‘शब्दाक्षर’ की ‘राष्ट्रीय समिति’ तथा ‘राष्ट्रीय सलाहकार समिति’ का नवीनीकरण

कोलकाता: 25 राज्यों के 180 से अधिक ज़िलों में हिन्दी भाषा तथा साहित्य के उत्थान में सेवारत प्रसिद्ध साहित्यिक संस्था ‘शब्दाक्षर’ की ‘राष्ट्रीय समिति’ तथा ‘राष्ट्रीय सलाहकार समिति’ का नवीनीकरण किया गया है, ताकि संस्था में अनवरत सक्रियता तथा गतिशीलता बनी रहे। ‘शब्दाक्षर’ की राष्ट्रीय समिति में बतौर राष्ट्रीय ‘संरक्षक’ प्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यकार डॉ प्रेम शंकर त्रिपाठी, राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि प्रताप सिंह, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सत्येन्द्र सिंह ‘सत्य’, डॉ अजय श्रीवास्तव, प्रो जीवन सिंह, राष्ट्रीय सचिव सुबोध कुमार मिश्र, राष्ट्रीय उपसचिव सागर शर्मा ‘आजाद’, राष्ट्रीय साहित्य मंत्री नीता अनामिका, राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुरेश फक्कड़, राष्ट्रीय प्रचार मंत्री अक्षय राज शर्मा, राष्ट्रीय उपप्रचार मंत्री सविता पोद्दार, राष्ट्रीय अर्थ मंत्री श्री दयाशंकर मिश्रा, राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रो डॉ रश्मि प्रियदर्शनी तथा राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी निशांत सिंह गुलशन हैं। इस समिति में बतौर राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रो डॉ रश्मि प्रियदर्शनी को भी शामिल किये जाने के उपरांत अब समिति में कुल 14 सदस्य हो गये हैं। वहीं ‘शब्दाक्षर’ की नौ-सदस्यीय ‘राष्ट्रीय सलाहकार समिति’ में ताजा टीवी के निदेशक-सह-प्रतिष्ठित समाचारपत्र ‘छपते छपते’ के प्रधान संपादक विशम्भर नेवर, कुमार सभा पुस्तकालय, कोलकाता के मंत्री महावीर बजाज, भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता के मंत्री डॉ केयूर मजमूदार, भारतीय संस्कृति संसद, कोलकाता की साहित्य मंत्री डॉ तारा दूगड़, कुमार सभा पुस्तकालय, कोलकाता के साहित्य मंत्री बंशीधर शर्मा, उत्तर प्रदेश देशवारी समाज, कोलकाता के अध्यक्ष राजेंद्र द्विवेदी, परिवार मिलन की अध्यक्ष-सह-राम मंदिर पुस्तकालय, कोलकाता की सचिव दुर्गा व्यास, बैसवारा समाज, कोलकाता के संरक्षक श्री तारक दत्त सिंह तथा बैसवारा समाज के सचिव श्री वीरेन्द्र त्रिवेदी जैसे गणमान्य लोग शामिल हैं। ‘शब्दाक्षर’ की राष्ट्रीय कार्य समिति सहित सभी प्रदेश तथा जिला समितियों के सभी पदाधिकारियों तथा सदस्यों ने संस्था के संस्थापक-सह-राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि प्रताप सिंह को शुभकामनाएंँ प्रेषित की हैं। वहीं श्री सिंह ने ‘शब्दाक्षर’ परिवार के सभी सदस्यों के प्रति आभार जताते हुए कहा कि भले ही ‘शब्दाक्षर’ का मुख्यालय कोलकाता में अवस्थित हो, किंतु इसकी प्रदेश इकाइयाँ हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार के मद्देनज़र सभी प्रादेशिक आयोजनों के लिए स्वतंत्र हैं। यही बात शब्दाक्षर के सभी जिला समितियों पर भी लागू होती हैं।

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