एक भारत, श्रेष्ठ भारत की प्रेरणास्थली रहा है बंगाल – मोदी

आंतकवाद फैलाने वालों में हाइली स्किल लोग भी शामिल
किसानों और शिल्पकारों के लिए वैश्विक बाजार उपलब्ध करायें विश्वभारती के छात्र
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता/विश्व भारती : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को विश्वभारती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विश्वभारती के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर और विश्वभारती विश्वविद्यालय के महत्व को लेकर बात की। पीएम मोदी ने कहा कि बंगाल ने अतीत में भारत के समृद्ध ज्ञान-विज्ञान को आगे बढ़ाने में देश को नेतृत्व दिया। उन्होंने कहा कि बंगाल, एक भारत, श्रेष्ठ भारत की प्रेरणा स्थली भी रहा है और कर्मस्थली भी रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में विश्वभारती विश्वविद्यालय को देश के शिक्षा संस्थाओं का नेतृत्व करना चाहिए। इस दौरान उन्होंने बंगाल के महत्व पर भी बात की। प्रधानमंत्री ने विश्वभारती विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक व प्रेरणादायी विरासत का उल्लेख करते हुए यहां के छात्रों से विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों के किसानों और शिल्पकारों के उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार उपलब्ध कराने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के लिए विश्वभारती सिर्फ ज्ञान देने वाली एक संस्था नहीं है बल्कि भारतीय संस्कृति के शीर्षस्थ लक्ष्य तक पहुंचने का माध्यम भी है।
विश्वभारती को शिक्षा संस्थाओं का नेतृत्व सौंपने का संकल्पअपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि जो मानवता, जो आत्मीयता, जो विश्व कल्याण की भावना हमारे रक्त के कण-कण में है, उसका एहसास बाकी देशों को कराने के लिए विश्वभारती को देश की शिक्षा संस्थाओं का नेतृत्व करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मेरा आग्रह है, अगले 25 वर्षों के लिए विश्व भारती के विद्यार्थी मिलकर एक विजन डॉक्यूमेंट बनाएं। वर्ष 2047 में जब भारत अपनी आजादी के 100 वर्ष का समारोह बनाएगा, तब तक विश्वभारती के 25 सबसे बड़े लक्ष्य क्या होंगे, ये इस विजन डॉक्यूमेंट में रखे जा सकते हैं।
ज्ञान का समंदर है विश्वभारती
देश के सबसे पुराने केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शुमार विश्वभारती के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह नामचीन विश्वविद्यालय अपने आप में ज्ञान का वो उन्मुक्त समंदर है जिसकी नींव ही अनुभव आधारित शिक्षा के लिए रखी गयी। उन्होंने कहा, ‘मैं इस प्रेरणादायी विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों से आग्रह करता हूं कि वे इस संस्था द्वारा गोद लिए गए गांवों के किसानों और शिल्पकारों के उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार उपलब्ध कराएं। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण की दिशा में एक कदम होगा।’
सत्ता में रहते हुए संयम बरतना जरूरी
प्रधानमंत्री ने कहा कि ज्ञान और रचनात्मकता की कोई सीमा नहीं होती और ये हमेशा याद रखना चाहिए कि ज्ञान, विचार और कौशल, स्थिर नहीं है बल्कि ये सतत चलने वाली प्रक्रिया है। उन्होंने कहा, ‘इसमें सुधार की गुंजाइश भी हमेशा रहेगी, लेकिन ज्ञान और शक्ति जिम्मेदारी के साथ आती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ज्ञान सिर्फ व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि समाज और देश की धरोहर होती है और जिस प्रकार सत्ता में रहते हुए संयम और संवेदनशील रहना पड़ता है, उसी प्रकार हर विद्वान को भी जिम्मेदार रहना पड़ता है।
नीयत साफ है तो समाधान भी मिलेगा
छात्रों को झकझोरने की कोशिश के तहत उन्होंने कहा कि उनका ज्ञान और कौशल एक समाज और देश को गौरवान्वित भी कर सकता है तो वह समाज को बदनामी और बर्बादी के अंधकार में भी धकेल सकती है। इतिहास और वर्तमान में ऐसे उदाहरणों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘जो दुनिया में आतंक फैला रहे हैं, जो दुनिया में हिंसा फैला रहे हैं, उनमें भी कई उच्च शिक्षा और कौशल वाले लोग हैं। दूसरी तरफ ऐसे भी लोग हैं जो कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से दुनिया को मुक्ति दिलाने के लिए दिन-रात प्रयोगशालाओं में जुटे हुए हैं।’ उन्होंने कहा कि अगर नीयत साफ है और निष्ठा मां भारती के प्रति है तो हर निर्णय किसी ना किसी समाधान की तरफ ही बढ़ेगा। उन्होंने कहा, ‘सफलता और असफलता हमारा वर्तमान और भविष्य तय नहीं करती। हो सकता है आपको किसी फैसले के बाद जैसा सोचा था वैसा परिणाम न मिले, लेकिन आपको फैसला लेने में डरना नहीं चाहिए।’’गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर को किया याद
विश्वभारती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने जो अद्भुत धरोहर मां भारती को सौंपी है, उसका हिस्सा बनना, आप सभी साथियों से जुड़ना, मेरे लिए प्रेरक भी है और आनंददायक भी है।

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