राजनीति में आया राम गया राम कुछ नया नहीं : भाजपा

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : विधानसभा चुनाव के पहले जिस तरह तृणमूल से भाजपा में नेताओं का जाना लगा रहा, उसी तरह चुनावी नतीजों के बाद अब ‘घर वापसी’ की प्रक्रिया चालू हुई है। हालांकि ये कोई नयी बात नहीं है। देश की राजनीति हो या फिर प्रदेश की, हमेशा ऐसा होता आया है कि जब जो पार्टी अधिक ताकतवर होती है, उस ओर ही नेता जाते हैं। कई नेता सत्ता सुख के लिए राजनीति करते हैं जिनका कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं होता है। पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भाजपा से तृणमूल में जाने की होड़ शुरू हो गयी है। मंगलवार को बागदा के भाजपा विधायकविश्वजीत दास घर वापसी करते हुए वापस तृणमूल में शामिल हो गये। हालांकि भाजपा को कहीं ना कहीं पहले से इस बात का एहसास था कि राजनीति में इस तरह की बात कुछ नयी नहीं है। इस बारे में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने सन्मार्ग से कहा, ‘चुनाव से पहले काफी संख्या में लोग भाजपा से जुड़े थे और नतीजों की घोषणा के बाद कई वापस जा रहे हैं। राजनीति में ऐसा होता रहता है। 2 से 3 और ऐसे हैं जो पार्टी से दूर चल रहे हैं और समय आने पर कोई निर्णय ले सकते हैं। विशेषकर बाहर से भाजपा में आये लोगों को डराया – धमकाया जा रहा है। यूं तो 21 जुलाई की सभा में भी काफी लोगों के तृणमूल में शामिल होने की बात थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब हो सकता है कि एक दो और लोग मौका देखते हुए इधर से उधर हो, लेकिन राजनीति में ये सब होता रहता है।’

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