क्या हिन्दुस्तान क्लब में लहसुन-प्याज युक्त भोजन शुरू होना चाहिए?

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हां या ना में भी दे सकते हैं जवाब
कोलकाताः महानगर का सुविख्यात हिन्दुस्तान क्लब शुद्ध शाकाहारी भोजन के लिए देश में शुमार है। यहां भोजन में लहसुन-प्याज भी नहीं डाला जाता। अब एक तबके की ओर से मांग उठ रही है कि लहसुन-प्याज के इस्तेमाल की इजाजत दी जाये। इस सिलसिले में आपको बताते चलें कि हिन्दुस्तान क्लब के स्थापना काल से ही लहसुन-प्याज खाद्य व्यंजनों में वर्जित है। महानगर में केवल एक दो ऐसे स्थान हैं जहां इस तरह शुद्ध भोजन बनता है। राजस्थानी समाज ने इस क्लब की स्थापना की थी। इसमें गुजराती, हरियाणवी व अन्य समाज का भी बड़ा याेगदान है। मकसद था एक दूसरे से मिलने, बैठक करने आदि का। इसके लिए इस क्लब का उपयोग समाज के लोग जो इसके सदस्य हैं करते हैं। यहां नाश्ता व भोजन के साथ ठहरने की भी सुविधा है।

बिना लहसुन-प्याज का खाना

इस क्लब की नींव रखने वाले महान लोगों की यह सोच थी कि हर तरह का खाना तो हर जगह मिल सकता है लेकिन समाज के लायक खाना अपने क्लब में बने तो यह बेहतर होगा।

अब बात लहसुन-प्याज शुरू करने पर आ गयी है। सन्मार्ग इसमें समाज के लोगों की राय जानना चाहता है कि क्या इस सुविख्यात क्लब में लहसुन-प्याज का उपयोग किया जाना चाहिए या नहीं? क्या लहसुन-प्याज भोजन में बहुत जरूरी है या इसका कोई वैज्ञानिक आधार है कि बिना लहसुन प्याज के भोजन अच्छा या पौष्टिक होगा ही नहीं? आप अपनी राय इस पर भेज सकते हैं।

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