भाजपा में शुभेंदु के बढ़ते कद से नाराज हो रहे है पार्टी के लोग

कोलकाता : टीएमसी से बीजेपी में आए शुभेंदु अधिकारी की बढ़ती धमक को देखकर अब उनके अपने ही विद्रोह का बिगुल बजाने लगे हैं। ममता बनर्जी को नंदीग्राम से हराने वाले शुभेंदु अधिकारी का सियासी कद भाजपा में लगातार बढ़ता जा रहा है और वह बंगाल भाजपा के एक प्रमुख चेहरा के रूप में उभरते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, शुंभेदु अधिकारी की यही सियासी धमक बंगाल भाजपा के भीतर असंतोष का विषय बन गया है। बड़े ही कम समय में शुभेंदु अधिकारी बीजेपी के शीर्ष नेताओं के करीब जा पहुंचे हैं। यही वजह है कि वह अक्सर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ बैठकों में दिखते रहते हैं। मगर यही बात अब बंगाल भाजपा के कई नेताओं को खटकने लगी है।

सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को हाल ही में कैबिनेट विस्तार और फेरबदल के दौरान कंसल्टेशन यानी बातचीत की प्रक्रिया से बाहर रखा गया था। उन्हें तो यह भी नहीं पता था कि मोदी कैबिनेट का विस्तार कब होगा और बंगाल से किन-किन को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। वहीं दूसरी ओर, कैबिनेट विस्तार में शुभेंदु अधिकारी की अमित शाह से बातचीत ने बड़ी भूमिका निभाई। खासकर शांतनु ठाकुर के मामले में, जिन्होंने बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली है।

सूत्रों की मानें तो शांतनु ठाकुर के मंत्री बनाए जाने में शुभेंदु अधिकारी की बड़ी भूमिका है। शांतनु ठाकुर और अधिकारी के बीच अच्छे राजनीतिक संबंध भी हैं। हालांकि, शुभेंदु अधिकारी को देखकर उनके पीछे-पीछे भाजपा में शामिल हुए कई नेता इससे नाखुश नजर आ रहे हैं। जब शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम से ममता बनर्जी को हराया है, तब से वह बंगाल में भाजपा के क्राउन प्रिंस यानी युवराज बन चुके हैं। इसके अलावा, भारतीय जनता पार्टी भी शुभेंदु को ज्यादा तवज्जो दे रही है, जिसने बंगाल के कई अन्य भाजपा नेताओं को असहज कर दिया है।

माना जा रहा है कि मुकुल रॉय की टीएमसी में वापसी की वजह भी शुभेंदु अधिकारी का भाजपा में बढ़ता कद ही है। कैलाश विजयर्गीय के काफी करीबी माने जाने वाले मुकुल रॉय बीते दिनों टीएमसी में शामिल हो गए थे। वह 2017 में भाजपा में शामिल हुए थे। सिर्फ मुकुल रॉय ही अकेले ऐसे नहीं हैं, बल्कि एक और बीजेपी नेता ने असंतोष जाहिर किया है।

भाजपा नेता राजीब बनर्जी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाल कर कहा था कि विधानसभा में विपक्ष के नेता (शुभेंदु अधिकारी) को बेवजह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला नहीं बोलना चाहिए। ममता बनर्जी तीसरी बार बड़ी जीत के साथ सत्ता में आई हैं। इसके बजाए उन्हें तेल के बढ़ते दामों पर फोकस करना चाहिए। हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब राजीव बनर्जी ने बीजेपी के खिलाफ आवाज बुलंद की है। जून के महीने में राजीब बनर्जी ने टीएमसी के राज्य सचिव कुणाल घोष से भी मुलाकात की थी। यहां आपको बता दें कि सौमित्र खान, राजीब बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी यह तीनों ही नेता पहले तृणमूल कांग्रेस के साथ थे। सौमत्र खान ने जनवरी, 2019 में बीजेपी ज्वायन किया था। शुभेंदु अधिकारी ने दिसंबर 2020 और बनर्जी ने जनवरी 2021 में बीजेपी का दामन थामा था।

वहीं, राजीब के अलावा, सांसद सौमित्र खान ने पार्टी के राज्य युवा ईकाई अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद शुभेंदु अधिकारी पर हमला बोला है। सौमित्र ने कहा कि ‘पार्टी केवल एक जगह केंद्रित हो रही है…शुभेंदु बार-बार दिल्ली जाकर सभी को बरगला रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि केवल उन्होंने ही बलिदान किया है। हम लोगों ने कुछ नहीं किया है। वो खुद को शीर्ष नेता के तौर पर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। जिस तरह से पार्टी की बंगाल ईकाई चल रही है इससे कुछ अच्छा नहीं हो सकता। पार्टी में असंतोष है…उससे हम बहुत ही दुखी है। मुझे साइड लाइन किया गया।’

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