सौरव राजभवन क्या गये, राजनीति में आया उबाल

मधु सिंह

कोलकाता : सौरव गांगुली यानी ‘दादा’ यानी बंगाल में ऐसा चेहरा जिनके करोड़ों प्रशंसक उनके नाम पर कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहते हैं। पिछले कुछ समय में राज्य की राजनीति में आये बदलावों के बीच सौरव गांगुली का नाम भी समय – समय पर सामने आया। यह भी कयास लगाये जाने लगे कि राज्य में ‘दीदी’ का मुकाबला केवल ‘दादा’ ही कर सकते हैं। ऐसे में उनके भाजपा में जाने की अटकलों ने भी कई बार जोर पकड़ा। अब एक बार फिर सौरव गांगुली राज्य की राजनीति में चर्चा में आ गये हैं। इसका कारण है सौरव का राजभवन में जाना। वह राजभवन क्या गये, राज्य की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है। तृणमूल और भाजपा, दोनों ही खेमों में सौरव को लेकर चर्चा जोरों पर है।
रविवार को राजभवन गये थे सौरव
गत रविवार को सौरव गांगुली राजभवन पहुंचे थे जहां उन्होंने राज्यपाल जगदीप धनखड़ से मुलाकात की। लगभग एक घण्टे तक दोनों के बीच बैठक चली। इस पर राज्यपाल ने ट्वीट कर कहा कि सौरव गांगुली ने उन्हें ईडेन गार्डेन्स में आने का न्योता दिया है जिसे उन्होंने स्वीकार भी किया। वहीं सौरव गांगुली ने कहा कि वह राज्यपाल से मिलने जा ही सकते हैं, इसमें राजनीति की कोई बात नहीं है।
कोटला में शाह व सौरव ने साझा किये मंच
रविवार को राज्यपाल से मुलाकात के बाद सोमवार को कोटला मैदान पर पूर्व भाजपा नेता अरुण जेटली की मूर्ति के अनावरण के मौके पर गृह मंत्री अमित शाह व सौरव गांगुली ने मंच साझा किया। ऐसे में साैरव के राजनीति में आने की अटकलों ने और जोर पकड़ लिया है। इधर, सौरव को लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा है कि सौरव गांगुली राजनीतिक व्यक्तित्व नहीं हैं, लेकिन भाजपा में आयें तो स्वागत है।
पहले भी गांगुली के राजनीति में आने की चर्चाओं ने पकड़ा था जोर
वर्ष 2013 के अंत और 2014 की शुरुआत में भी बंगाल में अटकलें तेज थीं कि सौरव गांगुली राजनीति में शामिल हो सकते हैं। तब सौरव कमेंटेटर और क्रिकेट एक्सपर्ट के तौर पर अपना काम कर रहे थे। बाद में क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी में भी रहे, लेकिन गांगुली के बहुत करीबी लोग उस समय बार-बार कहते रहे कि ‘दादा’ राजनीति में नही आ रहे हैं, जो कि सच साबित हुई थी।
राजनीति में आएंगे तो गांगुली को क्या कुछ छोड़ना पड़ेगा?
फिलहाल गांगुली के पास लगभग 30 से भी ज्यादा ब्रांड हैं। कुल मिलाकर गांगुली की कमाई करीब 90 करोड़ रुपये सालाना है। अगर वे बंगाल की राजनीति में भाजपा का मुख्य चेहरा बनते हैं तो उन्हें 5 वर्षों में 450 करोड़ रुपये की कमाई को छोड़कर यहां शामिल होना होगा। हालांकि, जो लोग सौरव गांगुली को करीब से जानते हैं उनका मानना है कि निजी जिंदगी में वो सरल जिंदगी जीते हैं। समाज के लिए वह काम करना चाहते हैं। इसका उदाहरण कोरोना काल में भी देखा गया था, जब गरीब लोगों को 50 लाख रुपये का चावल बांटने के लिए ‘दादा’ भारत सेवाश्रम संघ पहुंचे थे।
सौरव गांगुली ने जैसे कभी हां नहीं कहा, वैसे ही कभी ना भी नहीं कहा है। जब तक वे राजनीति में आने को लेकर ना कहते रहेंगे, उनके हर मूव को स्कैन किया जाएगा। ऐसे ही वो जब राज्यपाल या राजनेताओं से मिलेंगे अटकलें तेज होती रहेंगी।

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