और सीएनजी बसें उतारेगा एसबीएसटीसी

ईंधन की बढ़ रही कीमतों के तहत किया गया निर्णय
पर्यावरण के तहत होगी सुविधा
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाताः एसबीएसटीसी ने ईंधन बचाने के लिए नया परीक्षण शुरू किया है। इसके तहत दक्षिण बंगाल राज्य परिवहन निगम (एसबीएसटीसी) ईंधन की खपत को कम करने के लिए कई योजना का विचार लेकर आया है। दूसरे शब्दों में, कुछ डीजल, कुछ सीएनजी – बसें इन दोनों के संयोजन पर चलेंगी। इससे एक तरफ जहां लागत काफी कम होगी, वहीं पर्यावरण प्रदूषण भी कम होगा। अभी के लिए हालांकि एक बस को डीजल से ‘सीएनजी’ में बदलने की योजना है। यह काम बेलघरिया डिपो में चल रहा है। यदि वह परीक्षण में सफल हो जाता है, तो भविष्य में सार्वजनिक और निजी दोनों बसों को इस तरह से चलाने के लिए एक बड़ा निर्णय लिया जा सकता है। ऐसे में परिवहन विभाग के अधिकारियों को लगता है कि बस चलाने का खर्च काफी कम हो जाएगा और किराया बढ़ाने की मांग बार-बार नहीं उठेगी।
इसके अलावा एसबीएसटीसी की एक पुरानी बस और पश्चिम बंगाल परिवहन निगम की दो पुरानी बसों को सीएनजी में बदलने का काम चल रहा है। इस बस के इंजन को कसबा डिपो में बदला जा रहा है। परिवहन विभाग के अनुसार, डीजल से चलने वाली सामान्य बस के इंजन को सीएनजी से बदलने में लगभग 1.5 लाख रुपये का खर्च आएगा। यह काम एक निजी कंपनी के तहत किया जा रहा है। दूसरे राज्यों के लोग भी ऐसा ही कर रहे हैं।
तो क्या दोहरे ईंधन से चलेंगी बसें
यह कैसे काम करेगा? परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि बस में डुअल फ्यूल किट लगाया जाएगा। इसमें सीएनजी टैंक होगा। टैंक से पाइपलाइन के माध्यम से गैस दोहरी ईंधन किट में जाएगी। डीजल भी वहीं आएगा। एक बार दोनों का मिश्रण हो जाए तो यह इंजन तक पहुंच जाएगा। 80 फीसदी डीजल 40 फीसदी सीएनजी का मिश्रण होगा। एसबीएसटीसी की ओर से बसों को इस नए मोड में चलाने के लिए पहले से ही तैयार किया जा रहा है। वहीं, दो सीएसटीसी और एक एसबीएसटीसी बस को डीजल इंजन से डेडिकेटेड इंजन या सीएनजी में बदलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
हालांकि एसबीएसटीएस के अधिकारियों का कहना है कि ये सभी प्रायोगिक कार्य हैं। उनके शब्दों में, जिस तरह से ईंधन की कीमतें दिन-ब-दिन बढ़ रही हैं, वैकल्पिक तरीकों के बारे में सोचने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। सरकारी निगम और निजी बस मालिक सभी पीड़ित हैं। इसलिए विभिन्न तरीकों से ईंधन लागत की बचत कर वैकल्पिक तरीके से बस चलाने की योजना बनाई जा रही है। अगर यह योजना सफल रही तो इसे मंजूरी के लिए केंद्र सरकार की जांच एजेंसी के पास भेजा जाएगा। हालांकि यह वैकल्पिक तरीका पर्यावरण के अनुकूल होगा। आसनसोल-दुर्गापुर में पहले से ही एसबीएसटीसी की ओर से 60 सीएनजी से चलने वाली बसें चल रही हैं। एसबीएसटीसी के एमडी गोदाला किरणकुमार ने कहा, “ईंधन की खपत को कम करने के परिवहन विभाग के निर्देश के विकल्प के रूप में दोहरी ईंधन किट पर बसों को चलाने के लिए एक पायलट परियोजना शुरू की गई है। उन पर काम चल रहा है।” ऑल बंगाल बस मिनीबस समन्वय समिति के महासचिव राहुल चटर्जी ने कहा कि, “हम ईंधन लागत बचाने के वैकल्पिक तरीके भी चाहते हैं। इससे पब्लिक और प्राइवेट दोनों तरह के ट्रांसपोर्ट को फायदा होगा, लेकिन यह समय की बात है। उससे पहले सरकार को बस उद्योग को बचाने के लिए कुछ सोचना चाहिए।
एसबीएसटीसी परिसेवा
कुल बसें-930
सीएनजी बसें-60

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