अभिषेक व रुजिरा के दुबई जाने पर रोक नहीं : हाई कोर्ट

जस्टिस विवेक चौधरी ने कुछ शर्तों के साथ दिया आदेश
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के महासचिव व सांसद अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रुजिरा बनर्जी दुबई जा सकते हैं। हाई कोर्ट के जस्टिस विवेक चौधरी ने वृहस्पतिवार को यह आदेश देते हुए कहा कि जीवन का अधिकार एक बुनियादी अधिकार है और इलाज कराना इसी के दायरे में आता है। किसी के पास अगर क्षमता है तो उसे अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने से रोका नहीं जा सकता है।
जस्टिस चौधरी ने आदेश दिया है कि अभिषेक बनर्जी व रुजिरा बनर्जी को अपने विमान यात्रा के टिकट की फोटो कापी, जिस अस्पताल में इलाज कराने जा रहे हैं उसका पता व फोन नंबर और डॉक्टर के एपोइंटमेंट स्लिप के साथ ही जहां रहेंगे उसका ठिकाना और फोन नंबर ईडी को देना पड़ेगा। जरूरत पड़ने पर ईडी के अधिकारी उनसे संपर्क कर सकते हैं। अभिषेक बनर्जी और रुजिरा बनर्जी को ये सारे दस्तावेज देने के साथ ही उनकी वापसी की अंडरटेकिंग भी देनी पड़ेगी। अभिषेक बनर्जी की तरफ से हाई कोर्ट में रिट दायर की गई थी। उन्होंने ईडी को एक आवेदन दे कर कहा था कि उन्हें दो जून से दस जून के बीच सम्मन दे कर पूछताछ के लिए नहीं बुलाया जाए क्योंकि वे अपनी आंखों का इलाज कराने के लिए अपनी पत्नी के साथ दुबई जा रहे हैं। यहां गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि ईडी 24 घंटे का समय देते हुए सम्मन भेज कर उन्हें बुला सकती है। इसी के मद्देनजर अभिषेक ने यह आवेदन दिया था। ईडी ने इसे मानने से इनकार कर दिया तो उन्होंने हाई कोर्ट में रिट दायर कर दी। एडिशनल सालिसिटर जनरल एस वी राजू ने बहस के दौरान आशंका जतायी कि अभिषेक देश छोड़ कर भाग सकते हैं। इसके साथ ही उनकी दलील थी कि कोयला तस्करी कांड का मुख्य अभियुक्त विनय मिश्रा दुबई में है और अभिषेक उससे मिलने जा रहे हैं। इस दौरान जस्टिस चौधरी ने सवाल किया कि जब आप को पता है कि विनय मिश्रा दुबई में है तो उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया। अभिषेक की तरफ से बहस करते हुए एडवोकेट सप्तांशु बसु ने इस आरोप को निराधार बताते हुए कहा कि वे ईडी के समक्ष पूछताछ के लिए हाजिर हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ईडी ने पूछताछ के लिए कोई सम्मन जारी नहीं किया है। इसके साथ ही अभिषेक के विदेश जाने पर कोई रोक भी नहीं लगायी गई है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस चौधरी ने कहा कि मानवीय मूल्यों के आधार पर दोनों पिटिशनरों को दुबई जाने की इजाजत दी जाती है। इसके साथ ही कहा कि किसी को अपनी मर्जी के अस्पताल में इलाज कराने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है।

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