बंगालः अगर नहीं दिया छात्र-छात्राओं का स्कूल फी तो…

  • फीस नहीं दे पाने के कारण स्कूल छात्र-छात्राओं को नहीं निकाल सकते
  • हाई कोर्ट के डिविजन बेंच ने दिया आदेश
  • इसी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी भी

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : स्कूल फीस नहीं दे पाने के कारण निजी स्कूल किसी भी छात्र-छात्रा को निकाल नहीं सकते हैं। इसके साथ ही उन्हें ऑनलाइन या फिजिकल क्लास से भी वंचित नहीं किया जा सकता है। स्कूल फीस के नाम पर उन्हें बोर्ड या स्कूल की किसी भी परीक्षा में हिस्सा लेने से रोका नहीं जा सकता है। हाई कोर्ट के जस्टिस आई पी मुखर्जी और जस्टिस मौसमी भट्टाचार्या के डिविजन बेंच ने शुक्रवार को यह आदेश दिया।
यहां गौरतलब है कि स्कूल फीस के मामले में विनीत रुइयां ने एक पीआईएल दायर कर रखी है और डिविजन बेंच इसकी सुनवायी कर रहा था। इसमें एडवोकेट ऑन रिकार्ड प्रियंका अग्रवाल ने डिविजन बेंच को बताया कि उसके एक अक्टूबर के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक एसएलपी दायर की गई है। इसकी सुनवायी सोमवार को होनी है। इसके साथ ही एडवोकेट अग्रवाल ने कहा कि स्कूल फीस नहीं देने का बहाना करते हुए स्कूल छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन क्लास में हिस्सा नहीं लेने दे रहे हैं। बोर्ड परीक्षा के एडमिट कार्ड रोक दिए जा रहे हैं। डिविजन बेंच ने अपने पूर्व के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि वह आज भी बरकरार है। किसी भी विद्यार्थी को स्कूल फीस नहीं देने के आरोप में निकाला नहीं जाए और न ही एडमिट कार्ड रोका जाए। यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए जाने वाले किसी भी आदेश पर आपेक्षित है। डिविजन बेंच ने कहा कि स्कूलों ने एफिडेविट दाखिल करके बकाया स्कूल फीस का ब्योरा दिया है जिसे रिकार्ड में रख लिया गया है। एडामॉस इंटरनेशनल स्कूल की तरफ से दाखिल एफिडेविट में कहा गया है कि उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही है और वेस्ट बंगाल कमिशन फॉर प्रोेटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन राइट्स की तरफ से चेतावनी मिली है। डिविजन बेंच ने आदेश दिया कि इस विवाद से जुड़े किसी भी मुद्दे पर कानूनी कार्रवाई करने से पहले इस कोर्ट से लीव लेनी पड़ेगी। बिड़ला ग्रुप ऑफ स्कूल्स के एडवोकेट सब्यसाची चौधरी के एक सवाल के जवाब में डिविजन बेंच ने कहा कि स्कूल अपने नियम के मुताबिक फिजिकल क्लास जारी रख सकता है। एडवोकेट प्रियंका अग्रवाल ने कहा कि एक अक्टूबर को डिविजन बेंच ने स्कूल फीस बकाये के मामले में सौ फीसदी भुगतान करने का आदेश दिया था। इसमें विवादित और गैरविवादित रकम को अलग-अलग खातों में जमा करने की बात कही गई थी। इस एसएलपी में सवाल उठाया गया है अगर रकम विवादित है तो इसे जमा करने का क्या औचित्य है। इसके अलावा इसी डिविजन बेंच ने छह अगस्त को आदेश दिया था कि बकाया स्कूल फीस का 50 फीसदी जमा किया जाए। इस अंतर्विरोध को भी एसएलपी का मुद्दा बनाया गया है।

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