राज्य में कई बार जानलेवा बनी है जहरीली शराब

अब तक सैकड़ों लोगों की जा चुकी है जान
जहरीली शराब पीने से होने वाली सबसे अधिक मौतों में है पश्चिम बंगाल का नाम
2006 से 2015 तक इन पांच राज्यों में हुई सबसे ज्यादा मौतें
तमिलनाडु – 1456
कर्नाटक – 1373
पंजाब – 1219
प. बंगाल – 1076
गुजरात – 821
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : हावड़ा में जहरीली शराब पीकर 11 से अधिक लोगों की मौत हो गयी। हालांकि जहरीली शराब पीने से मौत की घटना राज्य में कोई नयी नहीं है। इससे पहले भी जहरीली शराब लोगों के लिए जानलेवा बन चुकी है। इसके बावजूद ऐसी जहरीली शराब बनाने वालों पर बहुत कम समय के लिए प्रशासन का डण्डा चलता है, लोग भी ऐसे हैं जो शराब पीने से बाज नहीं आते हैं। इस तरह की घटना घटने पर मुआवजा देकर खानापूर्ति तो की जाती है, लेकिन असल जगह पर हथौड़ा क्यों नहीं चलाया जाता, इस पर सवालिया निशान है।
बर्दवान से लेकर हावड़ा और द. 24 परगना तक फैला है मकड़जाल
जहरीली शराब का यह मकड़जाल किसी एक इलाके तक सीमित नहीं है बल्कि राज्य के एक छोर से दूसरे छोर तक फैला हुआ है। बर्दवान, हावड़ा से लेकर दक्षिण 24 परगना में इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। गत 8 जुलाई को पूर्व बर्दवान जिले के बर्दवान में सर्वमंगला पाड़ा में जहरीली शराब पीकर 4 लोगों की मौत हुई थी और 17 लोग अस्पताल में भर्ती हुए थे। पूरे इलाके में इस घटना ने आतंक का माहौल पैदा कर दिया था। वर्ष 1998 में हावड़ा के लिलुआ में विवेक नगर में जहरीली शराब पीकर लाेगों की मौत हो गयी थी और 100 से अधिक लोग बीमार होकर हावड़ा व कोलकाता के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हुए थेे। व्यवसायी सत्या सिंह को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। वहीं उसे सहयोग करने में सक्रिय भूमिका निभाने वाले माकपा के दिग्गज नेता को तत्कालीन प्रदेश सचिव अनिल विश्वास ने पार्टी से बहिष्कृत कर दिया था। वर्ष 2011 के 13 दिसम्बर को उस्थी समेत आस-पास के विस्तृत इलाके में जहरीली शराब पीने से 172 लोगों की मौत हो गयी थी जो संग्रामपुर जहरीली शराब काण्ड के तौर पर परिचित है। इस घटना में मगराहाट और उस्थी थाना में दो अलग मामले दायर किये गये थे। राज्य सरकार इस जहरीले शराब काण्ड की जांच की जिम्मेदारी सीआईडी के जिम्मे सौंपी थी। जांच में पता चला था कि जिस शराब के पीने से लोगों की मौत हुई थी, उस जहरीली शराब को बनाने के लिए कुख्यात डॉन नूर इस्लाम उर्फ फकीर उर्फ खोड़ा बादशा शामिल था। उस समय मृतकों के परिवारों को 2 लाख रुपये का आर्थिक अनुदान दिया गया था। इसे लेकर भी काफी राजनीतिक विवाद हुआ था। वर्ष 2018 के नवम्बर महीने में नदिया जिले के शांतिपुर में कम से कम 7 लोगों की माैत जहरीली शराब पीने से हो गयी थी।
शराब की सबसे अधिक खपत होती है पश्चिम बंगाल में
शराब की खपत के मामलों में पश्चिम बंगाल सबसे आगे है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में लगभग 1.4 करोड़ लोग शराब की खपत करते हैं। पश्चिम बंगाल के बाद इसमें उत्तर प्रदेश का स्थान आता है जबकि उत्तर प्रदेश की जनसंख्या दोगुनी है।
