एसएससी घोटाले में दस्तावेजों की छानबीन में काला सच आया सामने

381 से अधिक उम्मीदवारों को मिली है अवैध नियुक्तियां
अभी भी कई फाइलें खुलनी है बाकी
सर्वर रूम में रखे गये थे स्कैन किए गए हस्ताक्षर
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्य के बहुचर्चित एसएससी घोटाले में दस्तावेजों की छानबीन शुरू हो गयी है। इस मामले में सीबीआई की टीम को वह सब जानकारियां मिल रही है, जिससे ​कि अधिकारियों को लग रहा है सभी नियम-कानूनों को ताक पर रखकर सैंकड़ों नियुक्तियां की गयी है। एसएससी कार्यालय से जब्त किये गये दस्तावेजों में से एक स्कैन किए गए हस्ताक्षर वाले अनुशंसा पत्र अनियमितताओं की पोल खोल रही है। एसएससी के सर्वर में स्कैन किए गए हस्ताक्षर क्यों रखे गये थे, सीबीआई को इसका उत्तर अभी तक नहीं मिला है। यह सीबीआई के संदेह का मुख्य कारण है। इससे संबंधित पूरी जानकारी सीबीआई की टीम हाई कोर्ट को 9 जून को देगी। अब तक की छानबीन में जो काला सच सामने आया है, वह यह है कि कुल 381 से अधिक उम्मीदवारों की नियुक्तियां अवैध तरीके से की गयी थी। बिना आवेदन के ही कुछ को नौकरी मिल गयी थी। आरोप है कि कई दस्तावेजों पर सिफारिश कर्ता के नाम भी लिखे हुए हैं। इसका मतलब यह लगाया जा रहा है कि इन उम्मीदवारों को राजनीतिक प्रभाव के माध्यम से यह नौकरी मिली है। एसएससी भर्ती भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई के हाथ यह नयी जानकारी लगी है। फिलहाल इस मामले में तफतीश जारी है।
सीबीआई ऐसे कर रही है इन नियुक्ति पत्र को अलग
सीबीआई के अधिकारी एसएससी के मुख्यालय द्वारा स्कैन किए गए हस्ताक्षरों को मूल हस्ताक्षर वाले अनुशंसाओं से अलग कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि इन स्कैन किए गए हस्ताक्षरों को जानबूझकर सर्वर में लॉकर में रखा गया था ताकि बाद में सिफारिश पत्रों पर उपयोग किया जा सके। अभियुक्तों के सामने यह सवाल है कि किसके निर्देश पर इस तरह के स्कैन कर हस्ताक्षर सर्वर में रिजर्व कर रखा गया था।
प्रभावशालियों को किया जा सकता है तलब
एसएससी भ्रष्टाचार मामले में भी पीड़ितों से भी सीबीआई ने पूछताछ कर कई नये तथ्य एकत्र किये हैं। सीबीआई सूत्रों का दावा है कि ग्रुप सी में अवैध नियुक्तियों की संख्या इतनी अधिक है कि अभी और फाइलों के खोले जाने के बाद ही सही आंकड़े सामने आएंगे। छानबीन में यह पता चला है कि स्कूल अधिकारियों पर भी मामले में राजनीतिक या प्रशासनिक प्रभाव डालने के लिए मजबूर किया गया है। सीबीआई के एक अधिकारी के मुताबिक समिति की रिपोर्ट में उद्धृत आंकड़ा मुख्य रूप से ग्रुप सी के कर्मचारियों से संबंधित था, जिसमें से सैकड़ों उम्मीदवार साक्षात्कार के लिए उपस्थित नहीं हुए। हालांकि यह आंकड़ा केवल ग्रुप सी के कर्मचारियों के लिए है, अगर ग्रुप डी के कर्मचारियों, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षकों के आंकड़ों को देखा जाए, तो निश्चित रूप से धांधली के जरिए भर्तियों की वास्तविक संख्या हजारों में होगी।
बहुत बड़ी हेराफेरी हुई है एसएससी घोटाले में
सीबीआई सूत्रों के अनुसार, नियुक्तियों का वास्तविक आंकड़ा निश्चित रूप से सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजीत कुमार बाग की अध्यक्षता वाली कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त जांच समिति के आंकड़ें से कहीं अधिक है। समिति की रिपोर्ट की भी वही आधार है जिसके तहत हाई कोर्ट ने सीबीआई को भर्ती घोटाले की जांच का आदेश दिया था। सीबीआई पिछले दिनों में स्कूल सेवा आयोग के कार्यालय की तलाशी ली है। सोमवार से पीड़ितों से मिली जानकारी के बाद दस्तावेजों को सीबीआई ने जुटाना शुरू कर दिया है। ग्रुप सी और कक्षा नवीं व दसवीं में, 3 पीड़ितों ने भर्ती में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर किया था।

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