कई बड़ी चुनौतियां हैं भाजपा नेतृत्व के सामने

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गये हैं और 77 सीटें पाकर भाजपा ने मुख्य विपक्षी पार्टी का दर्जा हासिल कर लिया है। शुभेंदु अधिकारी को विधानसभा में विपक्ष का नेता चुना गया है। हालांकि हार से उबरने के बाद अब भाजपा नेतृत्व के सामने कई बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं। सबसे बड़ी चुनौती तो पार्टी के जीते हुए विधायकों को अपने खेमे में करके रखने की है। इसके अलावा कार्यकर्ताओं के साथ खड़े रहने से लेकर अन्य कई चुनौतियां भी इस वक्त भाजपा के सामने है।
अपने विधायकों को अपने पास रखना
भाजपा के सामने इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती अपने विधायकों को अपने पास रखना है। इस बारे में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष कह चुके हैं कि उनकी पार्टी के विधायकों से तृणमूल ने संपर्क करना शुरू कर दिया है। हाल में मुकुल राय को लेकर भी अटकलों का दौर चला था, लेकिन ट्वीट कर मुकुल राय ने इस पर विराम लगाते हुए कहा था कि वह भाजपा के सैनिक के तौर पर काम करेंगे। इसके अलावा हाल में पश्चिम बंगाल के दो दिवसीय दौरे पर आये भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी पार्टी नेताओं के साथ बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की थी। ऐसे में ये बात स्पष्ट है कि पार्टी के सभी 77 विधायकों को अपने खेमे में रखना इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती है।
कार्यकर्ताओं के साथ रहना, उत्साह बढ़ाना
कार्यकर्ताओं के साथ खड़े रहना और उनका उत्साह बढ़ाना भी भाजपा नेतृत्व के सामने इस वक्त बड़ी चुनौती है। राज्य में जगह – जगह से हिंसा की घटनाएं हुई हैं। दावे के अनुसार, हजारों भाजपा कार्यकर्ता अपना घर छोड़ कहीं और रहने को मजबूर हैं। ऐसे समय में अपने कार्यकर्ताओं के साथ पार्टी नेतृत्व का खड़ा रहना और उनकी हौसला आफजाई करते रहना भी किसी चुनौती से कम नहीं है।
हिन्दू कार्ड और मजबूत करना
पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले भाजपा ने ​हिन्दू कार्ड मजबूत करने की पूरी कोशिश की। राज्य में ध्रुवीकरण भी हुआ, लेकिन इसका लाभ तृणमूल को ही मिला। दरअसल, अल्पसंख्यक वोट एकजुट होकर तृणमूल के खेमे में गये, लेकिन​ हिन्दू वोट 3 भागों में बंट गये। ऐसे में भाजपा को नुकसान झेलना पड़ा। हालांकि अब पार्टी के सामने बड़ी चुनौती होगी हिन्दू कार्ड को और मजबूत करना ताकि​ हिन्दू वोटों का विभाजन ना हो।
हिन्दीभाषी मतदाताओं को पूरी तरह अपनी ओर करना
भाजपा के नेताओं का कहना है कि ममता बनर्जी के मंत्रीमण्डल में किसी हिन्दीभाषी चेहरे को शामिल नहीं किये जाने के कारण हिन्दीभाषी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। ऐसे में अब भाजपा के लिए यह भी एक चैलेंज होगा कि वह हिन्दीभाषी मतदाताओं को पूरी तरह अपनी ओर करे ताकि पार्टी को इसका लाभ मिल सके।
क्या कहा भाजपा ने
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव व बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने सन्मार्ग से कहा, ‘ममताजी को जिन लोगों ने वाेट नहीं दिया, उन्हें टार्गेट किया जा रहा है। आज भी 1 लाख से अधिक हमारे कार्यकर्ता घर के बाहर हैं। गांव में जाने के लिए सिंडिकेट फीस ली जा रही है, पूरी तरह अराजकता का माहौल है। भाजपा के लिए पोलिंग बूथ पर बैठने वाले नेताओं को चुन-चुन कर आर्थिव शारिरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।’

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