पूजा वैकेशन के बाद शुरू हो सकती है फिजिकल हियरिंग

हांलाकि हाइब्रीड मोड में भी चल रही है बहस
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : हाई कोर्ट में पूजा वैकेशन के बाद शुरू हो सकती है फिजिकल हियरिंग। इन दिनों हाइब्रिड हियरिंग चल रही है। यानी इसमें एक पक्ष कोर्ट में मौजूद रहता है तो दूसरा पक्ष वर्चुवल मोड में अपनी दलील पेश करता है। इससे पहले तो सारी सुनवायी वर्चुवल मोड में ही हो रही थी। यहां गौरतलब है कि फिजिकल हियरिंग की दिशा में नये एडवोकेट जनरल ने एक शानदार पहल की है। वे प्रत्येक सुनवायी में फिजिकली हिस्सा ले रहे हैं।
हाई कोर्ट की पहल के बावजूद फिजिकल हिय‌िरिंग की शुरुवात कई मुद्दों पर निर्भर करती है। इसमें बहुत बड़ी भूमिका, या यूं कह लें पूरी भूमिका ही राज्य सरकार को निभानी है। मसलन लोकल ट्रेनों की सामान्य सेवा अभी भी शुरू नहीं हो पायी है। राज्य सरकार ने 30 अक्टूबर तक की पाबंदी लगा रखी है। अब देखना है कि सरकार इसे समाप्त करती है या आगे बढ़ाती है। लोकल ट्रेनों की सामान्य सेवा शुरू नहीं होने के कारण दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले एडवोकेट कोर्ट नहीं आ पाते हैं। इसके अलावा रोजमर्रा के जीवन में भी सरकार ने कुछ पाबंदी लगा रखी है। अब देखना है कि सरकार इसे वापस लेती है या नहीं। इसके अलावा सबसे बड़ा सवाल है कोबिड 19 की बहुचर्चित तीसरी लहर का, फिजिकल हियरिंग की शुरुवात इसके आने या न आने पर भी निर्भर करती है। बहरहाल डेढ़ साल से भी अधिक समय हो गया और हाई कोर्ट में सामान्य सुनवायी शुरू नहीं हो पायी है। इसका खामियाजा सबसे अधिक उन एडवोकेटों को चुकाना पड़ा है जो दूरदराज क्षेत्रों से आते हैं। जूनियर एडवोकेटों ने तो कोबिड के कारण होने वाले लॉकडाउन की भारी कीमत चुकायी है। हाई कोर्ट के 150 साल से भी अधिक के इतिहास में यह पहला मौका है जब वर्चुवल और हाइब्रिड हियरिंग के जरिए मामलों की सुनवायी शुरू हुई है। बुनियादी ढांचे के अभाव के कारण शुरुवाती दौर में बेहद मुश्किलों का सामना करना पड़ा था पर फिलहाल स्थिति में कुछ सुधार हुआ है। कई बार तो ऐसा मौका आया जब पूर्व चीफ जस्टिस राधाकृष्णन को लिंक नहीं होने के कारण सुनवायी टालनी पड़ी थी। पर मामलों की सुनवायी में फिजिकल हियरिंग की जो भूमिका है उसे नकारा नहीं जा सकता है। जैसे अपिलेट साइड के एक मामले की सुनवायी को पूर्व चीफ जस्टिस राधाकृष्णन ने यह कहते हुए टाल दिया था कि इसकी सुनवायी न्यायोचित तरीके से फिजिकल हियरिंग में ही की जा सकती है। इसके अलावा स्कूल फीस के बहुचर्चित मामले की सुनवायी करते हुए जस्टिस संजीव बनर्जी ने कहा था कि इतने संजीदा मामले की सुनवायी फिजिकल हियरिंग में ही मुमकिन है। बहरहाल अब एडवोकेटों को पूजा वैकेशन के बीतने और कोबिड के तीसरी लहर की आशंका के बेबुनियाद होने का इंतजार है।

शेयर करें

मुख्य समाचार

राम अवतार गुप्त प्रोत्साहन, ऐसे करें आवेदन

" हमारा सपना हर छात्र माने हिंदी को अपना" हर साल की तरह इस साल भी हम लेकर आये हैं राम अवतार गुप्त प्रोत्साहन। इस बार आगे पढ़ें »

आज का हेल्थ टिप्स: बेहद पौष्टिक आहार है दलिया, जानिए क्या हैं इसे खाने के फायदे?

कोलकाता : भारतीय व्यंजनों को कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ से परिपूर्ण माना जाता रहा है। दलिया, ऐसा ही एक आहार है, जिसे डॉक्टर पेट आगे पढ़ें »

ऊपर