…तो इस कारण 2 महीने से बाबुल पर नजर थी तृणमूल की

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : शनिवार का दिन भाजपा के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था क्योंकि इस दिन पूर्व केंद्रीय मंत्री व सांसद बाबुल सुप्रियो तृणमूल छोड़ भाजपा में शामिल हो गये। केंद्रीय मंत्री के पद से हटाये जाने के बाद से ही पार्टी से उनकी दूरियां बढ़ गयी थीं। तृणमूल सूत्रों ने बताया कि बाबुल के तृणमूल में आने के पीछे पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी हैं। लगभग पिछले 2 महीने से बाबुल से उनकी बात चल रही थी। सूत्र बताते हैं कि अर्पिता घोष के राज्यसभा सांसद पद से इस्तीफे का यही कारण था कि तृणमूल बाबुल को इस पद के लिए नामांकित कर सकती है। सूत्रों का कहना है कि सोमवार को बाबुल दिल्ली जा सकते हैं और इस दिन वह लोकसभा सांसद के पद से इस्तीफा देकर राज्यसभा सांसद बनकर संसद जा सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि बाबुल सुप्रियो की राष्ट्रीय पहचान के कारण ही तृणमूल की नजर बाबुल पर थी। भवानीपुर के लिए भाजपा द्वारा जब सुप्रियो को स्टार प्रचारक बनाया गया तो उन्होंने कहा था कि वह प्रचार नहीं करेंगे। सूत्रों की मानें तो भवानीपुर विधानसभा उपचुनाव से पहले भाजपा को तृणमूल बड़ा झटका देना चाहती थी और इस कारण उन्हें पार्टी में शामिल कराया गया। टीएमसी का मानना है कि बाबुल की राष्ट्रीय पहचान है और इसके साथ ही उत्तर – पूर्वी राज्यों जैसे कि झारखण्ड, बिहार और ओडिशा में भी उनकी पहचान है। दिल्ली में टीएमसी कई कार्यक्रम करने की योजना बना रही है और सुप्रियो राष्ट्रीय स्तर पर तृणमूल की अहमियत बढ़ा सकते हैं।

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