OMG! महानगर के इस स्कूल ने 50,000 रु. तक बढ़ायी फीस

अभिभावकों ने जताया विरोध, प्रबंधन को लिखा पत्र
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : महानगर के प्रतिष्ठित स्कूल ला मार्टिनियर ने वार्षिक फीस 50,000 रु. तक बढ़ायी है जिसका अभिभावकों की ओर से पुरजोर विरोध किया जा रहा है। इसे लेकर अभिभावकों की ओर से स्कूल प्रबंधन काे पत्र भी दिया गया है। अभिभावकों का कहना है कि कोरोना महामारी के बीच ऐसे ही सबकी आमदनी कम हो गयी है और ऐसे समय में इतना अधिक फीस बढ़ाना बिल्कुल सही निर्णय नहीं है। ये भी सवाल उठाये गये कि अ​भिभावकों द्वारा की गयी शिकायत के बाबत गत वर्ष कलकत्ता हाई कोर्ट की ओर से निर्देश जारी किये गये थे अन्य वर्षों की तरह इस साल फीस ना ली जाए।
कुछ इस कदर बढ़ी है फीस
ला मार्टिनियर में किंडरगार्टेन में गत वर्ष कोर्ट ऑर्डर के कारण 99,000 रु. वार्षिक फीस के बजाय 79,200 रु. फीस ली गयी थी। हालांकि इस बार किंडरगार्टेन के छात्रों की वार्षिक फीस 1,30,000 रु. हो जायेगी। इसी तरह 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए 2020-21 में 87,000 रु. के बजाय 69,600 रु. वार्षिक फीस ली गयी थी, लेकिन इस साल ये फीस बढ़कर 1,06,000 रु. हो जायेगी।
क्या कहा था हाई कोर्ट ने
कलकत्ता हाई कोर्ट ने गत वर्ष अक्टूबर महीने में निजी और चर्चों द्वारा संचालित स्कूलों से अपने आदेश में कहा था कि अप्रैल 2020 और स्कूलों के ऑन कैम्पस क्लास चालू होने के एक महीने के बाद की अवधि की फीस में 20% छूट दी जाये। इसके अलावा कोर्ट ने लैबोरेटरी, क्राफ्ट, स्पोर्टिंग सुविधाएं अथवा एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज के लिए स्कूल चालू ना होने तक फीस चार्ज करने पर पाबंदी लगायी थी। इस आदेश के बाद ला मार्टिनियर स्कूल ने भी 20% फीस कम की थी और ट्यूशन फीस, सेशन फीस व इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फीस ली गयी थी।
खुलने के बाद फिर बंद हुए स्कूल
गत वर्ष मार्च महीने से कोरोना की रफ्तार तेज होने के कारण स्कूल बंद हैं। हालातों में कुछ सुधार के बाद राज्य सरकार ने 9वीं और 12वीं के छात्रों के लिए गत 12 फरवरी से स्कूल खोलने के निर्देश दिये थे, लेकिन इसके बाद फिर कोरोना के मामले बढ़ने के कारण स्कूलों को पुनः बंद कर ऑनलाइन पढ़ाई चालू करनी पड़ी।
विकास रंजन ने कहा, कोर्ट की अवमानना हुई
वरिष्ठ एडवोकेट विकास रंजन भट्टाचार्य ने सन्मार्ग से कहा कि स्कूल फीस में बढ़ोतरी कोर्ट की अवमानना है। उन्होंने कहा, ‘जब तक स्कूल पूरी तरह खुल नहीं जाते तब तक स्कूलों को कोर्ट के आदेश के अनुसार, कम फीस स्ट्रक्चर पर ही चलना होगा। ऐसे में अभी फीस बढ़ाना कोर्ट के आदेश की अवमानना ही है।’ इधर, ला मार्टिनियर के एक अधिकारी ने कहा, ‘कुछ अल्पसंख्यक संचालित स्कूलों की ओर से कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील दायर की गयी है। हमारी याचिका सुप्रीम कोर्ट में लम्बित है।’
क्या कहा अभिभावकों ने
अभिभावकों की ओर से स्कूल प्रबंधन को चिट्ठी दी गयी है। अभिभावकों ने कहा, ‘इस समय महामारी में सबकी आमदनी कम हुई है और सभी अभिभावक परेशान हैं। मौजूदा समय में हमारे बिजनेस को काफी नुकसान पहुंचा है और सब कुछ बंद रहने के बावजूद हमें अपने स्टाफ को हर महीने वेतन देना पड़ रहा है क्योंकि उनका परिवार हम पर ही निर्भर करता है। ऐसे में स्कूल से आवेदन है कि स्कूल की फीस पुराने स्ट्रक्चर के आधार पर ही ली जाये।’ अभिभावकों ने यह भी कहा कि अभी स्कूल बंद है और ऑनलाइन पढ़ाई के लिए लाइट से लेकर इंटरनेट का खर्च हम ही वहन कर रहे हैं, बच्चे स्कूल की कोई चीज का इस्तेमाल भी नहीं कर रहे हैं, ऐसे में स्कूल द्वारा इतना अधिक फीस बढ़ाना बेवजह है।
क्या कहा स्कूल के सचिव ने
ला मार्टिनियर की ओर से स्कूल के सेक्रेटरी सुप्रियो धर ने सन्मार्ग से कहा, ‘हर साल हम 12 से 15% तक फीस बढ़ाते थे जबकि इस साल हमने केवल 5% ही फीस बढ़ायी है। 2020-21 में हमने कंसेशन के तौर पर 3 करोड़ रु. दिये। स्टाफ के छात्रों और गरीब छात्रों को हम निःशुल्क पढ़ाते हैं। टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ को केवल हमारा स्कूल सातवें वेतन आयोग के तहत वेतन देता है। स्कूल के रख-रखाव में ही करोड़ों रुपये खर्च हो जाते हैं। हमने बेल व्यू को वैक्सीनेशन सेंटर के लिए निःशुल्क में 4 फ्लोर दिये हैं, इसके अलावा अपने सभी स्टाफ को हमें भी हर महीने वेतन देना होता है। आखिर फीस बढ़ाये बगैर ये सब कैसे संभव होगा। अगर कुछ अभिभावकों को परेशानी है तो इसमें हम कुछ नहीं कर सकते हैं।’

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