लोकल ट्रेनों के नहीं चलाने से यात्री हुए परेशान, इधर रेलवे को अनुमति का इंतजार

राज्य सरकार द्वारा आगामी 30 जून तक बढ़ायी गयी है सख्ती
हावड़ा : राज्य सरकार की ओर से आगामी 30 जून तक सख्ती बढ़ा दी गयी है। इसमें सरकार ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बंद ही रखा है। इसमें बस, टोटो व ऑटो हैं और सबसे ज्यादा जरूरी लोकल ट्रेनें भी शामिल हैं। डीजल व पेट्रोल के बढ़ते दामों के कारण इन्हें भविष्य में कम किराये में चलाना भी मुश्किल है। रेलवे की ओर से राज्य सरकार से अपील की गयी थी कि वह लोकल ट्रेनों को वापस चलाये लेकिन राज्य सरकार की ओर से यह अनुमति तो दूर और सख्तियाें को बढ़ा दिया गया है। एेसे में बढ़ती महंगायी के कारण लोगों के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट भी महंगा लगने लगा है और लोगों को इंतजार है कि लोकल ट्रेनें खुलें। हालांकि अभी भी यात्रियों को इंतजार करना पड़ सकता है। इसकी वजह से उनकी परेशानियां भी बढ़ रही हैं। वहीं लोकल ट्रेनों में सफर करनेवाले लोगों की संख्या लाखों में है। सरकारी व गैर सरकारी ऑफिसों के खुलने से लोगों की कमाई का एक बड़ा हिस्सा केवल किराये में जा रहा है। रेलवे की ओर से भी राज्य सरकार को पत्र लिखकर परिसेवाओं को धीरे-धीरे सामान्य करने की अपील की गयी है। लोगों ने भी सरकार से लोकल ट्रेनों को चलाने की मांग की है।
लोकल ट्रेनों को चलाया जाये
सन्मार्ग ने लोकल ट्रेन में सफर करनेवाले कुछ यात्रियों से बातचीत की। इस दौरान आम या​त्रियों की मांग है कि स्पेशल के साथ लोकल ट्रेनों को भी कुछ हद तक चलाया जाये। सुकुमार राय ने कहा कि वह कोलकाता में एक प्राइवेट फर्म में काम करते हैं। उनका वेतन इतना नहीं है कि वह पब्लिक ट्रांसपोर्ट यानी ओला-उबर से अपने घर आ-जा सकें। वह ट्रेन के माध्यम से ही रिसड़ा जाते हैं, परंतु उन्हें कई दिक्कतें होती हैं। साथ ही यह डर लगा रहता है कि कहीं आरपीएफ न पकड़ ले। वहीं राशिद हुसैन ने कहा कि वह डानकुनी रहते हैं। उनके लिए यह संभव नहीं है कि वह टोटो या प्राइवेट कार का खर्च उठा सकें। इसलिए वे स्पेशल ट्रेन से ही जैसे-तैसे घर पहुंच जाते हैं। अगर ट्रेनों को सामान्य किया जाय तो बेहतर होगा।
संक्रमण बढ़ने का खतरा
वहीं स्टाफ स्पेशल में सफर करनेवाले स्टाफ का कहना है कि उनके लिए कोई परेशानी नहीं है लेकिन अगर लोकल ट्रेनों को चलाया गया तो संक्रमण का भी खतरा बढ़ सकता है। यही सोचकर राज्य सरकार भी इसके लिए शायद राजी नहीं है। वहीं एक और रेलवे के स्टाफ का कहना है कि ट्रेनों में ज्यादा भीड़ नहीं होती है। वे लोग आराम से ही सफर करते हैं।
स्टेशनों पर बढ़ रही है भीड़
लोकल ट्रेनों को नहीं चलाया जा रहा है लेकिन इसके बावजूद प्रत्येक स्टेशन पर लोगों की भीड़ दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। ये वे लोग हैं जो कि दूर दराज की ट्रेनों से स्टेशन में आ तो गये हैं लेकिन इसके बाद यहां से दूसरी जगह जाने के लिए उन्हें टैक्सी या प्राइवेट कार पर ही निर्भर रहना पड़ता है। रॉबिन जायसवाल का कहना है कि वह बिहार से यहां आ तो गये हैं लेकिन बस या ट्रेन के नहीं चलने के कारण उन्हें कोन्नगर जाने में कई तरह की परेशानियां झेलनी होंगी।
राज्य सरकार की अनुमति का इंतजार
रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी एकलव्य चक्रवर्ती का कहना है कि रेलवे की ओर से राज्य सरकार को पत्र दिया गया है लेकिन राज्य सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आया है। ट्रेनों को चलाने के लिये रेलवे तैयार है। वहीं इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का भी पूरा ध्यान रखा जायेगा। देखा जाये तो लोकल ट्रेनें चलेंगी या नहीं, यह निर्णय राज्य सरकार पर निर्भर करता है।

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