‘जय श्री राम’ का नारा कहीं जानबूझ कर तो नहीं लगाया गया !

आगामी विस चुनाव पर पड़ सकता है खासा असर
भाजपा के लिए बना चुनावी हथकंडा
कोलकाता : ऐसा पहली बार नहीं है। पहले भी जय श्रीराम सुनकर दीदी अपना आपा खो चुकी हैं। राम का नाम सुनकर किसी को आपत्ति नहीं होती मगर यह भी सच है कि भाजपा बंगाल में जय श्रीराम को एक तरीके से राजनीतिक हथकंडे के रूप में इस्तेमाल कर रही है। विक्टोरिया मेमोरियल में पराक्रम दिवस के कार्यक्रम में ममता बनर्जी का जय श्रीराम का नारा सुनकर नाराज होना कई संदेश दे रहा है। बीती घटनाओं पर नजर दौड़ाएं तो इसी जय श्रीराम से दीदी का मिजाज ऐसा घूमा था कि तृणमूल कहीं न कहीं बैकफुट पर आ गयी थी। ऐसी स्थिति में यह कहना भी गलत न होगा कि ममता के सामने क्या जानबूझकर जय श्रीराम का नारा लगाया जा रहा है ?
लोकसभा में तृणमूल की हार की वजह था जय श्रीराम
जानकारों की माने तो ममता का यह रिएक्शन एक बड़ा कारण था लोकसभा चुनाव में बैरकपुर की हार का। वजह यही जय श्री राम है जिसे हिन्दीभाषी अभिवादन के रूप में इस्तेमाल करते है जबकि ममता ने इसे राजनीतिक परिदृश्य से तौल दिया था। मौजूदा समय भी चुनाव का ही है और ऐसे समय में भाजपा ने ममता के इसी नब्ज को पकड़ते हुए एक बार फिर इसे स्लोगन के रूप में इस्तेमाल कर अपना समीकरण ठीक करने में लगी है। माना जा रहा है कि जय श्री राम विधानसभा चुनाव में इक बड़ी भूमिका निभाने वाला है जिस पर तृणमूल अगर अपने तेवर बिगाड़ती है तो संभव है उसे भारी नुकसान पहुंचाना पड़ेगा।
हिन्दीभाषियों की सेंटीमेंट से जुड़ा है जय श्री राम
देखा जाए तो हिन्दीभाषियों के लिए जय श्री राम कोई स्लोगन नहीं बल्कि अभिवादन से जुड़ा शब्द है। इस पर अगर कोई मिजाज हारता है तो उसके प्रति इन लोगों का नजरियां भी स्वत: बदल जाता है। अमुमन जय श्री राम स्वागत के तौर पर कहा जाने वाला शब्द है जिसे इन दिनों भाजपा ने अपना कथित तौर पर स्लोगन बना लिया है। यह गलत नहीं है कि बांग्ला भाषी भी जय श्री राम को स्लोगन की तरह नहीं बल्कि सेंटीमेंट से जोड़ रहे है।
भाजपा ने पकड़ ली तृणमूल की नब्ज
तृणमूल को जय श्री राम से तकलीफ होती है और यह बात शत-प्रतिशत सही है। इसका उदाहरण भी कई बार देखने को मिल चुका है। अब इसे तृणमूल की कमजोरी भी कह सकते है जो इसे लेकर न तो गरिमा रख सकती है न ही उनमें सहनशीलता है इससे उभरने की। जाहिर है चुनावी जंग में भाजपा इसे हथकंडे के रूप में तृणमूल के खिलाफ इस्तेमाल करने में पीछे नहीं हटेगी।
पहली बार जब भड़की थी ममता, कहा था चमड़ी उधाड़ लेंगे
बात दो साल पहले की है जब ममता पहली बार जय श्री राम पर भड़की थी। उस वक्त ममता ने अपनी गाड़ी रुकवाकर, नारेबाजी करने वालों को रोका था और कहा था कि चमड़ी उधाड़ देंगे, गिरफ्तार करा देंगे। ममता उस वक्त अपनी गाड़ी से बाहर आाकर सुरक्षा अधिकारियों से सभी लोगों का नाम लिखने को कहा था। साथ ही बोला था कि आप अपने बारे में क्या सोचते हैं? आप अन्य राज्यों से आएंगे, यहां रहें और हमारे साथ दुर्व्यवहार करें। मैं इसे बर्दाश्त नहीं करूंगी। आपकी हिम्मत कैसे हुई मुझे अपमानित करने की ?

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