पार्थ चटर्जी के बॉडीगार्ड की भाभी, भाई और दामाद…सब बन गए सरकारी टीचर

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में एसएससी घोटाला (स्कूल सर्विस कमीशन) सुर्खियों में है। पहले ईडी के छापे में 21 करोड़ कैश बरामद हुए और फिर ममता सरकार में मंत्री रह चुके पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी। घोटाले के तार पार्थ की करीबी ऐक्ट्रेस अर्पिता मुखर्जी से भी जुड़े। घोटाले में एक के बाद एक पर्तें खुलती जा रही हैं। पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी का एक और कारनामा सामने आ रहा है। आरोप है कि पार्थ चटर्जी के सिक्योरिटी गार्ड के 10 रिश्तेदारों को भी शिक्षा विभाग में नौकरी मिल गई। एक झटके में भाई-भाभी से लेकर दामाद तक सबको सरकारी टीचर बना दिया गया। अब इस मामले की भी जांच के आदेश हाई कोर्ट ने दिए हैं।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने सोमवार को निर्देश दिया है कि 10 प्राथमिक शिक्षकों को मिली नौकरी की जांच की जाए। आरोप है कि ये दस टीचर्स मंत्री पार्थ चटर्जी के अंगरक्षक विश्वंबर मंडल के रिश्तेदार हैं। इन भर्तियों को पश्चिम बंगाल एसएससी भर्ती घोटाले से सीधे तौर पर जोड़ा जा रहा है। न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय राज्य स्तरीय चयन परीक्षा की उम्मीदवार बिथिका अदक की ओर से प्रस्तुत एक हलफनामे पर सुनवाई कर रहे थे। याचिकाकर्ता के वकील सुदीप्तो दासगुप्ता ने कहा कि कोर्ट ने आदेश दिया है कि पार्थ चटर्जी के जिन रिश्तेदारों पर रुपये देकर नौकरी पाने का आरोप है उनसे हलफनामे लिए जाएं। कोर्ट ने सभी से अपनी नौकरी के विवरण के बारे में एक हलफनामा दाखिल करें और बताएं कि उन्हें यह नौकरी कैसे मिले। यह हलफनामा उन्हें 17 अगस्त तक जमा करना होगा।
परिवार के सदस्यों को मिली नौकरियां
याचिकाकर्ता रमेश मलिक ने 22 जुलाई को शिकायत की थी कि बिश्वंबर के भाई बंशीलाल मंडल और देबगोपाल मंडल, पत्नी रीना मंडल, बहनोई अरूप भौमिक, भाभी पूर्णिमा मंडल और दामाद सोमनाथ पंडित समेत उनके परिवार के अन्य रिश्तेदारों को टीचिंग की जॉब दी गई। मलिक ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड ने उन्हें नौकरी देने के लिए ओएमआर शीट में मनमानी ढंग से हेरफेर की।
तीन अगस्त तक ईडी की हिरासत में पार्थ चटर्जी
न्यायमूर्ति गंगोपाध्याय ने तृणमूल के तेहट्टा विधायक तापस साहा को कथित तौर पर नौकरी के लिए पैसे देने और बाद में उन्हें वापस करने के लिए कहने वाले 13 शिक्षक उम्मीदवारों को 17 अगस्त को पेश होने का निर्देश दिया। पार्थ चटर्जी 3 अगस्त तक ईडी की हिरासत में हैं और उनसे कोलकाता के सीजीओ कॉम्प्लेक्स में पूछताछ की जा रही है। शिक्षा विभाग के स्कैम में एक के बाद एक खुलासे हो रहे हैं। ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि मंत्री पार्थ चटर्जी की करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी 12 शेल कंपनियां चला रही थीं और इन्हीं शेल कंपनियों के जरिए ब्लैक मनी को वॉइट करने का खेल चल रहा था। शनिवार शाम को ईडी ने अर्पिता मुखर्जी के जोका स्थित फ्लैट में छापा मारा था। तलाशी के दौरान कुछ दस्तावेज बरामद किए गए थे। इन दस्तावेजों की जांच के बाद सामने आया है कि शेल कंपनियों के जरिए करोड़ों की ब्लैक मनी को वॉइट किया जा रहा था।
कई प्रॉडक्शन हाउस रेडार पर
अधिकारियों ने बताया कि ईडी के अधिकारियों को कम पहचाने जाने वाले एक अभिनेता के साथ-साथ ओडिशा और तमिलनाडु के अलग अलग प्रॉडक्शन हाउस के लोगों के शामिल होने का शक है। मुखर्जी ने भी कई बंगाली और उड़िया फिल्मों में काम किया है।
ईडी के एक अधिकारी ने कहा, ‘हमें अर्पिता के जोका स्थित फ्लैट से दस्तावेज मिले हैं जो संकेत देते हैं कि वह आर्थिक हेरफेर के लिए कई मुखौटा कंपनियों का संचालन कर रही थी। हमारे पास ऐसी 12 कंपनियों के दस्तावेज हैं। ओडिशा और तमिलनाडु के लोगों की भी इसमें संलिप्तता हो सकती है। इनके बारे में हमारा मानना है कि उन्होंने पैसे को इधर-उधर किया है।’
एजेंसी के अधिकारी ने कहा कि ईडी ओडिशा और तमिलनाडु में कुछ लोगों पर कड़ी निगाह रख रही है और उनसे जल्द पूछताछ की जा सकती है। उन्होंने कहा, ‘हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं क्या अर्पिता ने किसी फिल्म प्रॉडक्शन हाउस में निवेश किया है। हमारे पास ऐसा मानने के लिए कई दस्तावेज, फाइल और दस्तखत किए गए दस्तावेज हैं।’

 

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