हावड़ा में लगातार हुई बारिश में कई इलाके जलमग्न

सांकराइल, बागनान व रामकृष्णपुर के इलाकों में घुसा गंगा का पानी
टिकियापाड़ा, जीटी रोड, बनारस रोड पर जलजमाव
हावड़ा : चक्रवाती तूफान यास के चले जाने के बाद हावड़ा में रुक-रुक हो रही लगातार बारिश लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गयी है। इस बारिश ने एक बार फिर हावड़ा नगर निगम की पोल खोल कर रख दी है। गुरुवार की सुबह हुई बारिश में शहर जलमग्न हो गया। यहां की गड्ढे युक्त सड़कें तालाबों में तब्दील हो गयीं। हावड़ा के टिकियापाड़ा के बेलिलियस रोड व बेलगछिया भगाड़ मोड़ पर घुटनों तक पानी भर गया। यही हाल सत्यबाला, लिलुआ के रानीझील, ईस्ट-वेस्ट बाईपास, मुसलमानपाड़ा, बांधाघाट के अरविंदो रोड व बनारस रोड के इलाकों में रहा।
नालियों का गंदा पानी रोड पर आ गया
टिकियापाड़ा के बेलिलियस रोड एवं बेलगछिया के बनारस रोड में तो निकासी व्यवस्था की इतनी खराब हालत थी कि थोड़ी देर की बारिश ने रोड के किनारों की नालियों को तालाब में तब्दील कर दिया। जमे गंदे पानी में लोगों को आवाजाही करनी पड़ी। टिकियापाड़ा के लोगों का आरोप है कि हर बार बारिश में यहां पर सड़कों पर गंदा पानी जम जाता है, परंतु इसे लेकर कोई भी कार्रवाई नहीं की जाती है। इलाके के रहनेवाले जावेद का कहना है कि कई बार इलाके के विधायक अरूप राय से इसकी शिकायतें भी की गयीं लेकिन जलजमाव की समस्या का समाधान नहीं निकला। यहीं हाल बाईपास इलाके का भी है जहां पर गत 1 सप्ताह से पेयजल का पाइप फटा हुआ है लेकिन उसे भी ठीक नहीं किया गया। वहीं दूसरी ओर यास के चक्रवाती प्रभाव से हुई बारिश ने लोगों की मुसीबतों को और बढ़ा दिया है।
घरों में घुसा गंगा व बारिश का पानी
यास के प्रभाव के कारण सांकराइल के अधिकतर इलाके जलमग्न हो गये। यहां तक कि थाने में भी गंगा का पानी घुस गया। गंगाघाट के निकट की बस्ती में पूरा गंगा का पानी भर गया है। यही नजारा बांधाघाट में भी देखने को मिला जहां पर रोड पर जमा गंदा पानी लोगों की दुकानों व घरों में घुस गया है। जीटी रोड एवं हावड़ा की अन्य गलियां भी नालियों के गंदे पानी से भरी हुई दिखाई दीं। लोगों का कहना है कि यहां पर निकासी व्यवस्था इतनी खराब है कि राेड पर जमे पानी को निकलने में दो दिन का समय लग जायेगा।
जमे गंदे पानी से बीमारी का डर
जीटी रोड के किनारे रहनेवाले लोगों का कहना है कि यहां दो दिनों से नाली का पानी जम गया है। इससे बीमारी होने का डर सता रहा है। वहीं टिकियापाड़ा के रहनेवाले लोगों कहना है कि यहां जमे हुए पानी को निकलने में 3 दिन का समय लगेगा। एेसे में इस पानी में निकलने से चर्म रोग का डर लगा हुआ है।

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