स्कूल भी है, टीचर भी हैं, बच्चे नदारद, फिर कैसी पढ़ाई

हाई कोर्ट का सवाल : सिंगल टीचर वाले स्कूल में बच्चें क्यों जाएं
कोलकाता : यूं तो यह मामला एक टीचर के तबादले का है पर हाई कोर्ट में जब इसकी सुनवायी हुई तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूली शिक्षा की बदहाली का पिटारा ही खुल गया। हाई कोर्ट के जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय का सवाल था कि आखिर सिंगल टीचर वाले स्कूलों में बच्चे क्यों जाएं। उन्होंने शिक्षा विभाग और विशेष कर के स्कूली शिक्षा के कमिश्नर और स्कूल सर्विस कमिशन को इस मामले में उपयुक्त कदम उठाने का आदेश दिया है।
यह मामला उत्तर 24 परगना के हिंगलगंज के माधवकाटी जूनियर हाई स्कूल से जुड़ा है। एडवोकेट अंजन भट्टाचार्या ने बताया कि इस स्कूल की टीचर सुश्मिता मित्रा ने तबादले के लिए आवेदन किया था। जब स्कूल से एनओसी नहीं मिली तो उन्होंने हाई कोर्ट में रिट दायर कर दी। जब मामले की सुनवायी शुरू हुई तो यह खुलासा हुआ कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूली शिक्षा के नाम पर रस्मअदायगी भर की जा रही है। जूनियर हाई स्कूल के रूप में इसकी स्थापना 2009 में हुई थी। यहां कक्षा पांच, छह, सात और आठ की पढ़ाई की जाती है। सुश्मिता साहा इसी स्कूल की सिंगल टीचर हैं। इस स्कूल में 2020 में दस, 2021 में आठ बच्चे थे और 2022 में यह संख्या शून्य पर आ गई। इस स्कूल के सचिव, जो शिक्षा विभाग के सब इंस्पेक्टर भी हैं, से जस्टिस गंगोपाध्याय ने पूछा कि जब बच्चे ही नहीं हैं तो फिर वहां टीचर के रखे जाने का क्या औचित्य है। इसके अलावा एक टीचर भला चार क्लासों के बच्चों को कैसे पढ़ा सकती हैं। इसके जवाब में सचिव का सुझाव था कि पास के एक हाई स्कूल में इसका विलय कर‌ दिया जाए। इसके लिए बच्चों को साढ़े तीन किलोमीटर का सफर करना पड़ेगा। इस पर जस्टिस गंगोपाध्याय ने सवाल किया कि जिस मकसद से यह स्कूल खोला गया था उसका क्या होगा। सच तो यह है कि इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है क्योंकि बंगाल के ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के बेशुमार स्कूल हैं जहां सिंगल टीचर ही हैं। जस्टिस गंगोपाध्याय ने सवाल किया कि इस तरह तो राइट टू एडुकेशन एक्ट के तहत बच्चों को शिक्षा देने का मकसद ही अधूरा रह जाएगा। माधवकाटी जूनियर हाई स्कूल तो शिक्षा के नाम पर रस्मअदायगी की एक मिसाल भर है। इस तरह के बहुत सारे माधवकाटी मिल जाएंगे। जस्टिस गंगोपाध्याय ने तो इस स्कूल के बाबत आदेश दिया है, पर इस तरह के बाकी स्कूलों का क्या होगा। सुश्मिता मित्रा का तबादला तो हो गया पर इस सवाल का जवाब अधूरा ही रह गया।

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