सैनिटाइजेशन व हाइजिन पर देना होगा विशेष जोर

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : असम, बिहार, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक, ओडिशा, पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों ने स्कूलों को फिर से खोल दिया है। मुख्य रूप से बोर्ड परीक्षाओं में बैठने वाले छात्रों के लिए स्कूलों को खोला गया है। राज्य में भी शुक्रवार से 9से 12 वीं के लिए स्कूल खुल रहे हैं। पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से भी स्कूलों को सुरक्षा के सही प्रोटोकॉल का पालन करने को कहा गया है। दूसरी तरफ, अभिभावक भी अपने बच्चे को स्कूलों में भेजना चाहते हैं लेकिन कोराना वायरस महामारी की वजह से उत्पन्न हुए स्वास्थ्य जोखिम के भय से वे बच्चे की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। विशेष रूप से कोलकाता जैसे शहर में स्थिति चिंताजनक हो सकती है, क्योंकि 14 मिलियन की आबादी वाला यह शहर, यूएस में कोरोना महामारी का केन्द्र रहे न्यूयॉर्क सिटी के आबादी की तुलना में तीन गुना बड़ा है।यूनिसेफ के एक रिपोर्ट के अनुसार, ‘स्कूलों को फिर से खोलने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए लेकिन यह एक ऐसा कार्य है जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, जल, सफाई, स्वच्छता (वाश) और बाल संरक्षण मंत्रालयों के बीच सहयोग की आवश्यकता होगी। ‘ डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ घेब्रेयेसस ने इस बात पर भी जोर दिया है कि कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए पानी, सफाई और स्वच्छता सबसे मूलभूत जरूरत है। यूनिसेफ के दस्तावेज जिसका शीर्षक स्कूलों को सुरक्षित तरीके से फिर से खोलने की सूचि में हैंड सैनिटाइजेशन पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जो कि फिर से स्कूल जाने की मुख्य प्राथमिकताओं में से एक है। इसमें कहा गया है कि स्वच्छता के लिए स्कूल में जल और सफाई की सुविधाएं महत्वपूर्ण है।डब्ल्यूएचओ और यूनिसेफ ने हालिया रिपोर्ट में कहा है कि कोविड-19 महामारी से पहले, दुनिया भर के 5 में से 2 स्कूलों में हाथ धोने की बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। ‘वाश’ के क्षेत्र में काम करने वाली कोलकाता स्थित एक स्वयं सेवी संस्था (एनजीओ) अनाहत फॉर चेंज फाउंडेशन द्वारा हाल ही में की गयी एक अध्ययन भी कुछ ऐसा ही हाल दर्शाती है। उस अध्ययन के अनुसार कोलकाता के 30 में से 15 स्कूलों में शौचालय और हाथ धोने जैसी बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करने की जरूरत की बात कही गई है।अनाहत फॉर चेंज फाउंडेशन की सह-संस्थापक नम्रता करमचंदानी के अनुसार, ‘महामारी ने बच्चों की शिक्षा को बुरी तरह से बाधित कर दिया है, खासकर ग्रामीण इलाकों में। हमें स्कूलों के ‘वाश फैसिलिटी’ के बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने के तरफ ध्यान केंद्रित करना चाहिए। खासकर रूरल और सेमि-अर्बन इलाकों के स्कूलों में। यह बेहतर और उपयोगी शौचालयों के निर्माण तथा उसके नियमित सफाई संबंधी पहल के लिए भी एक मजबूत संकल्प का आह्वान करता है। कोलकाता मॉम्स क्लब की ग्रुप एडमिन, मोनिका अरोड़ा ने कहा कि, ‘अब जब स्कूल धीरे-धीरे फिर से खुल रहे हैं, हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि स्कूलों में बच्चों के लिए शौचालय सुरक्षित और सुलभ हों।

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