जो सापूरजी दहल गया था गोलियों की तड़तड़ाहट से, वहां पसरा था सन्नाटा

कोलकाता : न्यूटाउन के सापूरजी का सुखोवृष्टि कॉम्प्लेक्स गत बुधवार को गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल गया था। अपराह्न लगभग 3.30 बजे कोलकाता पुलिस के एसटीएफ ने ब्लॉक बी 153 के 1 बीएचके वाले सेकेंड फ्लोर के फ्लैट में छिपे दो खूंखार बदमाशों को एनकाउंटर में ढेर कर दिया था। जब तक यहां रहने वाले लोग कुछ समझ पाते तब तक सब कुछ हाे चुका था। ये खबर आग की तरह फैली और देखते ही देखते मीडिया से लेकर भारी संख्या में पुलिस कर्मियों की भीड़ आवासन के पास जुट गयी थी। लोग भी काफी दहशत में आ गये थे और अपने- अपने फ्लैटों से बाहर निकल गये थे। दूसरे ब्लॉक में रहने वाले लोग भी अपनी बालकनी या खिड़कियों से झांककर समझने की कोशिश कर रहे थे कि आखिर चंद मिनटों में हुआ क्या। एक तरह से पूरी तरह अफरा-तफरी वाला माहौल हो गया था।
देर रात निकाले गये खूंखारों के शव
अफरा-तफरी के माहौल के बीच पुलिस को अपनी जांच भी आगे बढ़ानी थी। ऐसे में पुलिस ने पूरे इलाके को घेर दिया। इसके बाद देर रात लगभग 1.30 बजे दोनों खूंखारों के शवों को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। एक तरह से बुधवार की देर रात तक यहां पूरी तरह दहशत और अफरा-तफरी जैसे हालात थे।
अगले दिन सुबह से ही पसरा रहा सन्नाटा
देर रात तक पुलिसिया कार्रवाई के बाद ब्लॉक बी को पूरी तरह घेरते हुए वहां भारी संख्या में पुलिस की पिकेट बैठा दी गयी। इसके बाद धीरे-धीरे माहौल कुछ शांत हुआ। वहीं गुरुवार की सुबह से ही पूरे आवासन के आस-पास सन्नाटा पसरा रहा। भारी संख्या में पुलिस की तैनाती की गयी थी। ​जिस ब्लॉक में एनकाउंटर हुआ था, वहां सीढ़ियों पर भी पुलिस की तैनाती की गयी थी। पूरे क्राइम सीन को बैरिकेड से घेर दिया गया था। मीडिया के अलावा अन्य लोगों को आस-पास जाने की अनुमति नहीं थी। जिस फ्लैट में जयपाल सिंह भुल्लर और जसप्रीत सिंह रहते थे, उस फ्लैट की खिड़कियां बंद रखी गयी थीं। दूसरे ब्लॉक में रहने वाले लोग उस फ्लैट को देखने आ रहे थे। कुछ लोग दूर से ही फ्लैट की तस्वीरें भी ले रहे थे। यहां तक कि बाइकों को भी उस ब्लॉक के पास वाले रास्ते से गुजरने नहीं दिया जा रहा था।
कोरोना नहीं होता तो हलचल भरा रहता सापूरजी में
यहां रहने वाले लोगों ने कहा कि अगर अभी कोरोना नहीं होता तो फिर पूरे सापूरजी में हलचल मची रहती। विशेषकर जिस समय एनकाउंटर हुआ वो अपराह्न लगभग 3.30 बजे का समय था और उस समय में लोग ऐसे ही काफी आना-जाना करते रहते हैं। यहां लोगों की गैदरिंग भी हमेशा ही रहती है, लेकिन चूंकि कोरोना का समय है, इस कारण उस समय अधिकतर लोग अपने – अपने घरों में वर्क फ्रॉम होम में व्यस्त थे।
लोग केवल काम से ही निकल रहे थे बाहर
गुरुवार को जहां सुबह से ही पूरे आवासन में सन्नाटा पसरा हुआ था, वहीं जिन लोगों को कुछ काम था, केवल वे ही बाहर निकल रहे थे। कोई ब्लॉक बी के सामने ही स्थित दवा दुकान में दवा खरीदने आ रहा था तो उसकी नजर भी उस फ्लैट पर पड़ ही जा रही थी। कभी कोई अपनी बालकनी से झांककर देख लेता कि आखिर हो क्या रहा है। कुल मिलाकर सापूरजी में सन्नाटे के साथ – साथ दहशत और आतंक का माहौल था।

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