ओमिक्रॉन : तीसरा साल, तीसरे लॉकडाउन की आहट…

क्या फिर थम जाएगी जिंदगी
दो साल की पाबंदियों ने लगाया विकास पर ब्रेक
अब पाबंदी लगी तो टूट जाएगी कइयों की कमर
सोनू ओझा
कोलकाता : एक-दो दिनों के बाद ही दुनिया नये साल में कदम रखने जा रही है। लोगों के लिए यह तीसरा साल होगा जब नये साल का उत्साह के साथ स्वागत तो किया जा रहा है मगर लोगों को आगे बढ़ने के लिए कोरोना जैसी महामारी दीवार बनकर रोड़ा बनी हुई है। कोरोना की दूसरी लहर के बाद स्थितियां संभल ही रही थीं कि ओमिक्रॉन ने धावा बोलते हुए तीसरी लहर को दावत दे दी। समय नये साल के स्वागत का है, लोग जश्न के मूड में हैं, इस बीच बंगाल में पाबंदियां बढ़ाने का इशारा खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दे दिया है। कुल मिलाकर यह तीसरा साल होगा जब लोगों को एक बार फिर साल के पहले ही हफ्ते से पाबंदियों के नाम पर बहुत कुछ झेलना पड़ेगा। इसमें सबसे अधिक परेशानी सरकारी स्तर पर होने वाली है क्योंकि राज्य को चलाने के लिए सरकार के काम पर एक बार फिर ब्रेक लगने वाला है।
संभले नहीं कि फिर लगा लॉकडाउन
देश के साथ राज्य में भी पिछले दो सालों से लॉकडाउन सभी को अपना निशाना बना रहा है। विशेषकर सरकारी स्तर पर इसका नुकसान अधिक देखा जा रहा है। नवान्न के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकारी कार्यालयों में काम शुरू करने के लिए लोग मानसिक रूप से तैयार हो ही रहे हैं कि लॉकडाउन बीच में रोड़ा बन जा रहा है। लॉकडाउन की वजह से अधिकारियों को ऑड सिचुएशन में काम करना पड़ रहा है। रोस्टर सिस्टम चालू होने की वजह से सभी कर्मचारी दफ्तर नहीं पहुंच पा रहे हैं। वर्क फ्रॉम होम से वैसा काम नहीं हो पा रहा है जैसा कोरोना के पहले होता आया है। कुल मिलाकर काम की रफ्तार को लॉकडाउन या कहें पाबंदियां धीमी कर दे रही हैं।
स्कूल में क्लास कम, फीस अधिक से परेशान अभिभावक
शिक्षण संस्थानों का भी वही हाल है, यहां ऑनलाइन क्लासेज तो चल रही हैं मगर उसका फायदा बच्चों को कितना हो रहा है वह सभी जानते हैं। निजी स्कूलों से लेकर सरकारी स्कूलों तक में व्यवस्था उनके आर्थिक स्तर के आधार पर ही तय की गयी है। सरकारी स्कूलों की व्यवस्था किसी से छिपी नहीं है। अभिभावकों की माने तो इनका यह तक आरोप है कि ऑनलाइन की आड़ में क्लास कम ली जाती है जब​कि फीस पूरी वसूली जाती है। इधर सरकार ने भी शिक्षण संस्थान खोल दिए मगर एक बार फिर कोविड व ओमिक्रॉन के मामले बढ़ने की व​जह से इन संस्थानों पर ताला लग सकता है जो स्कूल प्रबंधन के साथ अभिभावक व बच्चों के लिए बड़ी पीड़ा से कम न होगा।
समय पर पूरी नहीं हो पा रहीं परियोजनाएं
यह तीसरा साल होगा जहां सरकारी परियोजनाओं को एक बार फिर इंतजार का दंश झेलना पड़ेगा। खासकर कोलकाता को लेकर ये दिक्कतें अधिक आने वाली हैं। कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने मेयर पद संभालने के बाद ही कहा कि कोविड के कारण कई काम धीमे पड़े हैं। हमारी प्राथमिकता वैक्सीनेशन है, उसके बाद बच्चों की वैक्सीन से लेकर बूस्टर डोज को लेकर जो दिशा-निर्देश आने वाले हैं, उस पर काम करना है। एक अधिकारी ने बताया कि इस स्थिति में परियोजनाएं निश्चित तौर पर प्रभावित होती हैं और आने वाले दिनों में भी प्रभावित होंगी।

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