कांटेक्टलेस यात्रा के लिए अभी या​त्रियों को और करना पड़ेगा इंतजार

लॉकडाउन के कारण फिर डिले हुई डीजी यात्रा प​रियोजना
एयरपोर्ट पर पहुंचा इसका सामान लेकिन अभी भी लगेगा समय
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : कांटेक्टलेस यात्रा के लिए यात्रियों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा। एयरपोर्ट अधिकारी के मुताबिक लॉकडाउन के कारण इस परियोजना में देरी हो रही है। इसे जून के अंत में शुरू होना था लेकिन अभी तक इसकी शुरुआत नहीं हो पायी है। कोरोना के दूसरे वेव के कारण फिर से लॉकडाउन किया गया और इसमें कामकाज ठप हो गया। इस परियोजना की खासियत है कि यात्री का चेहरा फोटो से मिलते ही गेट खुल जाएगा यानी एयरपोर्ट के अंदर प्रवेश करने की मंजूरी मिल जाएगी। एयरपोर्ट पर इस तरह की एक नयी प्रणाली पर काम किया जा रहा है। इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक गेट को लगाने की तैयारी भी शुरू हो गई है। एएआई की ओर से इसकी शुरुआत से पहले परीक्षण किया जाएगा। कोलकाता एयरपोर्ट पर ‘फेशियल इलेक्ट्रॉनिक गेट’ का यही उद्देश्य है।
150 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट है यह
एयरपोर्ट सूत्रों के मुताबिक यह करीब 150 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट है। कोलकाता के अलावा, फेशियल इलेक्ट्रॉनिक गेट शुरू में पुणे, विजयवाड़ा और वाराणसी में स्थापित किए जाएंगे। जापान की एक कंपनी द्वारा इसे लगाया जा रहा है। इसके लिए 3ए, 3बी के प्रवेश द्वार के सामने काम होना है। ड्यूटी पर मौजूद अधिकारियों ने कहा कि इसके मूल रूप से तीन हिस्से हैं। गेट पर सीआईएसएफ का एक अधिकारी होगा। उसके सामने एक टैबलेट स्टैंड होगा। यात्री को पहले आना होगा और सीआईएसएफ अधिकारी को आधिकारिक पहचान पत्र दिखाना होगा। एयरलाइंस कंपनियों को फ्लाइट से कम से कम 6 घंटे पहले यात्री से जुड़ी जानकारियां (डीवाई आईडी सहित) एयरपोर्ट ऑपरेटर के बायोमेट्रिक बोर्डिंग सिस्टम को भेजनी होगी। इसे देखने के बाद यात्री सीआईएसएफ अधिकारी के बगल में रजिस्ट्रेशन कियोस्क पर आ जाएगा। वहां यात्री अपने बोर्डिंग पास को स्कैन करेगा। फिर उस मशीन के कैमरे में यात्री की तस्वीर ली जाएगी। फोटो कियोस्क के मॉनिटर पर देखी जा सकेगी। मशीन में यात्री की तस्वीर अपलोड होने के बाद इसे सीधे सर्वर में भेजा जाएगा। यात्री को अपनी तस्वीर दर्ज करने के बाद एक कोड नंबर मिलेगा, जिसे वह सुरक्षित रखेंगे। यहां तक ​​कि यात्रियों की तस्वीरें, बोर्डिंग पास और गंतव्य से संबंधित सभी विवरण सीआईएसएफ स्टैंड में टैबलेट पर प्रदर्शित किए जाएंगे।
अब चेहरा बनेगा बोर्डिंग पास
इसके बाद जब यात्री एयरपोर्ट में प्रवेश करेगा और गेट के सामने आएगा, तो मॉनिटर पर तस्वीर दिखाई देगी। अगर तस्वीर चेहरे से मेल खाती है तो गेट अपने आप खुल जाएगा। साथ ही मेन गेट से प्रवेश करने के बाद इलेक्ट्रॉनिक गेट के सामने तस्वीर आ जाएगी जहां यात्री चेकिंग संबंधित हिस्से से गुजरेगा। इससे समय की बचत होगी और सही यात्री की पहचान होगी। उल्लेखनीय है कि इसे अप्रैल में शुरू होना था। बाद में इसे जून-जुलाई के लिए आगे बढ़ा दिया गया था। ‘डिजी यात्रा’ का पायलट प्रोजेक्ट पिछले साल मुंबई और हैदराबाद में कुछ चयनित उड़ानों के लिए शुरू किया गया था। इस सिस्टम में यात्रियों को बिना किसी बाधा के हवाई यात्रा की सुविधा प्रदान करने के लिए उनका चेहरा बोर्डिंग पास बन जाता है। फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी सब कुछ वेरिफाई करेगी। यात्रियों को इसके लिए आधार नंबर, पैन या किसी अन्य आईडी का उपयोग करते हुए पहली बार यात्रा करते समय डिपार्चर के दौरान एक बार का सत्यापन होगा।

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