जीती चाय बागान की महिला श्रमिकों ने वोट के बदले मांगा पानी

– गर्मी बढ़ते ही डुआर्स के चाय बागानों में शुरू पेयजल की किल्लत
जीती चाय बागान की महिला श्रमिकों ने वोट के बदले मांगा पानी
– गर्मी बढ़ते ही डुआर्स के चाय बागानों में शुरू पेयजल की किल्लत
– पानी के लिये घर से 4-5 कीलोमीटर दूर झोड़ा ही एकमात्र सहारा
नागराकाटा : विधानसभा चुनाव सामने है सभी राजनीतिक पार्टियां विभिन्न प्रकार के आश्वासन दे रहे हैं। हर पार्टी के प्रत्याशी कहीं पक्की सड़क तो कहीं पेयजल कि समस्या के समाधान करने का आश्वासन देते दिखाई दिख रहे हैं। डुआर्स चाय बागानों से घिरा हुआ क्षेत्र है। डुआर्स कि चाय बागानों की समस्याओं में पेयजल संकट एक प्रमुख समस्या है। कहा जाता है जल ही जीवन है, जल के बिना कोई भी नहीं जी सकता। मगर प्रशासन के लाख दावों के बावजूद डुआर्स के विभिन्न चाय बागानों में पेयजल की गंभीर समस्या देखने को मिल रही है। गर्मी का मौसम शुरू होते हीं विभिन्न इलाकों में बूंद-बूंद पानी के लिए श्रमिकों को तड़पना या कोसों दूर भटकना पड़ता है। कई बार तो पेयजल को लेकर श्रमिकों में लड़ाई भी हो जाता है। कभी-कभी 4 से 5 किलोमीटर की दूरी तय कर नदी झोड़ा से पानी लाना पड़ता है। सरकार इलाके में विकास कार्य करने का चाहे जितना भी दावा कर लें,वास्तविक तस्वीरे कुछ और ही बयां करती है। हम बात कर रहे हैं भारत भूटान सीमावर्ती जीती चाय बागान कि।
जीती चाय बागान जलपाईगुड़ी जिले के नागराकाटा ब्लॉक के भूटान सीमांत पर स्थित है। चाय बागान कि गोगो लाईन और जीती लाईन में पेयजल की गंभीर समस्या है। पेयजल संकट से जूझ रही जीती चाय बागान कि महिला चाय श्रमिकों ने इस बार जो जल इस समस्या को लेकर जागरुक हो चुकीं है। उनलोगों का कहना है कि इस समस्या का जो भी समाधान करेगा उसे ही वोट देंगी। चाय बागान कि महिला चाय श्रमिक बिगनी मुंडा और गीता उरांव ने कहा चाय बागान कि 2 श्रमिक लाईन में पियेजल कि काफि समस्या है । हमें अपने गांव से दूसरा लाइन में पानी के लिए जाना पड़ता है। प्रतिदिन पानी के लिए घंटों लाइन में रुकना पड़ता है यहां तक कि पानी लेने के लिए एक आपस में झगड़ा भी करना पड़ता है। हम गड्ढा में फटे हुए पाइप से निकलता पानी को इकट्ठा कर घर लाते हैं। कपड़ा धोने और नहाने के लिए हमें तीन-चार किलोमीटर पैदल चलकर नदी से पानी लाना पड़ता है। हम महिलाओं के लिये घर का सारा काम निपटाकर बाहर मजदूरी करने भी जाना पड़ता है। ऐसे में इतनी दूर से पानी लाने में समय और मेहनत दोनों बर्बाद होता है। जो हमारे लिये काफी कष्टदायक भी है। महिलाओं ने बताया कि हम इस समस्या से चल लंबे समय से जूझ रहे हैं कई नेता अधिकारियों को इस समस्या के बारे में बताया लेकिन किसी ने समाधान नहीं किया। इसलिए हम ग्रामीणों ने फैसला किया है कि इस बार जो हमारे पेयजल की समस्या का समाधान करेगा हम उसे ही वोट देंगे।

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