‘ड्रेनेज सिस्टम’ को कैद कर रहा प्लास्टिक का जिन्न

जलजमाव के बड़े कारणों में से एक है नालियों में फंसे प्लास्टिक
प्लास्टिक पर पूर्ण पाबंदी कब !
प्लास्टिक कचरा के आंकड़े
देश में 35 लाख टन (प्रति वर्ष)
बंगाल में प्रति नगरपा​लिका में 1645 टन (रोजाना)
इन शहरों में रोज निकलता है प्लास्टिक वेस्ट
दिल्ली : 689.8 टन
कोलकाता : 429.5 टन
चेन्नई : 429.4 टन
मुंबई : 427.1 टन
सोनू ओझा
कोलकाता : मॉनसून का सीजन और सड़कों पर जलजमाव की समस्या। छोटे-बड़े हर शहर में यह तस्वीर लगभग एक समान ही दिखती है। समस्या आम जनता को उठानी पड़ती है, सवालों के घेरे में प्रशासन को लिया जाता है। गौर से सोचें तो हम-आप जैसों की जरा सी लापरवाही और गलती की वजह से जलजमाव को बढ़ावा दिया जा रहा है।देखने में जितनी छोटी लगती है यह समस्या असल में बहुत बड़ा खतरा है। यह खतरा किसी और से नहीं बल्कि प्लास्टिक से है जो जिन्न की तरह शहर के ड्रेनेज सिस्टम को कैद किये हुए है। प्लास्टिक को हटाने के लिए कोशिशें तो तमाम की जाती हैं लेकिन परिणाम शून्य के रूप में हाथ लगता है। आज प्लास्टिक का कचरा शहर की नालियों में इस कदर बह रहा है कि बारिश का पानी चाह कर भी बह नहीं पाता और चंद समय में पूरा का पूरा इलाका पानी-पानी हो जाता है।
दिल्ली के बाद कोलकाता में सबसे ज्यादा प्लास्टिक का कचरा
प्लास्टिक के कचरे की बात करें तो कोलकाता पूरे देश में दूसरे नंबर पर है तथा दिल्ली पहले पायदान पर है। विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार कोलकाता के बाद
चेन्नई फिर मुंबई हैं। पर्यावरण से जुड़ी संस्था के लिए काम करने वाले अजय मित्तल ने बताया कि कोलकाता की सबसे बड़ी समस्या पैकेजिंग मैटेरियल है जिसे लोग बड़ी आसानी से यहां-वहां फेंक देते है। हमारी टीम कोलकाता में भी जल्द इससे जुड़े अवेयरनेस कार्यक्रम की शुरुआत करेगा क्योंकि ड्रेनेज सिस्टम को बिगाड़ने में प्लास्टिक की अहम भूमिका है।
300 साल पुराना कोलकाता झेल रहा प्लास्टिक का खतरा
कोलकाता करीब 300 साल पुराना शहर है, यहां की ड्रेनेज सिस्टम भी अति आधुनिक नहीं है इसलिए कुछ घंटों की तेज बारिश कोलकाता की सड़कों को पानी तले ढक देती है। इसमें एक बड़ा कारण प्लास्टिक भी है जिसे इस्तेमाल कर जहां-तहां फेंक दिया जाता है और वह ड्रेन में जाकर फंस जाता है।
दिनों-दिन बढ़ रहा प्लास्टिक का उपयोग
सेंटर फार साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) ने हाल ही जो आंकड़ों पेश किये हैं उसके अनुसार देशभर में प्लास्टिक का उपयोग पिछले 30 साल में 20 गुना बढ़ा है जिसमें 60 प्रतिशत प्लास्टिक सिंगल यूज वाले हैं। सिंगल यूज प्लास्टिक देखने में जितना थीन लगता है, ड्रेनेज के लिए वह उतना बड़ा खतरा है।
कोलकाता में लगेगी प्लास्टिक पर पाबंदी : फिरहाद
कोलकाता में 75 माइक्रोन से नीचे प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगायी जाएगी। प्लास्टिक की बोतल, थर्मोकोल और लेमिनेटेड प्लास्टिक पैकेट ड्रेन में फंस कर ​निकासी व्यवस्था को प्रभावित करते हैं, इसलिए लोगों को सचेत होना होगा कि वे जहां-तहां इन्हें न फेंके। इसके लिए अब सरकार मुहिम चलाएगी व लोगों से अपील करेगी कि चिप्स, बिस्किट समेत बाकी पैकेजिंग प्लास्टिक को सड़क पर खुले में न फेंके।

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