लोहिया मातृ सेवा सदन अस्पताल में खुला सैटेलाइट फेसिल‌िटी सेंटर

समाज की सेवा के लिए मातृ सदन से अच्छी जगह नहीं- चंद्रिमा

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता: समाज की सेवा के लिए मातृ सदन से अच्छी कोई जगह नहीं है। मौजूदा कठिन परिस्थितियों में आम नागरिकों की सेवा ही सबसे बड़ा कार्य है। स्वर्गीय कन्हैया लाल लोहिया का यह अस्पताल अब लोगों की रक्षा करेगा। यह कहना है स्वास्थ्य राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य का। मंगलवार को जोड़ासांको विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत लोहिया मातृ सेवा सदन हॉस्पिटल में कोविड मरीजों के लिए सैटेलाइट हेल्थ सेंटर के उद्घाटन के मौके पर उन्होंने उक्त बातें कहीं। उद्घाटन के मौके पर मंत्री के अलावा जोड़ासांको के विधायक विवेक गुप्त, केएमसी के कमिश्नर विनोद कुमार, कन्हैया लाल लोह‌िया ट्रस्ट के प्रद्युम्न लोह‌िया, चार्नक अस्पताल के एमडी प्रशांत शर्मा, अलका लोहिया, रुचिका गुप्त, गिरीश पार्क थाना के ओसी जयंत मुखर्जी सहित अन्य गण्यमान्य लोग उपस्थित थे।
मंगलवार से कन्हैयालाल लोहिया ट्रस्ट व चार्नक हॉस्पिटल के संयुक्त प्रयास से यहां कोविड मरीजों के लिये 100 बेड की सैटेलाइट फेसिलिटी खोली गयी है। कार्यक्रम के दौरान विधायक विवेक गुप्त ने कहा कि कोविड पर‌िस्थ‌िति के मद्देनजर अभी सैटेलाइट सेंटर खोला गया है। उन्होंने कन्हैयालाल लोहिया ट्रस्ट और चार्नक अस्पताल के अधिकारियों से कोविड के बाद भी अस्पताल को चालू रखने की अपील की। वहीं कोलकाता नगर निगम के कमिश्नर विनोद कुमार ने कहा कि यह एक अच्छी शुरुआत है। सरकार और निगम हमेशा उन लोगों की मदद के लिए तैयार है। उन्होंने अस्पताल के ट्रस्टी और सहयोगी अस्पताल के अधिकारियों से अपील की कि जरूरत पड़ने पर यहां की बेडों की संख्या बढ़ायी जाए। वहीं कन्हैयालाल लोहिया ट्रस्ट के प्रद्युम्न लोहिया ने बताया कि उनके दादाजी ने उक्त ऐतिहासिक मकान को खरीदकर महिलाओं के सम्मान के लिए यहां पर मातृ सेवा सदन अस्पताल खोला था। यहां उल्लेखनीय है कि जोड़सांको के तृणमूल विधायक विवेक गुप्त की पहल पर एक बार फिर से अस्पताल खुला। विवेक गुप्त की पहल पर 2017 से बंद पड़े 296 बी/, रवींद्र सरणी स्थित प्रतिष्ठित लोहिया मातृ सेवा सदन अस्पताल को फिर से खोलने में कामयाबी हासिल की गई है। लोहिया मातृ सेवा सदन अस्पताल मंगलवार से चालू हो गया और फिलहाल कोविड संबंधित चिकित्सा सहायता चाहने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए खुला रहेगा। यहां केबिन बेड भी मौजूद हैं।
एक नजर में इतिहास
इस हॉस्पिटल की नींव कन्हैयालाल लोहिया ने 1951 में डाली थी। इसके बाद यहां अनवरत चिकित्सा परिसेवा जारी रही। लोहिया अस्पताल बचाओ कमेटी के संयोजक चंदन दे ने बताया कि किसी समय यहां 500 बेड का हॉस्पिटल हुआ करता था। उस दौरान लोगों के लिये आंख, नाक, कान, सर्जरी सहित सभी चिकित्सा परिसेवा उपलब्ध रहती थी। बाद में यह प्रसूताओं के अस्पताल पर काफी समय तक प्रतिबद्ध रहा, यहां राज्य के व‌िभिन्न हिस्सों से मरीज इलाज के लिए आते थे। हालांकि बाद में यहां 200 बेड कर दिया गया। इसके बाद आउटडोर भी बंद कर दिया गया। 2017 में इसे बंद करने की नो‌टिस लगा दी गई। चंदन दे ने कहा कि हमने लोहिया अस्पताल बचाओ कमेटी के माध्यम से इसे फिर से खुलवाने के लिए प्रयास किए। आज क्षेत्र के विधायक विवेक गुप्त की पहल पर फिर से आम लोगों को इस अस्पताल में चिकित्सा परिसेवा मिल सकेगी।

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