राज्य में कोरोना की त्रासदी के बीच महंगाई में रिकार्ड वृद्धि

  • पिछले तीन माह से थोक और खुदरा महंगाई बढ़ने से जनजीवन त्रस्त
  • घर की रसोई अब जरूरत से अधिक नियंत्रित हुयी
  • दालें, प्याज, आलू, फल, अंडा और मीट की कीमतों में इजाफा

रवि शंकर सिंह
सिलीगुड़ीः कोरोना की त्रासदी के बीच महंगाई भी रिकार्ड तोड़ रही है। बारिश के बीच जहां सब्जियों के बाजार में भाव आसमान छू रहे हैं वहीं खुदरा और थोक बाजारों में भी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भारी उछाल से आम नागरिकों को काफी परेशानी हो रही है। एक आंकड़े के मुताबिक पिछले महज 15 दिनों में थोक महंगाई दर 11.89 फीसदी पर पहुंच गयी जबकि मई के अंतिम सप्ताह में यह आंकड़ा महज 10.27 फीसदी थी। खाद्य वस्तुओं के मूल्‍य वृद्धि के कारण खुदरा महंगाई दर में भी भारी उछाल देखा गया और यह पिछले छह माह के अधिकतम स्तर 6.3 प्रतिशत पर पहुंच गयी। वहीं विशेषज्ञ बताते हैं कि देश में ईंधनों की बढ़ती कीमतों के साथ साथ राज्य में लगायी गयी कई तरह की पाबंदियां इसकी बड़ी वजह है।
वहीं सिलीगुड़ी थोक मंडी के व्यापारियों के अनुसार पिछले चार दिनों से दाल और तेल में गिरावट आयी है लेकिन खुदरा व्यवसायी अभी भी तेज दाम पर सामानों की बिक्री कर रहे हैं जो गलत है।
तीन माह से जारी है बढ़ोतरीः बाजारों में थोक मूल्य महंगाई दर में लगातार तीसरे महीने बढ़त देखी जा रही है। यह क्रम लगातार जारी है। ऐसा माना जा रहा है कि महंगाई में तेजी की मुख्य वजह पेट्रोल, डीजल, फर्नेस ऑयल के मूल्य वृद्धि के साथ साथ रेलवे माल ढुलाई में भाड़ा बढ़ना है। इन वस्तुओं के मूल्य और रेलवे माल ढुलाई में भाड़े में बढ़ोतरी पिछले वर्ष के मुकाबले कहीं ज्यादा है।
ईंधन और बिजली की मुद्रस्फीति 36.45 प्रतिशत रही जो इस वर्ष अप्रैल में महज 20.34 प्रतिशत थी। बाजार में विनिर्मित उत्पादों की मुद्रास्फीति मई में 10.11 फीसदी रही तो अब 9.02 फीसदी हो गयी है। खाने-पीने की चीजों की थोक महंगाई दर मई में मामूली कम होकर 4.51 फीसदी पर आ गयी।
सब्जी बाजार में नये आलू 26 रुपये प्रतिकिलोग्राम तथा प्याज 14 रुपये प्रतिकिलोग्राम बिक रहा है। वहीं अन्य हरी सब्जियों की कीमतों में भी भारी उछाल है। अदरख और लहसन की कीमतें भी अपेक्षाकृत बढ़ी है और बाजार में यह 160 रुपये प्रतिकिलोग्राम की दर से बिक रही है।
खाद्य पदार्थों के खुदरा मूल्य में वृद्धिः पूरे देश के साथ साथ राज्य के इस हिस्से में भी खाद्य पदार्थों की कीमतों में इजाफा हुआ है। खुदरा महंगाई दर में बढ़ोतरी भी आम लोगों के जीवन पर गहरा प्रभाव डाल रही है। बताया जाता है कि खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर 5.03 फीसदी रही। यह पिछले माह की तुलना में 1.86 फीसदी अधिक है। वहीं विशेषज्ञ बताते हैं कि यह महंगाई दर रिजर्व बैंक के संतोषजनक स्तर से ऊंची है।
ईंधनों के बढ़ते दाम खतरनाकः सिलीगुड़ी में शुक्रवार को पेट्रोल की कीमत 96.90(नार्मल) रुपये प्रतिलीटर रही जबकि डीजल 89.20 रुपये प्रतिलीटर पहुंच गया। ईंधनों की कीमतों में बढ़ोतरी को भी महंगाई से सीधे जोड़ कर देखा जा रहा है। विशेषज्ञ महंगाई बढ़ने के पीछे इसकी बड़ी वजह मानते हैं।
पाबंदियां भी महंगाई वृद्धि में सहायकः
राज्य सरकार की पाबंदियां भी महंगाई वृद्धि में सहायक साबित हो रही हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि महंगाई में तेजी सप्लाई की दिशा में आ रही दिक्कतों व लॉजिस्टिक्स की रुकावट की वजह से भी देखने को मिल रही है। बताया जाता है कि मई के अंतिम सप्ताह से लेकर 15 जून तक प्याज और आलू के मूल्य में बढ़ोतरी दर्ज की गयी। अनुमानतः इसके मूल्य में 22 फीसदी की बढ़त रही।
मुद्रास्फीति का ईएमआई पर असरः
सिलीगुड़ी के एक अर्थशास्‍त्र के प्रोफेसर उज्‍जवल सरकार ने बताया कि रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति पर विचार करते वक्त खुदरा महंगाई दर पर विशेष ध्यान देता है। इसके आधार पर ही ईएमआई की दर तय की जाती है। खुदरा महंगाई दर ज्यादा रहती है तो उसे नीचे लाने के लिए रिजर्व बैंक नीतिगत दरों में कमी नहीं करता जिससे कर्ज लेना महंगा हो जाता है।
किसमें दिखा उछालः
दालें : 13.3 %
प्याज : 23%
फलः 20.18%
अंडा और मीटः 11.19%
आलूः 15.26%
चावलः 9.2%
आटाः 8.2%
‘पिछले चार दिनों से सिलीगुड़ी की थोक मंडी में तेल और दाल की कीमतों में गिरावट आयी है। इसके बावजूद खुदरा व्यवसायी इसके दामों को कम नहीं कर रहे। अब प्रशासन को इस पर सख्त रवैया अपनाना चाहिए जिससे लोगों को उचित मूल्य पर खाद्य पदार्थ मिल सके।’
करण सिंह जैन, अध्यक्ष , सिलीगुड़ी मर्चेंट एसो‌सियेशन
‘राज्य सरकार की कोशिशों से महंगाई पर नियंत्रण का पूरा प्रयास किया जा रहा है। जल्‍द ही बाजार के भाव को नियंत्रित कर लिया जायेगा। लोगों को उचित मूल्य पर खाद्य पदार्थ उपलब्‍ध हो पायेगा और प्रशासन भी इस दिशा में सचेष्ट है।’
संजय टिबरेवाल, अध्यक्ष, सीआईआई, उत्तर बंगाल चैप्टर

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