खुद बनेंगे किंगमेकर, सभी 294 सीटों पर लड़ेंगे पीरजादा

पीरजादा अब्बास सिद्दीकी ने बनाया इंडियन सेक्युलर फ्रंट
बंगाल की राजनीति में ‘भाईजान’ की एंट्री
ममता को नसीहत : भाजपा के प्रभाव को रोकने के लिए मुख्यमंत्री के रूप में सभी को साथ लेकर चलने की जिम्मेदारी निभाएं
कोलकाता : बंगाल के विधानसभा चुनाव में जहां समस्त राजनीतिक पार्टियां अपनी सक्रियता बढ़ा रही हैं, वहीं पीरजादा अब्बास सिद्दीकी उर्फ भाईजान ने नयी पार्टी बनाकर यहां की राजनीति में हलचल पैदा कर दी। पीरजादा अब्बास सिद्दीकी फुरफुरा शरीफ अहले सुन्नतुल जमात के संस्थापक हैं। एक वक्त था जब इनके रिश्ते ममता बनर्जी के साथ काफी अच्छे थे मगर आज के समय में दोनों के संबंधों में इतनी खटास आ चुकी है कि अब्बास सिद्दीकी ने ममता को नसीहत तक दे डाली। गुरुवार को अब्बास सिद्दीकी ने अपनी पार्टी की घोषणा की, जिसका नाम इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) है।
294 सीटों पर उतार सकते हैं प्रार्थी
पीरजादा ने बताया कि वह खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे बल्कि उनकी इच्छा इस बार के चुनावी जंग में किंगमेकर बनने की है। उम्मीदवारों को लेकर उन्होंने कहा कि संभवत: राज्य की समस्त विधानसभा सीटों पर वे प्रार्थी उतार सकते हैं। इसके लिए वह बाकी पार्टियों के साथ बातचीत करने के बाद ही विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि अपने फ्रंट को मजबूत बनाने के लिए वे सभी राजनीतिक दलों का स्वागत करते हैं। उनका कहना है कि इस पार्टी का गठन यह सुनिश्चित करने के लिए किया है कि संवैधानिक लोकतंत्र की रक्षा हो, सभी को सामाजिक न्याय मिले और हम सभी सम्मान के साथ रहें। ओवैसी के साथ पर उन्होंने कहा कि उनके साथ बात हो चुकी है, जो होगा अच्छा ही होगा।
ममता को दी नसीहत
सिद्दीकी ने ममता बनर्जी को नसीहत देते हुए कहा कि भाजपा के मार्च को रोकने के लिए राज्य की मुख्यमंत्री के रूप में सभी को साथ लेकर चलने की जिम्मेदारी उन्हीं की है। इसके लिए उन्हें पहल करनी चाहिए। रही बात तृणमूल के साथ समर्थन की तो वह ममता बनर्जी की इस पहल पर ही निर्भर करता है। सिद्दीकी ने साफ किया कि देश के लिए भाजपा खतरे की घंटी है जिससे बचाने के लिए ही वह इस ओर आगे बढ़ रहे हैं। बंगाल में ममता के साथ टूट पर उन्होंने कहा कि एक उम्मीद और विश्वास के साथ तृणमूल का साथ दिया गया था, मगर उन पर ममता बनर्जी खरी नहीं उतर पायीं।
जनता तक पहुंचने के लिए जल्द जुटेगी पार्टी
अब्बास सिद्दीकी ने अपनी पार्टी का चेयरपर्सन अपने ही भाई नौशाद सिद्दीकी को नियुक्त किया है। साथ ही कहा कि आने वाले दिनों में, हम जनता तक पहुंचने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित करेंगे। 26 जनवरी से उनकी नयी पार्टी अपना प्रचार-प्रसार कार्य शुरू करेगी। नया राजनीतिक संगठन बनाने और चुनाव लड़ने से क्या अल्पसंख्यक वोटों का बंटवारा होगा, जिससे तृणमूल कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ सकता है, इसके जवाब में सिद्दीकी ने कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी की चुनाव संभावनाओं के बारे में चिंता करना उनका काम नहीं है।
किंगमेकर हैं राज्य चुनाव में अल्पसंख्यक वोटर्स
इस चुनाव में अब्बास सिद्दीकी की नजर पूरी तरह अल्पसंख्यक वोटरों पर है जिसका बड़ा भाग तृणमूल के खाते में जाता रहा है। राज्य के चुनाव में करीब 30 प्रतिशत वोट शेयर के साथ अल्पसंख्यक वोटर ‘किंगमेकर’ की भूमिका में हैं। राज्य की 294 सीटों में से करीब 90 सीटें ऐसी ही हैं जिन पर अल्पसंख्यक वोट बैंक का सीधा प्रभाव है। सियासी जानकारों की माने तो भाईजान का यह फ्रंट अगर चुनाव में शिद्दत से लड़ता है तो ममता के मजबूत वोट बैंक में सेंध लगनी पक्की होगी और ऐसा हुआ तो ममता के जीत की हैट्रिक पर भी इसका पूरा असर पड़ेगा।

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