लोग पूछ रहे सवाल, आखिर क्यों टैक्सियों के मीटर हो गये हैं ‘डाउन’

मधु सिंह

कोलकाता : अब केवल दिखावे के लिए रह गये हैं टैक्सियों के मीटर। टैक्सी वाले चुकता किराया वसूल रहे हैं यानी जहां जाना है, उसका किराया पहले से ही बता दे रहे हैं। जैसे कि अगर शोभाबाजार से बेलगछिया जाना है तो पहले ही कोई 200 रुपये ताे कोई 150 रुपये किराया बता दे रहा है। ऐसे में अब लोग पूछ रहे हैं कि आखिर क्यों टैक्सियों के मीटर ‘डाउन’ हो गये हैं। इसका कारण पूछने पर टैक्सियों के ड्राइवर कहते हैं कि डीजल का दाम इतना बढ़ गया है जिस कारण वाहन मेंटेनेंस खर्च भी काफी अधिक बढ़ गया है।
सन्मार्ग की टीम ने लिया जायजा
टैक्सियों के मीटर ‘डाउन’ होने की कई तरह की शिकायतें मिलने के बाद सन्मार्ग की टीम ने खुद इसका जायजा लिया। एमजी रोड से मौलाली जाने के लिए पूछे जाने पर पहले तो कई टैक्सियों ने साफ इनकार कर दिया। कुछ टैक्सी ड्राइवर राजी भी हुए तो कोई 200 रुपये तो कोई 150 रुपये किराया मांग रहा था। एक टैक्सी ड्राइवर ने 100 रुपये कहा, जब उससे पूछा गया कि मीटर से क्यों नहीं जाएंगे तो कहा कि उसके लिए 20 रुपये अधिक देने होंगे। आखिरकार 80 रुपये में मामला तय हुआ और एक टैक्सी के लिए इंतजार करना पड़ा लगभग आधे घण्टे से अधिक। वापसी में भी कुछ ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा।
यात्रियों को भी हो रही है परेशानी
टैक्सी ड्राइवरों के इस तरह मीटर डाउन कर मनमाना किराया वसूले जाने के कारण यात्रियों कोे भी काफी परेशानी हो रही है। सियालदह से एमजी रोड क्रासिंग जाने के लिए टैक्सी का इंतजार कर रहे यात्री स्नेहा सिंह ने कहा, ‘आजकल टैक्सियों को लेकर इतनी परेशानी होती है कि इस कारण ही ऐप कैब लोग अधिक लेते हैं। हालांकि ऐप कैब भी आजकल काफी कैंसल करते हैं जिस कारण टैक्सी लेना चाहती हूं तो टैक्सी वाले भी मनमाना किराया वसूलते हैं।’ इसी तरह एक और यात्री जया मिश्रा ने बताया कि काफी देर से टैक्सी का इंतजार कर रही हूं, लेकिन बेलगछिया से एस्प्लानेड जाने के लिए ही टैक्सी वाले 300 रुपये तक मांग रहे हैं।
क्या कहना है टैक्सी यूनियन का
एटक समर्थित वेस्ट बंगाल टैक्सी ऑपरेटर्स कोऑर्डिनेशन कमेटी के संयोजक नवल किशोर श्रीवास्तव ने सन्मार्ग कोे बताया, ‘राज्य सरकार से कई बार आवेदन के बावजूद किराया नहीं बढ़ाया गया जिस कारण टैक्सी ड्राइवर और यात्री दोनों ही मजबूर हैं। अनाधिकारिक तौर पर बस हो या ऑटो अथवा टैक्सी, सभी लोग अधिक किराया ही ले रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद राज्य सरकार आधिकारिक तौर पर इसकी घोषणा नहीं कर रही है। जिस प्रकार डीजल के दाम बढ़े हैं, ऐसे में अधिक किराये के बगैर टैक्सी चलाना संभव नहीं है।’
ऑटो वाले भी वसूल रहे मनमाना किराया
ना केवल टैक्सियां बल्कि ऑटो वाले भी मनमाना किराया वसूल रहे हैं। शहर के विभिन्न रूटों पर ऑटो किराया बढ़ा दिया गया है। गत 1 अक्टूबर को 58.21 रु. प्रति लीटर के बाद गैस की कीमतों में कोई रिविजन नहीं किया गया था। वहीं ऑटो ऑपरेटरों का दावा है कि कम यात्रियों के कारण आमदनी कम हो रही है, काफी लोग वर्क फ्रॉम होम मोड में हैं और स्कूल भी केवल 9 से 12वीं कक्षा के बच्चों के लिए खुले हैं जिस कारण बाध्य होकर किराया बढ़ाना पड़ रहा है। धर्मतल्ला से लोहापूल के लिए पहले किराया 18-20 रु. था जिसे अब बढ़ाकर 23-25 रु. तक कर दिया गया है। पहले बड़ाबाजार से सियालदह का किराया 13 रु. था, ​जिसे अब 15 रु. किया गया है। इसी तरह सामान ले जाने के लिए भी किराया बढ़ा दिया गया है।

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