ओवरलोडिंग बिगाड़ रही सड़कों की सूरत, 5 दिनों में बदहाल हुई कमारकुण्डू ब्रिज की सड़क

अन्य कई सड़कों का भी हो रहा बुरा हाल
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : ओवरलोडिंग की समस्या पश्चिम बंगाल में कोई नयी नहीं है। धड़ल्ले से यहां ओवरलोडिंग होती है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की नजर में ये नहीं आ रहा है। आलम कुछ ऐसा है कि अब सड़कों की सूरत भी ओवरलोडिंग के कारण बिगड़ने लग गयी है। इसके लिए ट्रक संगठनों की ओर से कई बार राज्य सरकार से अपील की गयी, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात। तसल्ली के अलावा कुछ और नहीं मिला और ना ही ओवरलोडिंग रोकने के लिए ठोस कदम उठाये गये।
हाल में शुरू ​ब्रिज की बदहाल हुई दशा
लगभग 5 दिनों पहले गत 3 जून काे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने वर्चुअली हुगली में कमारकुण्डू ब्रिज का उद्घाटन किया था। इसके लिए राज्य सरकार ने 34 करोड़ रुपये का अंशदान किया है। ब्रिज को तैयार होने में 54 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, लेकिन उद्घाटन के 5 दिनों के अंदर ही ब्रिज की दशा बदहाल हो गयी है। ​ब्रिज की सड़क की पिच उखड़ गयी है। नयी सड़क की पिच कुछ ऐसी हो गयी है जैसे काफी भार के कारण दब गयी हो।
कई सड़कों का हुआ ऐसा ही हाल
केवल कमारकुण्डू ब्रिज की सड़क का ऐसा हाल नहीं हुआ है बल्कि राज्य की अन्य कई सड़कें भी ओवरलोडिंग के कारण भुगत रही हैं। दुर्गापुर रोड, दिल्ली रोड से लेकर जिंजिरिया बजार ब्रिज की सड़क भी ओवरलोडिंग के कारण खराब हो जाती है। बार-बार इनकी मरम्मत की जाती है, लेकिन भारी वाहनों और उस पर भी ओवरलोडेड ट्रकों के गुजरने के कारण पुनः सड़कों का हाल बेहाल हो जाता है। बर्दवान, आरामबाग से आने वाले काफी ट्रक ओवरलोडेड रहते हैं ​जिस कारण सड़कों की दशा बिगड़ गयी है।
ये कहा था मंत्री ने
राज्य के परिवहन मंत्री फिरहाद हकीम ने लगभग साल भर पहले ओवरलोडिंग को लेकर कहा था कि कौन-कौन खदानों से अधिक माल लोड किया जाता है, इसका पता कर संबंधित अधिकारियों को एक्सप्लेनेशन कॉल किया जाएगा। इसके अलावा पुलिस व अन्य विभाग भी ओवरलोडिंग पर नजर रखेंगे। हालांकि साल भर बाद भी इसे लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
यूं होती है मालवाही वाहनों की क्षमता
(सिंगल एक्सल)
सिंगल एक्सल विथ सिंगल टायर : 3 टन
सिंगल एक्सल विथ टू टायर : 7 टन
सिंगल एक्सल विथ फोर टायर : 11.5 टन
(टेंडम एक्सल जहां दो एक्सल के बीच दूरी 1.8 मीटर से कम हो)
टेंडम एक्सल फॉर रिजिड ह्वीक्लस, ट्रेलर व सेमी ट्रेलर : 21 टन
टेंडम एक्सल फॉर पुलर ट्रैक्टर फॉर हाइड्रॉलिक एण्ड न्यूमैटिक ट्रेलर : 28.5 टन
(ट्राई एक्सल जहां दो एक्सल के बीच दूरी 3 मीटर से कम हो)
ट्राई एक्सल फॉर रिजिड ह्वीक्लस, ट्रेलर व सेमी ट्रेलर : 27 टन
एक्सल रो (टू एक्सल विथ फोर टायर ईच) इन मोड्यूलर हाइड्रॉलिक ट्रेलर : 18 टन
(सिंगल एक्सल के लिए 9 टन लोड की अनुमति)
ह्वीकल के ग्राॅस वेट में 5 टन तक की अनुमति दी जा सकती है।
क्या है ओवरलोडिंग का जुर्माना
पश्चिम बंगाल के परिवहन विभाग की ओर से ओवरलोडिंग को लेकर जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, ओवरलोडिंग के लिए 20,000 रु. व प्रत्येक टन अतिरिक्त लोड का 2000 रु. जुर्माने का प्रावधान है। सीमित अनुमति से किसी भी ओर से बाहर जाने पर अतिरिक्त जुर्माना। इसके अलावा परमिट रद्द करने के साथ ही वाहन का रजिस्ट्रेशन भी सस्पेंड करने का प्रावधान है।
क्या कहना है ट्रक संगठन का
फेडरेशन ऑफ वेस्ट बंगाल ट्रक ऑपरेटर्स एसोसिएशन के सांगठनिक महासचिव प्रबीर चटर्जी ने सन्मार्ग को बताया कि मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री के निर्देशों के बावजूद ओवरलोडिंग के कारण सड़कें टूट रही हैं। अभी कमारकुण्डू ब्रिज की सड़क खराब हुई है, ओवरलोडिंग का यही हाल रहा तो जल्द ही ब्रिज भी टूट सकता है। राज्य भर की सड़कें ओवरलोडिंग के कारण खराब हाे रही हैं। ओवरलोडिंग पूरी तरह बंद होनी चाहिये और ऐसा करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने की आवश्यकता है।

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