राज्यः भक्तों के बिना ही निकलेगी जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा की यात्रा

कम की गयी यात्रा की अवधि, भक्त करेंगे वर्चुअल दर्शन
महेश, इस्कॉन, मायापुर हर जगह कोविड के नियमानुसार होगी व्यवस्था
कल रथ यात्रा, 20 को उल्टा रथ
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : कोरोना महामारी के बीच हर साल होने वाली रथ यात्रा का आयोजन इस वर्ष पाबंदियों के साथ किया जाएगा। राज्य में कई जगह मान्यताओं के आधार पर रथ यात्रा का आयोजन होता आया है। इस साल भी भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा की पूजा होगी लेकिन कोरोना के नियम सर्वोपरि होंगे। यहां इस्कॉन, महेश और मायापुर समेत बाकी जगहों पर धूमधाम से रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है। इस साल यहां रथ पूजा तो मनेगी मगर भक्तगण रथ यात्रा में शामिल नहीं हो पाएंगे। इतना ही नहीं रथ यात्रा को लेकर भी अलग-अलग व्यवस्था की गयी है जहां भगवान को भोग भी लगेगा, घट भी चढ़ेगा लेकिन भक्तों को भीड़ लगाने की इजाजत नहीं होगी।
महेश में नहीं निकलेगी रथ यात्रा, इस साल पूरे हुए 625 वर्ष
पुरी के बाद दूसरी सबसे पुरानी बंगाल में महेश की रथ यात्रा इस साल नहीं निकलेगी। यह रथ पूजा इस साल अपने 625 वर्ष पूरे कर रही है। बंगाल में महेश सबसे पुराना रथ है। मंदिर प्रबंधन की तरफ से बताया गया है कि अस्थायी रूप से मासी बाड़ी तैयार की गयी है जहां जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा को ठहराया जाएगा। जबकि एक किलोमीटर दूर मासी की बाड़ी सिर्फ शालग्राम शिला को ही ले जाया जाएगा।
कोलकाता इस्कॉन द्वारा गाड़ी पर सवार होकर मासी घर जाएंगे जगन्नाथ
कोलकाता इस्कॉन की ओर से आयोजित रथ यात्रा का प्रारूप इस बार काफी बदला सा है। यह इनकी 50वीं रथ यात्रा होगी। बताया गया है कि जगन्नाथ रथ पर सवार होकर नहीं बल्कि गाड़ी में सवार होकर मासी के घर जाएंगे। इसके लिए 15 गाड़ियों का काफिला होगा जिसे कोलकाता पुलिस की स्कॉट कार लेकर जाएगी। यह यात्रा 4 किलोमीटर तक की होगी। पूरा आयोजन इस्कॉन परिसर में ही सम्पन्न होगा। इस्कॉन की ओर से दी गयी जानकारी में बताया गया है कि मुख्यमंत्री ममता बन​र्जी कोविड के कारण रथ यात्रा में शामिल नहीं होंगी लेकिन उनका द्वारा भोग भिजवाया जाएगा। 9 दिन चलने वाली इस यात्रा में भक्तों को दर्शन के लिए समय दिया जाएगा।
मायापुर इस्कॉन में नहीं होगा उत्सव
मायापुर इस्कॉन मंदिर के पीआर रसिक गौरांग दास ने बताया कि कोविड के कारण समस्त उत्सव रद्द किये गये हैं। रथ पूजा कैंपस में नियमों को मानते हुए पूरी की जाएगी, जो गदाभवन से शुरू होकर पंचतत्व गेट तक पूरी की जाएगी जिसकी दूरी 200 मीटर है। यहां रथ यात्रा का पूरा उत्सव भक्त वर्चुअल देख सकेंगे। उन्हें शामिल होने की इजाजत नहीं होगी, वहां का गेट बंद कर दिया जाएगा।
महिषादल का 245 साल पुराने रथ पर नहीं पालकी में निकलेगी सवारी
पूर्व मिदनापुर के महिषादल का 245 साल पुराना रथ भी इस बार नहीं निकलने जा रहा है बल्कि पालकी में भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा की सवारी राजबाड़ी मंदिर से मासी बाड़ी तक ले जाया जाएगा। लोगों की भीड़ न हो उसके लिए प्रशासन की तरफ से माइकिंग की जा रही है।
तारापीठ में नहीं होगा रथ उत्सव
तारापीठ में भी इस साल कोविड के कारण रथ का उत्सव नहीं होगा। तारापीठ मंदिर में हर साल मंदिर परिसर में ही भक्त रथ रस्सी से टान कर ले जाते हैं जो इस साल नहीं होगा।

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