ई-ह्कील्स को बढ़ाने के लिए अहम साबित होगी राज्य सरकार की नीतियां

कोलकाता : पेट्रोल-डी​जल जिस प्रकार महंगे होते जा रहे हैं और इसके साथ ही पर्यावरण भी प्रदूषित हो रहा है, उसे देखते हुए देश भर के साथ – साथ पश्चिम बंगाल में ई-ह्वीकल्स (इलेक्ट्रिक ह्वीकल) की संख्या बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। राज्य के परिवहन विभाग का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक कोलकाता में पेट्रोल-डीजल चालित वाहन बंद हो जायें और ई-ह्वीकल्स चलें। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा निर्धारित नीतियां काफी अहम साबित होंगी। ई-ह्वीकल्स को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार कई अहम योजनाओं पर कार्य करने वाला है। हाल में इलेक्ट्रिक ह्वीकल पॉलिसी 2021 जारी की गयी थी।
देश में काफी कम है ई – वाहनों की संख्या
देश में इलेक्ट्रिक ह्वीकल इण्डस्ट्री अब भी काफी पीछे है और कुल वाहनों की बिक्री का 1% से भी कम ई-वाहन हैं। फिलहाल देश में 0.4 मिलियन इलेक्ट्रिक टू-ह्वीलर और कुछ हजार कार ही हैं।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सबसे पहले ई-बस आयी कोलकाता में
पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ई-बस की शुरुआत करने वाला पहला शहर कोलकाता है। वर्तमान में ई वाहनों की संख्या काफी कम है जिनमें 5,895 पेट्रोल हाइब्रिड, 4254 डीजल हाइब्रिड, 35,999 ई​-रिक्शा, 1,240 टू ह्वीलर, 93 फोर ह्वीलर, 93 बसें, 24 ट्रक हैं जिनमें 93.36 लाख गैर-परिवहन और 10.07 लाख परिवहन वाहनों की संख्या राज्य में है।
ये है राज्य सरकार का लक्ष्य
* राज्य सरकार का लक्ष्य है कि केंद्र सरकार की फेम 2 के लागू होने वाले वर्ष 2022 के अंत तक ई-वाहनों के क्षेत्र में पश्चिम बंगाल अन्य श्रेष्ठ राज्यों की सूची में शामिल हो। वहीं वर्ष 2030 तक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में श्रेष्ठ राज्य बनने का लक्ष्य भी पश्चिम बंगाल सरकार का है।
* नीतियों को लागू करने के दौरान 10 लाख ई-वाहनों (सभी प्रकार के वाहन इनमें शामिल हैं) का लक्ष्य है।
* 1,00,000 पब्लिक, सेमी-पब्लिक चा​र्जिंग स्टेशन नीतियों को लागू करने के दौरान बनाये जायेंगे।
* इलेक्ट्रिक ह्वीकल/पब्लिक चार्ज प्वाइंट रेशियो काे 8 करने का लक्ष्य है। इसके साथ इले​क्ट्रिक वाहनों के लिए सटीक सरंचना जिसमें पर्याप्त विद्युत आपूर्ति व चार्जिंग प्वाइंट्स का नेटवर्क हो, तैयार करने का लक्ष्य है।
क्या है रणनीति
* चार्जिंग संरचना
* ई-वाहनों के लिए मांग का सृजन
* रिसर्च एण्ड डेवलपमेंट
* ईवी एक्सिलरेटर सेल की स्थापना
* ई – वाहनों को लेकर जागरूकता फैलाना
* 2 व 3 ह्वीलर्स के लिए कियोस्क सर्विस के रूप में स्वैपिंग स्टेशनों की सुविधा
* मौजूदा निजी बिल्डिंगों जैसे कि मॉल व अन्य कॉमर्शियल बिल्डिंगों में चार्जिंग/बैटरी स्वैपिंग स्टेशनों की स्थापना
* पहले कुछ हाइड्रोजन जनरेशन और रिफ्यूलिंग स्टेशनों को सरकार द्वारा बनाया जायेगा, लेकिन इसके बाद इसमें निजी क्षेत्रों को अनुमति दी जायेगी।
इन 4 शहरों को पहले बनाया जायेगा मॉडल ईएम सिटी
कोलकाता, आसनसोल, दार्जिलिंग और हावड़ा शहरों को मॉडल ईएम (इलेक्ट्रिक मोबिलिटी) सिटी घोषित किये जायेंगे। वहीं न्यूटाउन कोलकाता को सभी नयी पहलों के लिए पायलट सिटी बनाया जायेगा। केंद्र सरकार को स्मार्ट सिटी प्रस्तावों में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सहयोग और हाइड्रोजन फ्यूलिंग स्टेशनों की बात भी होगी। पब्लिक चार्जिंग इक्विपमेंट कई सरकारी कार्यालयों और निजी इलाकों में भी रहेंगे।
इंटर सिटी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा
कोलकाता-आसनसोल और कोलकाता – दीघा रूटों में इंटर सिटी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए इंटर सिटी इलेक्ट्रिफिकेशन ग्रीन रूट्स घोषित किये जायेंगे। औसतन 25 कि.मी. की दूरी पर रैपिड चार्जर्स रखे जायेंगे। ईवी इनोवेशन सेंटर की स्थापना के अलावा बैटरी इण्डस्ट्रियलाइजेशन हब की स्थापना की जायेगी।

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