साबित हुआ कि भाजपा के नियंत्रण में नहीं है चुनाव आयोग : शुभेंदु अधिकारी

चुनाव आयोग को बनाना होगा चुनाव के अनुकूल माहौल
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्य में भवानीपुर समेत 3 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा की गयी है। इस पर विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हमने हमेशा कहा है कि कोविड की स्थिति सुधरने के बाद उपचुनाव व सभी सीटों पर चुनाव एक साथ कराये जाएं। हमें नहीं पता कि एक सीट पर उपचुनाव और दो सीटों पर चुनाव कराना कितना सटीक निर्णय है, वह भी ऐसे समय में जब महामारी अब भी जारी है और तीसरी लहर की आशंका भी है। हम अपने चुनाव प्रचार में इस मुद्दे को उठायेंगे, हालांकि हम चुनाव आयोग के निर्णय को स्वीकार करते हैं। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से ये भी साबित होता है कि चुनाव आयोग भाजपा के नियंत्रण में नहीं है और इस संबंध में तृणमूल के सभी आरोप झूठे हैं। इसी तरह प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने आश्चर्य जताया कि क्यों राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव पिछले एक साल से लंबित पड़े हैं जबकि ऐसे समय में उपचुनाव कराये जा रहे हैं जब तृणमूल पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में है। दिलीप घोष ने कहा कि भाजपा ने पहले निकाय चुनाव चाहा था, लेकिन जब भी चुनाव हो, भाजपा लड़ने के लिए तैयार है। इसके साथ ही दिलीप घोष ने कहा, ‘राज्य में 5 सीटों पर उपचुनाव होने की बात थी, लेकिन उनमें से एकमात्र भवानीपुर में ही क्यों उपचुनाव होगा ? कहीं चुनाव आयोग किसी तरह प्रभावित तो नहीं है ?’ एक ओर दिलीप घोष ने इस तरह आयोग के निर्णय पर सवाल उठाया तो वहीं भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने इस निर्णय का स्वागत जताया है। हालांकि प्रदेश भाजपा क्यों क्षुब्ध है ? भाजपा सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के नेता चाहते थे कि ममता सरकार को दबाव में रखा जाए और सांवैधानिक नियमों के अनुसार, 5 नवम्बर तक ममता बनर्जी को विधायक बनना होगा।
माकपा ने उठाया सवाल तो कांग्रेस ने जताया स्वागत
माकपा की केंद्रीय कमेटी के सदस्य सुजन चक्रवर्ती ने सांवैधानिक तौर पर उपचुनाव की घोषणा का स्वागत जताया। हालांकि उन्होंने सवाल उठाया कि केवल भवानीपुर और दो सीटें ही क्यों ? अन्य सीटों पर चुनाव व अन्य राज्यों में उपचुनाव क्यों नहीं कराये जा रहे हैं ? उन्होंने कहा ​कि 34 वर्षों के वाम शासन में समय पर पालिका व निगम चुनाव होते थे जबकि तृणमूल के शासन में 2 वर्षों से अधिक समय से विभिन्न पालिकाओं के चुनाव लंबित हैं। वहीं कांग्रेस के सांसद प्रदीप भट्टाचार्य ने इस निर्णय का स्वागत जताते हुए कहा कि ये चुनाव आयोग का स्वागत योग्य कदम है क्योंकि 6 महीने के अंदर उपचुनाव कराना सांवैधानिक रूप से आवश्यक था।

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