यह आदेश दिया।
एडवोकेट अमृता पांडे ने यह जानकारी देते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट के इस डिविजन बेंच ने इस बाबत कई सुझाव दिया है। मसलन इस तरह के बच्चों के मामले में स्कूलों से कहा जा सकता है कि वे उनकी फीस में छूट दे दें। या फिर राज्य सरकार इस तरह के बच्चों की फीस का आधा खर्च उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस तरह के बच्चों की पढ़ाई में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए। कहा गया है कि राज्य सरकार चाइल्ड वेलफेयर कमेटी और जिला शिक्षा अधिकारियों के मार्फत उन निजी स्कूलों से बात करेगी जहां इस तरह के बच्चे पढ़ रहे हैं। यहां गौरतलब है कि डिविजन बेंच पहले इसे आंध्र प्रदेश के लिए लागू कर रहा था, लेकिन फिर इसे सभी राज्यों के लिए लागू कर दिया। डिविजन बेंच ने कहा है कि उन बच्चों को चिन्हित करना पड़ेगा जिनके माता पिता या फिर दोनों में से किसी एक की कोविड के कारण मौत हो गई हो। इसके लिए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के बाल स्वराज पोर्टल पर इस तरह के बच्चों के नाम को अपलोड करना पड़ेगा। इसमें विलंब उनके हित के विपरीत होगा। स्कूल फीस मामले से जुड़ी एडवोकेट प्रियंका अग्रवाल ने बताया कि हाई कोर्ट में कंटेंप्ट पिटिशन की सुनवायी होनी है और सुप्रीम कोर्ट में इस बाबत फाइनल सुनवायी होनी है। यहां भी मुद्दा स्कूल फीस में छूट दी जाने का है।

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