पूजा में आयी राजनीतिक थीम, विवादों में घिरी पूजा कमेटी

शुभेंदु ने कहा, चप्पलों से बना पण्डाल स्वीकार नहीं
कानूनी नोटिस का जवाब नोटिस से ही दिया जाएगा : दमदम पार्क
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : इस बार दुर्गा पूजा में किसान आंदोलन से लेकर एनआरसी जैसे राजनीतिक थीम देखने को मिल रहे हैं। इसी तरह राजनीतिक थीम का इस्तेमाल कर अब दमदम पार्क भारत चक्र दुर्गा पूजा कमेटी विवादों में घिर गयी है। पूजा कमेटी को कानूनी नोटिस दी गयी है। दरअसल, पूजा पण्डाल को किसान आंदोलन पर आधारित कर बनाया गया है। कई चप्पलाें को किनारों पर रखा गया है, यह दर्शाने के लिए कि किस तरह किसान आंदोलन के बाद किसानों की चप्पलें भागने में छूट जाती हैं। इन चप्पलों के इस्तेमाल को लेकर ही विवाद की शुरुआत हुई है।
षष्ठी तक पण्डाल से हटायें चप्पलों को
इसे लेकर वरिष्ठ भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा, ‘किसी भी हाल में चप्पलों से बने पूजा पण्डाल को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।’ उन्होंने ट्वीट किया, ‘दमदम पार्क में एक दुर्गा पूजा पण्डाल को चप्पलों से सजाया गया है। कलाकारी स्वाधीनता के नाम पर मां दुर्गा का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।’ पण्डाल में चप्पलों की प्रदर्शनी बंद करने के लिए उस ट्वीट में ही मुख्य सचिव व राज्य के गृह सचिव के हस्तक्षेप की मांग शुभेंदु ने की। उन्होंने लिखा, ‘मुख्य व गृह सचिव से अपील है कि वे इस मसले पर हस्तक्षेप करें और आयोजकों को षष्ठी के पहले पण्डाल से चप्पलें हटाने के लिए बाध्य करें।’
कानूनी नोटिस का जवाब नोटिस से
दमदम पार्क भारत चक्र पूजा कमेटी की ओर से बताया गया कि कानूनी नोटिस का जवाब नोटिस से ही दिया जाएगा। चप्पलों से बने पण्डाल को लेकर विवाद को लेकर दमदम पार्क भारत चक्र पूजा कमेटी के संयुक्त सचिव शैबाल बसु ने कहा, ‘इस विवाद से पूजा का कोई संपर्क नहीं है। मंदिर के अंदर का थीम पूरी तरह से अलग है।’ पूजा कमेटी के सचिव प्रतीक चौधरी ने कहा, ‘हमारा थीम धान देबो ना, मान देबो ना है। इसके साथ ही किसान आंदोलन की बात हमने सामने लानी चाही। आंदोलन के समय हजारों किसान सड़क पर उतरकर विक्षोभ दिखाते हैं, पुलिस बैरिकेड कर उन्हें रोकती है। पैरों की चप्पलें यूं ही रखकर किसानों को हट जाना पड़ता है। मंदिर में घुसने के समय जूते खोलकर ही हम अंदर जाते हैं। हमारे पण्डाल में आने पर देख सकेंगे कि देवी धानखेत के ऊपर बैठी हैं। पूरी तरह गलत व्याख्या कर इसे लेकर विवाद किया जा रहा है।’
इस बार पूजा पण्डालाें में राजनीतिक थीम भी
वर्ष 2017 की दुर्गा पूजा में नोटबंदी शहर के दो पूजा पण्डालों की थीम थी। गत वर्ष 3 पूजा पण्डालों में प्रवासी श्रमिकों की दशा दिखायी गयी थी। इस साल दो पूजा पण्डाल एक बार फिर राजनीतिक मुद्दों के साथ सामने आये हैं, इनमें एक किसान आंदोलन तो दूसरा एनआरसी है। कलाकारों का मानना है कि देश में कुछ समस्या होने पर कलाकार यूं ही मूक दर्शक नहीं बने रह सकते हैं। दमदम पार्क भारत चक्र के पूजा पण्डाल में किसानों का आंदोलन दर्शाया गया है। इसके साथ ही गत सप्ताह लखीमपुर हादसे को भी दिखाया गया जहां आंदोलनरत किसानों को वाहन द्वारा कुचल दिया गया था। वहीं बेहला के बरिशा क्लब में मां दुर्गा को प्रवासी श्रमिक के तौर पर दर्शाया गया है जो अपने बच्चों के साथ राहत के लिए इंतजार कर रही हैं। कलाकार ने शरणार्थियों की दशा पण्डाल के माध्यम से दर्शाने की कोशिश की है जो इस वक्त काफी अनिश्चियता में हैं एनआरसी के कारण। ऐसे में इस बार भी राजनीति की छाप पूजा पण्डालों पर स्पष्ट है।

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