राज्य के पास आंकड़े ही नहीं, कितने लोगों की हुई मौत
जहरीली शराब पीकर अब तक कितने लोगों की मौत हुई है, इसका कोई आंकड़ा राज्य के पास नहीं है। सोशियो – लीगल रिसर्चर व आरटीआई कार्यकर्ता विश्वनाथ गोस्वामी कहते हैं कि इस मुद्दे पर कई बार उन्होंने आरटीआई की, लेकिन कभी कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने पश्चिम बंगाल में वर्ष 2011 से 2021 के बीच सालाना और जिला आधारित ब्रेक अप के बारे में भी जानना चाहा था ​जिससे राज्य में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के आंकड़ों का पता चल सके।
कई आरटीआई के बावजूद कोई जवाब नहीं
आरटीआई में उक्त मामलों में चार्जशीट का ब्योरा, रिहाई और सजा के बारे में भी पूछा गया था। विश्वनाथ गोस्वामी की आरटीआई का जवाब दिया गया कि ​डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस रैंक के स्टेट पब्लिक इनफाॅर्मेशन ऑफिसर ने 29 जनवरी 2021 को राज्य के एक्साइज निदेशालय को मामला भेजा था और कहा था कि इस विभाग के पास कोई सूचना नहीं है। बाद में एक्साइज निदेशालय ने भी किसी तरह की जानकारी होने की बात से इनकार कर दिया था। गत 8 अगस्त 2021 को दिये गये जवाब में कहा गया था, ‘एक्साइज निदेशालय अथवा सहायक कार्यालयों की ओर से ऐसा कोई मामला हैंडल नहीं किया जाता जिसमें जहरीली शराब पीने केे कारण किसी व्यक्ति की मौत का जिक्र हो। कई बार याद दिलाने के बावजूद राज्य पुलिस और पश्चिम बंगाल एक्साइज विभाग ने इस संबंध में किसी तरह की सूचना की बात से इनकार कर दिया।’
एनसीआरबी को भी नहीं भेजे गये आंकड़े
अन्य राज्य ​जहां इस तरह की घटनाओं में मौत होने के आंकड़े नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो को भेजते हैं, वहीं पश्चिम बंगाल की ओर से गत 2 वर्षों से इस पर कोई आंकड़ा नहीं भेजा गया है। गोस्वामी ने कहा, ‘शराब संबंधी मौतों को अन्य श्रेणियों की मौत के तौर पर एनसीआरबी द्वारा चिह्नित किया जाता है।’
क्या कहती है केंद्र सरकार की रिपोर्ट
भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के राष्ट्रीय ड्रग सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर 10 से 75 वर्ष आयु वर्ग के 27.3 लोग शराब का सेवन करते हैं। इनमें 43% लोग एकल अवसर पर औसतन चार से अधिक मादक पेय पदार्थों का सेवन करते हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, दिन के समय शराब की खपत लगभग 21% है। वहीं शराब के नशे के कारण 26% मामले मारपीट के और 4% मामले सड़क दुर्घटना के सामने आये थे। देश में 10 से 17 वर्ष आयु वर्ग समेत सभी आयु वर्ग के लोग शराब पीते हैं। शराब पीनेवालों में पुरुषों का प्रतिशत (27.3 प्रतिशत) महिलाओं (1.6 प्रतिशत) से बहुत ज्यादा है।

शेयर करें

मुख्य समाचार

राम अवतार गुप्त प्रोत्साहन, ऐसे करें आवेदन

" हमारा सपना हर छात्र माने हिंदी को अपना" हर साल की तरह इस साल भी हम लेकर आये हैं राम अवतार गुप्त प्रोत्साहन। इस बार आगे पढ़ें »

घर में लड़ाई-झगड़ा खत्म करने के लिए करें ये 5 उपाय, मिलेगी शांति

कोलकाता : आज के समय अधिकतर घरों में ग्रह कलह या लड़ाई झगड़े होना आम बात हो गई है। घरों होने वाले यह इन झगड़ों आगे पढ़ें »

ऊपर