बंगाल की सियासत पर हावी होती धर्म की राजनीति

कोलकाता : पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव इस बार कई मायनों में अलग हो रहा है। बंगाल में कहीं नहीं खड़ी होने वाली भाजपा अब बंगाल में मुख्य विपक्षी पार्टी के तौर पर सामने है और इस बार सत्ता में आने की दावेदार है। हालांकि अभी लड़ाई कठिन है और इस बार वह सब देखने को मिलेगा जो आज तक कभी देखने को नहीं मिला। इस बार पश्चिम बंगाल में जाति व धर्म की राजनीति देखने को मिल रही है जो आज तक कभी नहीं देखी गयी। बंगाल के चुनावी दंगल में इस बार धर्म की राजनीति हावी होती दिख रही है।
जय श्री राम बनाम ​जय सिया राम
एक तरफ भाजपा बंगाल में जय श्री राम का नारा बुलंद कर रही है तो दूसरी ओर तृणमूल जय सिया राम कह रही है। भाजपा कहती है कि जय श्री राम से ममता बनर्जी चिढ़ती हैं जबकि अभिषेक बनर्जी का कहना है कि भाजपा महिलाओं का सम्मान करना नहीं जानती है जिस कारण जय श्री राम कहती है। उन्होंने कहा है ​कि वह भाजपा नेताओं से जय सिया राम बुलवाकर रहेंगे। ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने जय श्रीराम को सियासी नारा बताते हुआ कहा कि- सांस्कृतिक नारा तो जय सियाराम है। वहीं भाजपा इस बार पश्चिम बंगाल में ‘जय श्री राम’ के साथ – साथ ‘राम राज्य’ पर भी फोकस कर रही है।
राम और दुर्गा के बीच छिड़ी जंग
बंगाल का चुनाव अब धीरे-धीरे धर्मयुद्ध बनता जा रहा है। भगवान राम, जगन्नाथ के बाद देवी दुर्गा पर भी जंग छिड़ी। हाल में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा था कि भगवान राम के 14 पुश्तों के बारे में भी लोग जानते हैं, लेकिन दुर्गा के बारे में कौन जानता है। इस पर पलटवार करते हुए तृणमूल ने कहा कि जो पार्टी मां दुर्गा का अपमान करती है, वह भला बंगाल में सत्ता दखल का सपना कैसे देख रही है।
सरस्वती पूजा के दिन भी दिखा राजनीतिक रंग
तृणमूल और भाजपा दोनों ही पार्टियों ने सरस्वती पूजा के दिन राजनीतिक रंग दिखाया। एक तरफ राज्य भर में तृणमूल ने जोरों – शोरो से सरस्वती पूजा मनायी तो वहीं भाजपा भी इसमें कहीं पीछे नहीं रही। भाजपा ने भी सरस्वती पूजा पण्डालों के उद्घाटन व पूजा में शामिल होने में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
नंदीग्राम बना धर्म की राजनीति का अखाड़ा
इस बार चुनाव में नंदीग्राम हॉट सीट बना हुआ है। ऐसे में यह केंद्र भला धर्म की राजनीति से कैसे अछूता रह सकता था। नंदीग्राम में एक तरफ ममता बनर्जी को मंदिराें – मंदिरों में जाकर माथा टेकते हुए देखा गया तो दूसरी ओर, शुभेंदु अधिकारी भी कभी हनुमान मंदिर तो कभी शिव मंदिरों में पूजा – अर्चना करते हुए नजर आये।
असली व नकली हिन्दू भी बना मुद्दा
असली व नकली हिन्दू भी इस बार के चुनावी दंगल में मुद्दा बना हुआ है। शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में ममता बन​र्जी को नकली हिन्दू तक कह दिया तो ममता बनर्जी ने भी इस मुद्दे पर शुभेंदु अधिकारी पर पलटवार किया।
पहचान व जाति पर भी हुई राजनीति
पहचान व जाति के आधार पर भी इस बार खूब राजनीति हुई। अब तक के सबसे कठिन चुनाव का सामना कर रहीं बंगाल की मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी स्थानीय-बाहरी, बंगाली अस्मिता व अपने हिंदू ब्राह्मण होने की बातें कह रही हैं। भाजपा को वह बाहरी और गुजरात की पार्टी बता रही हैं तो खुद को बंगाल की बेटी। वहीं ममता का किला ढाहने के लिए भाजपा एक ओर खुद को बंगाली अस्मिता, संस्कृति व विभूतियों से जोड़कर बंगाल को सोनार बांग्ला बनाने के साथ जय श्रीराम का नारा बुलंद कर रही है। अब देखना यह है कि इस बार के चुनाव में किसकी जीत होती है और किसकी हार।

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