चुनाव में 60 से 80 सीटों पर लड़ सकती है सिद्दकी की नयी पार्टी

फुरफरा शरीफ के पीरजादा बनाएंगे मुस्लिम, दलितों और आदिवासियों की पार्टी
21 को होगा नाम का ऐलान
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्य में अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसे लेकर सभी पार्टियां अपनी-अपनी तैयारी शुरू कर दी है। अब फुरफुरा शरीफ के पीरजादा अब्बास सिद्दीकी चुनावी मैदान में आने वाले हैं। यहां बता दें कि एआईएमआईएम के अध्यक्ष ओवैसी ने बंगाल के दौरे के दौरान उनसे मुलाकात की थी। इसके बाद ही उनका यह निर्णय आया है। वे अपनी नई पार्टी की घोषणा 21 जनवरी को करेंगे। उनका कहना है कि मैं चाहता हूं कि कुछ प्रमुख मुस्लिम, आदिवासी, दलित प्रतिनिधि शोषितों की आवाज का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुनाव लड़ें। उन्हें पिछले 73 वर्षों से बंगाल में एक विश्वसनीय आवाज नहीं मिली। हम चाहते हैं कि ये लोग अपने विधानसभा क्षेत्रों को मॉडल निर्वाचन क्षेत्रों में विकसित करें। मुझे बताया गया है कि तृणमूल के पूर्व सांसद अकबर अली खोंडेकर ने एक बार इसे अपने तरीके से आजमाया था।
कई पार्टियों की नींद हुई हराम
2021 का विधानसभा चुनाव किसी के लिए भी आसान नहीं दिख रहा है। ऐसे में इनकी नयी पार्टी की खबर ने कई पार्टियों की टेंशन बढ़ा दी है। यह संगठन बंगाल में मुसलमानों, दलितों, आदिवासियों के लिए एक मंच होगा। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में कई आदिवासी और दलित प्रतिनिधि मेरे पास आए। कई राजनीतिक दलों के नेता भी बातचीत के लिए मेरे पास आए थे। फिलहाल, हम विधानसभा चुनाव में 60-80 सीटों पर लड़ने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। सिद्दीकी ग्रामीण उत्तर और दक्षिण 24 परगना और पूर्वी मिदनापुर में आयोजित धार्मिक जलसों में एक नई पार्टी शुरू करने की संभावना जताई।
इस​लिए नयी पार्टी बनाना हो गया था जरूरी
उन्होंने कहा, ‘मैं 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान राजनीति में नहीं था। बंगाल में भाजपा को 18 सीटें मिलीं। जब बंगाल में तृणमूल सत्ता में हैं तो पार्टी को इतनी सीटें कैसे मिल सकती हैं ? हमने वाम मोर्चे के शासन के दौरान राज्य में बीजेपी को बढ़त बनाते हुए नहीं देखा। उन्होंने कहा कि मेरा चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं है। सिद्दीकी ने कहा कि उनके ऊपर आरोप लगाया जा रहा है कि वह ओवैसी के क्लोन हैं और तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में जाने वाले अल्पसंख्यक वोटों को बांटकर बीजेपी के लिए जीत आसान करने चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। यह सरासर गलत है।

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